सुनिए चंडी के नौनिहालों की पुकार, यूं ही रोज आईए डीईओ सरकार | Nalanda Darpan

सुनिए चंडी के नौनिहालों की पुकार, यूं ही रोज आईए डीईओ सरकार

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नालंदा डीईओ के चंडी आने की भनक मिलते ही अचानक प्रखंड की बेपटरी शिक्षा पटरी पर आ गई। शिक्षकों में अचानक ह्दय परिवर्तन हो गया। मानो साक्षात सरस्वती उनमें विराजमान हो गई।

11 बजे लेट नहीं और 2 बजे भेंट नहीं की कहावत शिक्षकों में से गायब हो गई। 9 बजते बजते चंडी प्रखंड के अधिकांश सड़क किनारे स्कूलों में शिक्षक छात्रों से पहले ही स्कूलों में विराजमान दिखने लगे।

कई जगहों पर तो ग्रामीण भी अंचभित रह गए। आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। ग्रामीण आंखे मल-मलकर शिक्षकों को एकटक देखे जा रहे थे।

प्रखंड के बापू हाईस्कूल तथा भगवान पुर स्थित गर्ल्स हाईस्कूल को देखने से लग ही नहीं रहा था कि प्रखंड का वही बदहाल शिक्षा व्यवस्था का प्रतीक स्कूल है। जहाँ कल तक शिक्षक स्कूल परिसर में धूप सेंकते मिलते थे, वे अचानक स्कूल की कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाते देखें गए।

नालंदा डीईओ मनोज कुमार चंडी प्रखंड के एक निजी स्कूल के वार्षिकोत्सव उत्सव में शामिल होने के लिए आने वाले थे। उनके आने की भनक मिलते ही शिक्षकों को जैसे सांप सूंघ गया।

स्कूलों में कल तक धूप सेंकने और गप्पें हांकने वाले शिक्षकों में ह्दय परिवर्तन हो गया। डीईओ के भय का असर इतना रहा कि छात्रों को कम से कम एक दिन पढ़ने का सौभाग्य तो मिला। छात्र -छात्राओं ने कहा कि काश! डीईओ रोज चंडी आएं तो उन्हें पढ़ने का मौका मिल जाए।

चंडी प्रखंड में उच्च शिक्षा बदहाल ही नहीं पटरी पर से उतरी भी हुई है। स्कूलों में 11 बजे लेट नहीं 2 बजे भेंट नहीं की कहावत शिक्षकों पर चरितार्थ होती है।

अगर शिक्षक स्कूल आते भी है तो उनका जमीर इतना मर चुका है कि बच्चों को पढ़ाना तो दूर की कौढी हो गई है। स्कूलों में सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराकर खुले धूप में अपनी ठंड भगाना ही उनकी दिनचर्या रह गई है।

कहने को प्रखंड मुख्यालय में उच्च शिक्षा के दो बड़े शिक्षा  संस्थान है।लड़कों के लिए बापू 10+2 तो बालिकाओं के लिए 10+2  एक चंडी थाना से सटा हुआ है तो दूसरा भगवानपुर में।

लेकिन दोनों की शिक्षा व्यवस्था की बात करें तो कुव्यवस्था इतनी कि पूछिए मत। कभी शिक्षा के मामले में तूती बोलने वाली बापू हाईस्कूल की शिक्षा व्यवस्था इतनी चरमर्रा गई है कि यहां शिक्षा की उम्मीद शिक्षकों से की ही नहीं जाए तो वही बेहतर है।

कई बार तो छात्रों ने ही एक्सपर्ट मीडिया न्यूज को बताया कि यहाँ कई विषय में शिक्षक रहते हुए साल खत्म होने के बाद भी एक अध्याय भी पढ़ाई नहीं हुई। पिछले वर्ष छात्रों को यह कहकर उन्हें अर्ध वार्षिक परीक्षा से वंचित कर दिया गया था कि उनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत नहीं है।

जबकि छात्रों ने आरोप लगाया कि जब स्कूलों में पढ़ाई ही नहीं होती है तो वें पूरे दिन स्कूल में क्या करें ? जबकि तत्कालीन एचएम मीणा गुप्ता का आदेश था कि बच्चों की उपस्थिति अंतिम घंटी में किया जाए। चंडी बापू हाईस्कूल में शिक्षक है फिर भी बच्चों की पढ़ाई नहीं हो रही है।

वहीं गर्ल्स हाईस्कूल का यही हाल है।यहां दिनभर छात्राएँ खेल में मस्त रहती है तो शिक्षक धूप सेकने में। इन स्कूलों में उच्च शिक्षा व्यवस्था का भी बुरा हाल है। चंडी प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था भाग्य भरोसे है। जिसका कोई माई बाप नहीं है।

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