ऐ सीएम नीतीश का लक्की चंडी फील्ड, अब तेरे हाल पर रोना आया ! | Nalanda Darpan

ऐ सीएम नीतीश का लक्की चंडी फील्ड, अब तेरे हाल पर रोना आया !

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नालंदा दर्पण (राजू माथुर)। चंडी प्रखंड की ह्दयस्थली बापू हाई स्कूल का ऐतिहासिक खेल मैदान की बदहाली को देखकर उसके हाल पर रोना आ रहा है।

चंडी खेल मैदान इन दिनों राजनीतिक झंझावत में फंसा हुआ है। पहले लाखों की लागत से निर्मित मिनी स्टेडियम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। 40 लखटकिया स्टेडियम आज खंडहर बना हुआ है।

इधर चंडी फील्ड के सौंदर्यीकरण को लेकर मिट्टी भराई का कार्य होना था। मिट्टी भराई को लेकर फील्ड में मिट्टी भी गिर चुका था। लेकिन इसी बीच खबर मिली कि मिट्टी भराई का कार्य रूक गया है। खेलप्रेमियों में जगी एक आशा निराशा बन गई।

चर्चा है कि मैदान में मिट्टी भराई का कार्य कुछ लोगों को पचा नहीं। कार्य शुरू होने से पहले ही मिट्टी भराई का काम रूकना कहीं से भी यथोचित प्रतीत नहीं हो रहा है।

अगर काम होने के दौरान इस कार्य की गुणवत्ता में कमी मिलती तो शिकायत की गुंजाइश हो सकती थी। लेकिन बगैर कार्य शुरू हुए काम पर ब्रेक लग जाएँ तो राजनीतिक साजिश की बू से इंकार नहीं किया जा सकता है।

कहा जा रहा है कि लगभग नौ लाख की राशि से चंडी खेल मैदान में मिट्टी भराई होना था। इसके लिए मिट्टी भी मैदान में गिर चुका था।

इसी बीच इस ठेके को हड़पने की नीति बन गई। बिना काम हुए राजनीतिक अडंगा आड़े आ गया। चंडी प्रखंड के ही एक सफेदपोश ने क्षेत्रीय विधायक से इस कार्य के बारे में कान फूंक दिया। कुछ लोगों ने एक नीति के तहत इसकी शिकायत जिले के डीडीसी से कर दी। जिस कारण मिट्टी भराई का काम ठंडे बस्ते में है।

इसी बीच सीएम नीतीश कुमार के चंडी मैदान में आगमन को लेकर गिरी हुई मिट्टी मैदान में भरवा दी गई, जो अभी अधूरा ही है।

खेल मैदान में मिट्टी की वजह से लोगों को खेलने में परेशानी हो रही है। सबसे बड़ी दिक्कत रेलवे और सिपाही की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों को है। उन्हें दौड़ लगाने की जगह नहीं मिल रहीं है।

दूसरी तरफ चंडी थाना परिसर सटे यह फील्ड जुआरियों और मनचलों का अड्डा बना हुआ है। लेकिन अपने आप को चंडी का भाग्य विधाता कहने वाले मुँह पर ताला लगाएँ रहते हैं।

मिनी स्टेडियम के नाम पर लाखों की राशि पानी में बह गई। लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेगी।

आखिर चंडी के कथित भाग्य निर्माता चंडी फील्ड की सुध क्यों नहीं लें रहें हैं? आखिर कब तक चंडी फील्ड अपनी बदहाली पर आंसू बहाएगी?

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