कल सिनेमा घरों में रिलीज होगी शिक्षा माफिया पर आधारित फिल्म सेटर

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यह माफिया  गिरोह वाराणसी से ऑपरेट होता है, जो एजुकेशन सिस्टम में खामियों का फायदा उठाता है और यह कई आपराधिक कामों में शामिल है, जैसे देशभर में एग्जाम पेपर्स और डुप्लिकेट कैंडिडेट्स को सेट करना ताकि इससे कमाई की जा सके

-: जयप्रकाश नवीन :-

नालंदा दर्पण। फिल्में सिर्फ  समाज का आईना नहीं होती हैं, वो समाज का ख्वाब होती है। उसके अंदर वो तमाम तमन्नाएं भी दिखाई देती हैं, जो समाज के पास हैं। साथ ही वे  तमाम डर और तमाम फिक्र  भी होती है। उसमें समाज की सभी बातें होती हैं, उसकी रिवायतें होती हैं।

ऐसी ही एक गंभीर विषय पर बनी फिल्म ‘सेटर्स’ बिहार के नालंदा के विकास मणि की पहली फिल्म 3 मई को सिनेमा घरों में रिलीज हो रही है।

आईटी के क्षेत्र में अपना पांव जमाने के बाद बतौर प्रोड्यूसर विकास मणि की यह पहली फिल्म  ट्रेलर लांच होने के बाद से ही ‘सेटर्स’ की चर्चा खूब चल रही है।

फिल्म ‘सेटर्स’ शिक्षा माफिया पर आधारित है। जो परीक्षा के पेपर लीक करने वालों के गिरोह से जुड़ा हुआ है।

‘सेटर्स’ वास्तव में हमारे देश की सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था में आई सड़न को दिखाता है।शिक्षा माफियाओं को प्रश्रय देकर राजनीति का एक घिनौना स्वरूप भी इस फिल्म में देखने को मिलता है।

‘सेटर्स’ फिल्म की कहानी के केंद्र  में  उत्तर प्रदेश का  बनारस शहर है।जहाँ  कहानी  मुन्ना भाईगिरी और उसे ऑपरेट करने वाले माफियाओं के बारे में है।

मुन्ना भाईगिरी के तहत  किसी कमजोर स्टूडेंट की जगह ब्रिलियंट स्टूडेंट को बैठाकर परीक्षा दिलवाने की कहानी है। डॉक्टरी से लेकर पुलिस और इंजीनीयरिंग समेत देश की हर बड़ी परीक्षा में पैसा लेकर फर्जी स्टूडेंट को बैठाने वाले कई गैंग हैं। जो पैसे लेकर बच्चों को किसी भी हाल में मेरिट लिस्ट में जगह दिलवा देते हैं। चाहे उसके लिए पेपर लीक करना पड़े या चीटिंग करने के लिए गैजेट्स बांटने पड़े।

बनारस में एक आदमी है, जो इस ‘सेटिंग’ की फील्ड में माफिया का दर्जा रखता है।जिसका नाम है  भैया जी। भैया जी एक  रौबदार और राजनीतिक पहुँच वाला  आदमी है।

जब इन माफियाओं का आतंक ज्यादा बढ़ जाता है, तब ऐसे गिरोह को खत्म करने के लिए दिल्ली से एक टीम बनाने का आदेश बनारस पुलिस को मिलता है। पुलिसवालों की एक टीम बनती है और इस रैकेट का भंडाफोड़ करने निकल पड़ती है। फिर पुलिस और शिक्षा माफिया के बीच  चूहे-बिल्ली की खेल की शुरुआत होती है।

दो साल बाद अभिनेता आफताब शिवदासानी निर्देशक अश्विनी चौधरी तथा प्रोड्यूसर विकास मणि  की फिल्म ‘सेटर्स’ से बॉलीवुड में वापसी करने जा रहे हैं। उनके साथ हैं श्रेयस तलपड़े, जिन्होंने फिल्म में माफिया सरगना की भूमिका निभाई है और आफताब इंवेस्टीगेशन ऑफिसर की भूमिका में है।

अश्विनी चौधरी की फिल्म एग्जाम पेपर लीक पर आधारित है। ट्रेलर से एक अच्छी फिल्म होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि इस फिल्म की तुलना जनवरी में प्रदर्शित हुई इमरान हाशमी की फिल्म ‘वाय चीट इंडिया’ से की जा रही है।

फिल्म ‘सेटर्स’ में आफताब का किरदार एक पुलिसवाले का है।जिन्होंने अपने अभिनय को दमदार बनाने में कोई कोशिश नहीं छोड़ी है। इससे पहले आफताब शिवदसानी आखिरी बार 2016 में ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ में नजर आएं थे।  वहीं श्रेयस तलपडे खुद एक सेटर है। श्रेयस  भी इस फिल्म के साथ दो साल बाद वापसी कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने ‘गोलमाल अगेन’ में काम किया था।

इन दोनों के अलावा फिल्म में विजय राज (रन, गली बॉय), पवन मल्होत्रा (ब्लैक फ्राइडे, बैंग बैंग), मनुऋषि चड्ढा (ओए लक्की लक्की ओए, आंखों देखी), सोनाली सहगल (प्यार का पंचनामा, सोनू के टीटू की स्वीटी), इशिता दत्ता (दृश्यम, फिरंगी) जमील खान (गैंग्स ऑफ वासेपुर, राम लीला), नीरज सूद (बैंड बाजा बारात, रॉकेट सिंह) जैसे एक्टर्स भी ‘सेटर्स’ में नजर आएँगे ।

फिल्म के दो अलग-अलग सीन्स में सोनाली सहगल और इशिता दत्ता भी नजर आएँगी। सोनाली सहगल पर फिल्म में एक गाना भी फिलमाया गया है।सोनाली सहगल के डांस की तारीफ भी हो रही है।

इस फिल्म के निर्देशक  अश्विनी चौधरी सात साल बाद फिल्म ‘सेटर्स’ से वापसी कर रहे हैं। इससे पहले ‘लाडो’ (2000), ‘धूप’ (2003), ‘गुड बॉय बैड बॉय’ (2007) और ‘जोड़ी ब्रेकर्स’ (2012) जैसी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं।

इनमें से ‘धूप’ को छोड़कर बाकी सभी फिल्मों के राइटर भी वो खुद रहे हैं।2017 में उन्होंने ‘रिश्तों का चक्रव्यूह’ नाम का एक टीवी सीरियल भी डायरेक्ट किया था।

‘सेटर्स’ को पूरी गम्भीरता के साथ विषय के अनुकूल बनाया गया है। 3 मई को सिनेमा घरों में रिलीज ‘सेटर्स’ के सामने हॉलीबुड की फिल्म ‘एवेजन गेमएंड’ है। देखना है कि नालंदा के होनहार नवोदित प्रोड्यूसर विकास मणि की ‘सेटर्स’ दर्शकों की उम्मीद पर कितना खरा उतरती है।

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