23 साल बाद ‘साहब’ संग मंच साझा कर बड़ा गदगद हैं पूर्व विधायक !

नालंदा के एक पूर्व विधायक पिछले दो दशक से कई राजनीतिक दलों की परिक्रमा कर चुकने के बाद पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की आस में भगवा भी बन गए।

लेकिन टिकट नहीं मिला। हालांकि मिलने के चांस थे। लेकिन उनकी जगह एक चिरपरिचित दूसरे दल की कमजोर प्रत्याशी बाजी मार ले गया।

इस बार भी आसन्न विधानसभा चुनाव में उनकी तकदीर फिरती दिख नहीं रही है। ऐसा हम नहीं कर रहे हैं, लोग कह रहे हैं। जिन्हें लग रहा है कि बिहार के साहब की रहम शायद नसीब हो जाए।

हालांकि कुछ राजनीतिक जानकार लोग यह भी मान रहे हैं कि बिहार के स्वंयभु साहब “लिखो-फेंको की राजनीति” में शायद ही वे फिट हों।

क्योंकि जब बिहार के साहब दुर्दिन दौर में थे तो इकलौते कांग्रेसी विधायक के तौर पर जातीवादी राजनीती को अंगीकार किया और आव देखा न ताव समता पार्टी में शामिल हो गए। साहब की भी नजर जातीय गणित में सर्वाधिक वोट वाले समाज पर थी, जिसने कभी अंगीकार नहीं किया।

तब जार्ज साहब का दौर था। वर्तमान में हिचकोले खा रहे पूर्व विधायक को समता पार्टी से टिकट मिला और वे जीते भी। वे पार्टी के जिलाध्यक्ष भी बनाए गए। आज उनके चेला-चपाटी मुंह भर मलाई खा रहे हैं और इन्हें चाटना तो दूर देखने को भी नहीं मिल रहा।

साहब ने सीटींग विधायक होने के बाबजूद टिकट काट घर में बैठा दिया। उसके बाद विभिन्न दलों में खूब हाथ-पैर मारे, लेकिन उन्हें बाहर निकलने का मौका कभी नहीं मिला। हालांकि उन्होंने लीक से अगल हटकर चुनाव लड़ा, लेकिन मुंह की खाई।

लेकिन बीते कल नालंदा जिले के एक चुनावी सभा में साहब के साथ उन्हें मंच साझा करने का मौका मिला। इसके पहले कभी एक दूसरे की कभी कोई सुध नहीं ली। 

कल 23 साल बाद सुखद अनुभूति रहा कि उन्हें बिहार के सीएम के साथ मंच साझा करने का मौका मिला।

शायद 23 वर्ष बाद सीएम नीतीश कुमार और पूर्व विधायक का मिलन कोई नया गुल ही खिला दें कोई नहीं जानता। लेकिन फिलहाल जिस तरह के राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आ रहे हैं या उसके पूर्व भी आते रहे हैं, उसमें अकल्पनीय प्रतीत हो रहा है। उसमें भी जब साहब की अदा निराली हो।  फिर भी राजनीति है। कुछ भी हो सकता है। 

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