“वर्ष 1983 के उपचुनाव में चंडी के कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम का प्रयोग हुआ था। केरल के बाद ईवीएम के प्रयोग चंडी विधानसभा चुनाव में हुआ था। जिस प्रखंड में पूरे देश में लागू व्यवस्था का ट्रायल हुआ हो, उसका गुमनामी में जाना लोगों को बहुत अखर रहा है…”

नालंदा दर्पण। आजादी के बाद चंडी के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी राजनीतिक दल की एक भी चुनावी सभा प्रखंड के किसी इलाके में नहीं हुई। इस कारण वैसा चुनावी माहौल नहीं बन सका, जैसा कि शुमार रहा है।

यहां आसमान में एक भी उड़नखटोला नहीं दिखाई पड़ा। जबकि चुनाव के दौरान गांव के लोग नेताओं का हेलीकॉप्टर देखने दूर-दूर से उमड़ पड़ते थे। लोग बड़े नेताओं का भाषण चाव से सुनते थे।

लोगों को उम्मीद थी कि इस चुनाव में भी हेलीकॉप्टर देखने को मिलेगा। कई स्टार प्रचारकों और बड़े नेताओं को सुनने का मौका मिलेगा, लेकिन चंडी के लोगों की यह ख्वाहिश अधूरी रह गयी। लोगों की टिप्पणी है कि चंडी के नेताओं ने चंडी का वजूद ही मिटा डाला।

चंडी प्रखंड में कभी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल, लालकृष्ण आडवाणी, बिहार के पूर्व सीएम कपरूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्र, विन्देश्वरी दुबे, लालू प्रसाद, राबड़ी देवी सहित जॉर्ज फर्नांडीस सहित कई सिने स्टार चुनावी सभा को संबोधित कर चुके हैं।

एक समय था कि जब राज्य की राजनीति करवट लेती थी तो चंडी विधानसभा के प्रतिनिधि का अहम रोल रहता था। परंतु नए परिसीमन में यह क्षेत्र विलोपित हो गया तो राजनीतिक दल इसकी अहमियत भी भूल गए।

1952 में चंडी विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ था। लंबे अरसे तक चंडी ही पूरे राज्य में एकमात्र ऐसा प्रखंड था, जो विधानसभा क्षेत्र भी था। बाद में चंडी से कटकर नगरनौसा तथा थरथरी प्रखंड बना। इसके बाद चंडी विधानसभा क्षेत्र ही नए परिसीमन की भेंट चढ़ गया। आज यह हरनौत का हिस्सा है।

पहली बार वर्ष 1983 में ईवीएम का प्रयोग चंडी विधान सभा में ही हुआ था। जब डॉ. जगरनाथ मिश्र के मंत्रिमंडल में शामि डॉ. रामराज सिंह के असमायिक निधन के बाद उपचुनाव कराए गए। हालांकि उस चुनाव में उनके पुत्र अनील सिंह चुनाव हार गए, लेकिन उसके बाद वे लगातार दो बार विधायक निर्वाचित हुए। पहली बार कांग्रेस पार्टी तो दूसरी बार समता पार्टी से, जो आज जदयू के स्वरुप में हैं।  

चंडी का राजनीतिक अतीत काफी गौरवशाली रहा है। यहां कई महान हस्तियों ने देश की राजनीति में अपना योगदान दिया। देश की प्रथम वित्त राज्य मंत्री तारकेश्वरी सिन्हा हो या संकुल शिक्षा प्रणाली के जन्मदाता पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रामराज सिंह या 1977 विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीतकर बीबीसी की सुर्खी बनने वाले हरिनारायण सिंह। सब यहीं के शान रहे हैं।

 

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