नालंदा दर्पण। अंततः जदयू (राजग) के  कौशलेंद्र कुमार नालन्दा से हैट्रिक आखिर लगा ही लिए। मोदी की सुनामी में लाख विरोधों के बाबजूद ये अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब हो गए।

कौशलेंद्र कुमार को 540888 मत प्राप्त हुए, वही महागठबंधन के प्रत्याशी को 284751 मत प्राप्त हुए।

नालन्दा में वोट प्रतिशत के आंकड़े पर गौर करें तो जदयू के कौशलेंद्र को 52.45 प्रतिशत और महागठबंधन उम्मीदवार अशोक आज़ाद को 27.61 प्रतिशत मत प्राप्त हुआ।

वही 2014 में कांग्रेस राजद गठबंधन उम्मीदवार को मात्र 13.81 प्रतिशत मत प्राप्त हुआ था, जो इस बार 14 प्रतिशत बढ़कर 27.61 जा पहुँचा। लेकिन इसके विपरीत एनडीए के मत प्रतिशत में कमी आ गयी।

2014 में जदयू को 34.93 प्रतिशत और लोजपा भाजपा उम्मीदवार को 33.8 प्रतिशत मत प्राप्त हुआ था। लेकिन मोदी नीतीश के गठजोड़ से जहाँ यह आंकड़ा 68 प्रतिशत होना चाहिए, वह महज 52.68 ही रहा।

आंकड़े कहती है कि एनडीए को पिछले 2014 के मुकाबले 16 प्रतिशत कम वोट मिला तो महागठबंधन को मोदी लहर में भी 2014 से 14 फीसदी ज्यादा वोट प्राप्त हुआ।

वोट के आंकड़े ही यह बताने को काफी है कि कौशलेंद्र कुमार की हैट्रिक कितनी मुश्किल थी, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर जदयू भाजपा के मंत्रियों ने भी नालन्दा में सिर्फ मोदी के नाम पर वोट माँगा, जो सीधे फायदा किया कौशलेंद्र कुमार को।

मोदी लहर में जब मतदाता सिर्फ पीएम को देख रहे थे, तब वोट प्रतिशत में भाजपा जदयू के गठजोड़ के बाबजूद 16 प्रतिशत वोट कम पड़ना और महागठबंधन के उम्मीदवार को 2014 से 14 फीसदी ज्यादा मत पड़ना आगामी विधानसभा चुनाव की नई रंग दिखाएगी।

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