नालंदा दर्पण (रंजीत)। इस्लामपुर से कपटिया मोड़ तक पीडब्लूडी के द्वारा राज्य उच्च पथ सड़क बनाया जा रहा है। लेकिन इस सड़क निर्माण के नाम पर ठीकेदार द्वारा करीब एक वर्ष से गिट्टी-मिट्टी बिछा कर छोड़ दिया गया है। इससे ग्रामीणों-वाहनों को भारी कठनाईयों का सामना करना पड़ रहा है और लोगों का भारी जान-माल का नुकसान हो रहा है।

इस मार्ग पर पढ़ने जाने वाले छात्र छात्राओं को साईकल चलाकर जाना काफी दूभर है। वे  इस सड़क पर उड़ते धूल के बीच अनियंत्रित तेज गति के वाहन के शिकार हो अकाल मौत के शिकार हुए हैं और निरंतर हो रहे हैं।

इस अधूरे सड़क का निर्माण कब तक पूरा होगा, यह कहना मुश्किल है और सड़क निर्माण में जुटा ठेकेदार न जाने कितने मां-बहनों को आँसू बहायेगा, इसका बेहतर जबाव यहां के विधायक, सांसद एवं मंत्री ही बेहतर बता सकते हैं।

 इधर बेन प्रखंड क्षेत्र के वासबन विगहा गांव निवासी योगेंद्र कुमार, सुनील कुमार, राजीव कुमार, अशोक कुमार, नरेश प्रसाद आदि बताते हैं कि बीस वर्ष पहले भी इस सड़क को प्रधानमंत्री योजना से बनवाया गया था, उसमें उनकी जमीन अधिग्रहित हुई थी। लेकिन आज तक मुआवजा नही मिला।

पीड़ित किसान आगे बताते हैं कि वे लोग संबंधित अफसरों की चौखट पर दौड़ते दौड़ते थक हार कर बैठ गए, लेकिन इस बार पुराने सड़क पर ही राज्य उच्च पथ बनाया जा रहा है और फिर उनकी कई बीघा जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है तो वे लोग मुआवजे को लेकर अड़े हुए है और उन्हें अदद अपनी जमीन के मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट की  शरण लेना पड़ा है ।

बहरहाल, बात कुछ भी हो। लेकिन इतना तो तय है कि इसमें विभागीय अफसरों और जनप्रतिनिधियों की घोर लापरवाही साफ तौर पर परिलक्षित है। किसानों की जमीन का मुआवजा दिए वगैर सड़क निर्माण कार्य शुरु करना विकास की कैसी लकीरें खींचना है।

सबसे बड़ी बात कि सड़क निर्माण की अपनी एक प्रक्रिया होती है। ठेकेदार द्वारा पूरी सड़क को उखाड़ कर उस पर गिट्टी-मिट्टी बिछा मौत का रास्ता बना कर छोड़ देना कैसा विभागीय प्रावधान है।

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