“वर्तमान विधायक हरिनारायण सिंह नालंदा में लंबे समय से विधायक बनने का रिकार्ड कायम किए हुए है। अब तक 8 बार चंडी और हरनौत से निर्वाचित हो चुके हैं….”

नालंदा दर्पण (बिहार एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क ब्यूरो)। 25 जून, 1975 की याद आज 44 साल बीत जाने के बावजूद भूलाई नहीं जाती।उन दिनों की दहशत भरी स्मृतियाँ आज भी भय और रोमांच पैदा करती है।

भले ही देश में आपातकाल 1975 में लगा लेकिन आपातकाल की स्थिति 1973-74 से ही बनती दिख रही थी।सरकार और विपक्षी दलों के नेताओं के साथ चूहे-बिल्ली का खेल चल रहा था। कई विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं को गिरफ्तार कर लेने का सिलसिला पहले से ही चल रहा था।

नालंदा के चंडी और हरनौत विधानसभा क्षेत्र से आठ बार प्रतिनिधित्व कर चुके और दो बार मंत्री रहे वर्तमान विधायक हरिनारायण सिंह भी आपातकाल में 21 महीने तक भागलपुर जेल में रहे।

आपातकाल के दौरान  गिरफ्तार कर लिए गए विधायक हरिनारायण सिंह बताते हैं कि 1974 से ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने का सिलसिला शुरू हो चुका था।

1974 में पुलिस ने उनके घर महमदपुर में उन्हें गिरफ्तार करने के लिए रात्रि में घर पर रेड की। लेकिन वे घर पर नहीं मिले। एक दिन जब वे मोटर चलाने खेत पर जा रहे थे तो पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया।

फिर उन्हें गिरफ्तार कर चंडी थाना ले आई। जहाँ उन्हें खाना खिलाकर बिहारशरीफ कारा भेज दिया गया। जहाँ उनके साथ चंडी के ही युवा नेता वीरेन्द्र कुमार सिन्हा और अरूण कुमार चौधरी भी थे।

विधायक हरिनारायण सिंह बताते है कि बिहारशरीफ कारा में 15 दिन रखने के बाद उन्हें भागलपुर विशेष  केंद्रीय कारा में भेज दिया गया। जहाँ उनके साथ वीरेन्द्र कुमार सिन्हा और अरूण चौधरी को भी भेजा गया ।

हरिनारायण सिंह बताते हैं कि उन सब को लगने लगा था कि अब यहां से निकलना मुश्किल है। रिहा होने की उम्मीद ही छोड दी थी। भागलपुर जेल में बिताए वे 21  महीने किसी काले पानी की सजा से कम नहीं था।

जेल की चाहरदीवारी में लगातार 21 महीने गुजराना किसी नरक से कम नहीं था। उस समय गिरफ्तारी के विरोध में कोर्ट भी नहीं जा सकते थे। केवल समान धारा में जमानत के लिए कोर्ट जा सकते थे।

जब भागलपुर जेल में हुआ लाठी चार्ज: बिहार का भागलपुर जेल उन दिनों जेल कम और बिहार के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का बंदीगृह ज्यादा  था। जेल सुधार  के लिए दो बार आंदोलन हुआ जिसमें पुलिस को मजबूरन लाठी चार्ज करना पड़ा।

बताया जाता है कि वर्तमान विधायक  हरिनारायण सिंह के साथ जेल में चंडी के उत्साही युवा नेता वीरेन्द्र कुमार सिन्हा भी थे। जो काफी जुझारू और निडर थे। जेल में भी उनकी नेतागिरी खूब चलती थी।

जेल में रहते हुए इन बंदियों को बेहतर सुविधा नहीं मिल रही थी। इसी कुव्यवस्था के खिलाफ जेल सुधार को लेकर कई बंदियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। जिसमें वीरेन्द्र कुमार सिन्हा की भी भूमिका थी।

जेल में इस आंदोलन के दौरान पुलिस को दो-दो बार  मजबूरन लाठी चार्ज करना पड़ा था। बाद में जेल प्रशासन ने इनकी मांगो को स्वीकार कर लिया।

वीरेन्द्र कुमार सिन्हा जब तक जीवित रहे, उनका वह जुझारूपन, हिम्मत और हौसले में कमी नहीं रही। सिस्टम की नाकामियों के खिलाफ कई बार आंदोलन करते इन पंक्तियों के लेखक ने उन्हें देखा था। उनके सिपहेसलार में अरूण चौधरी थे। उनकी दोस्ती की चर्चे और मिसाल आज भी दी जाती  है।

जब देश से आपातकाल की समाप्ति हुई, तब 21 अंधेरे महीनों के बाद बाद जेल की काल कोठरी की रौशनी से निकले चंडी के तीनों नेताओं हरिनारायण सिंह, वीरेन्द्र कुमार सिन्हा और अरूण चौधरी।

देश में आम चुनाव की घोषणा हो चुकी थी। जनता पार्टी का गठन भी हो चुका था। हरिनारायण सिंह को उस समय लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर मिला लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया।

तीन चार महीने के बाद जब विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई तो उन्हें चंडी विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी का टिकट मिला। इस विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस के दिग्गज डा. रामराज सिंह का कब्जा था।

लेकिन डॉ रामराज सिंह ने स्वयं चुनाव नहीं लड़कर उन्होंने हरिनारायण सिंह के खिलाफ भतहर के केश्वर प्रसाद यादव को खड़ा कर दिया।साथ ही उन्होंने क्षेत्र के एक नामी अधिवक्ता गोपाल प्रसाद को भी समर्थन दे दिया, ताकि वोटों का बंटबारा हो जाए और हरिनारायण सिंह चुनाव हार जाएँ। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

1977 विधानसभा चुनाव में हरिनारायण सिंह ने केश्वर प्रसाद यादव को 16 हजार मतों से हराकर बीबीसी रेडियो की खबर में जगह बनाई थी। उन्होंने कांग्रेस और डॉ रामराज सिंह की परंपरागत सीट पर कब्जा जमा लिया था। लेकिन 1980 के चुनाव में हरिनारायण सिंह अपनी सीट नहीं बचा सकें।

वर्तमान विधायक हरिनारायण सिंह नालंदा में लंबे समय से विधायक बनने का रिकार्ड कायम किए हुए है। अब तक 8 बार चंडी और हरनौत से निर्वाचित हो चुके हैं।

वर्ष 1990 में लालूप्रसाद मंत्रिमंडल में कृषि राज्य मंत्री और नीतीश मंत्रिमंडल में 2010 में शिक्षा मंत्री रह चुके है। फिलहाल हरिनारायण सिंह हरनौत विधानसभा क्षेत्र से विधायक है।

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