“आम जनता जनप्रतिनिधि चुनता क्यों है? सिर्फ इसलिए कि वह उसकी गाढ़ी कमाई से मोटा हिस्सा वेतनामद आदि लेते रहे और बुनियादि समस्याओं की सुध तक न ले तथा अपनी कान में ठेंठी डाले रहे। शायद इस गुमान में कि काम-धाम करो या न करो, जाति-वर्ग- पार्टी-समीकरण के नाम पर वोट तो मिल ही जाएगा….”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। जी हां, हम बात कर रहे हैं सीएम के गृह जिले नालंदा के राजगीर विधानसभा क्षेत्र से जदयू-राजद महागठबंधन के बल निर्वाचित विधायक रवि ज्योति की।

नालंदा में पुलिस नौकरी से अचानक वीआरएस लेकर इन्होंने अपना नाम जिस गांव की मतदाता सूची में है और जहां इनका मकान भी है, वहां की हालत देख कर दंग रह जाएंगे। वहां के लोग त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे हैं और य माननीय हैं के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा।

बताया जाता है कि दीपनगर थानान्तर्गत कोरई गांव में करीब 500 घरों के बीच एक बड़ा सा तालाब है। इस तालाब का निकास अतिक्रमण के कारण बंद हो गया है। गांव के हर घर-गली का गंदा पानी इसी तालाब में गिरता है। थोड़ी सी बारिश में ही गांव की हर में इसका पानी प्रवेश कर गया है। यहां भीषण गंदगी-जल जमाव से महामारी का खतरा उत्पन्न हो गया है।

कहा जाता है कि इस ऐतिहासिक तालाब में कभी पंचाने नदी से पानी आता था। गांव वाले इसी तालाब से अपनी खेतों में सिंचाई करते थे।

इस संबध में गांव वाले अनेक बार विधायक का ध्यान आकृष्ट कराया, लेकिन उनकी अनसुनी बरकरार रही। जबकि वे यहीं के बूथ पर वोट देने आते हैं और फोटों खिंचवा चले जाते हैं क्योंकि उनके घर के आसपास ऐसी नारकीय स्थिति थोड़े है।

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