“पिछले 2 जुलाई को इसी अधिनियम की जानकारी देने के लिए बिहार शरीफ के शहीद हरदेव भवन में पुलिस पदाधिकारियों के साथ कार्यशाला का आयोजन किया गया था। जिसमें जिले के अधिकांश थानेदार उपस्थित नहीं हुए थे। यानी सीधे तौर पर यह कहा जाए कि नालंदा पुलिस इन दिनों बेलगाम हो गई है…..”

एक्सपर्ट मिडिया न्यूज नेटवर्क (बिहार शरीफ ब्यूरो)। नालंदा पुलिस के सितारे इन दिनों गर्दिश में चल रहे हैं। पहले नगरनौसा उसके बाद अब बिहार थाना इंस्पेक्टर विवादों में घिर गए हैं।

चोरी के आरोप में एक 13 वर्षीय किशोर के ऊपर एफआईआर दर्ज कर कोर्ट में पेश किए जाने पर कोर्ट ने उनसे 3 दिनों के भीतर जवाब तलब करते हुए न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश जारी कर दिया है।

दरअसल यह पूरा मामला मोबाइल चोरी के आरोप में पकड़े गए एक किशोर का है। किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने किशोर को न्यायालय में पेश किए जाने पर नाराजगी जताई।

उन्होंने मोबाइल चोरी के आरोप में पकड़े गए किशोर को उनके माता-पिता को इसलिए सौंप दिया कि उसने बयान दिया कि मुझे झूठे मोबाइल चोरी के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है । 

इस संबंध में अभियोजन पदाधिकारी राजेश पाठक ने बताया कि यह  किशोर अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

उन्होंने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम 2016 के नियम  के उल्लंघन के आरोप में बिहार थाने के इंस्पेक्टर दीपक कुमार के विरुद्ध यह कार्रवाई कि गयी है। चुकि इस अधिनियम के अनुसार सामान्य एवं गंभीर प्रवृत्ति के अपराधों में जब तक किशोर के साथ व्यस्क की संलिप्तता  सामने नहीं आती है, तब तक प्राथमिकी नहीं दर्ज करने का नियम है।

ऐसी परिस्थिति में थानाध्यक्ष इस तरह के मामले को  जनरल डायरी में दर्ज कर सकते हैं। साथ ही आरोपी किशोर से संबंधित सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट तैयार करते हुए किशोर को उनके माता-पिता के साथ किशोर न्याय परिषद में पेश करना है। 

लेकिन बिहार थानाध्यक्ष ने सारे नियम कानून के विरुद्ध थाने में एक 13 साल के किशोर के विरुद्ध सामान्य प्रकृति के अपराध में प्राथमिकी दर्ज करते हुए बिना सामाजिक पृष्ठभूमि के रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए न्यायालय में पेश कर दिया। 

उन्होंने बताया कि आदेश में कहा गया है कि विभागीय कार्रवाई और किशोर न्याय अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के प्रशिक्षण के लिए क्यों नहीं पुलिस महानिदेशक को सूचित किया जाए। यदि थाना अध्यक्ष ने निर्धारित तिथि को स्पष्टीकरण नहीं दिया तो किशोर न्याय परिषद एक पक्षीय कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। 

कई ऐसे किशोर के मामले कई थानों में पड़े हैं, जो पिछले 5 या 10 वर्षों से निष्पादित नहीं किए गए हैं। ऐसे परिवेश में डायरी  नहीं प्रस्तुत करने वाले थानेदारों के ऊपर भी न्यायालय की गाज गिर सकती है। 

सीधे तौर पर यह कहा जाए कि नालंदा पुलिस सारे नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से अपना काम कर रही  हैं। अभी पिछले दिनों ही नगरनौसा थाना पुलिस ने एक बेकसूर दलित नेता को अपहरण के मामले में पकड़ कर इतना प्रताड़ित किया कि वह दुनिया से ही अलविदा हो गया। हालांकि मामला उजागर होने के बाद थानेदार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 

उसके बाद महिला थाना भी विवादों में घिरा एक सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता का मामला दर्ज करते हुए उसे तीन-चार दिनों तक टालमटोल किया गया। वरीय अफसरों द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद उस पीड़िता का मामला दर्ज हो सका। 

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