सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की बदली और ट्रांसफर तो आपने सुना होगा। लेकिन सुशासन राज में स्कूल के सारे बच्चों का ट्रांसफर किसी दूसरे स्कूल में नहीं सुना होगा। यह बिल्कुल सत्य ही नहीं, हकीकत भी है…………………..”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। नालंदा के चंडी प्रखंड में एक ऐसा भी स्कूल है जहाँ के सारे बच्चों को एक किलोमीटर दूर दूसरे गाँव के स्कूल में भेज दिया गया है। लेकिन प्रधान सचिव के आदेश के बाद भी स्कूल का नहीं हुआ मरम्मत।

बच्चों के शिक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ का मामला चंडी प्रखंड के दस्तूरपर प्राथमिक विधालय का है।

जहाँ के सभी बच्चों का स्थातंरण बीईओ रेणू कुमारी के निर्देश पर प्राथमिक विधालय योगिया कर दिया गया है। इसके पीछे विधालय भवन का जर्जर होना बताया जाता है।

चंडी प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था पटरी से पूरी तरह उतर चुकी है। यहां सिर्फ नाम के स्कूल चल रहे है। एक ऐसा ही स्कूल है दस्तूरपर गाँव में जहाँ स्कूल का भवन बिलकुल ही जर्जर है।

छत का प्लास्टर कई बार गिर चुका है। स्कूल का भवन इतना कमजोर हो चुका है कि यह कभी भी गिर सकता है। स्कूल भवन की स्थिति को देखकर शिक्षक बच्चों को बरामदे में पढ़ाते थे।

वही अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरने लगे। जिस कारण बच्चों का पलायन निजी स्कूलों में होने लगा।

स्कूल की प्रधानाध्यापिका ललिता कुमारी ने कई बार विभाग का ध्यान आकृष्ट कराई, लेकिन विभाग कान में तेल डालें सुनते रहा। उन्हें बच्चों की जिंदगी की परवाह थोड़े ही है।

स्कूल की इस हालत को देखते हुए बीईओ रेणु कुमारी ने दो महीने पहले  स्कूल के बच्चों का हस्तांतरण लगभग एक किलोमीटर दूर योगिया में कर देने का निर्देश जारी  किया।जिसके बाद बच्चों को बिहटा-सरमेरा हाईवे पारकर स्कूल जाना पड़ रहा है।

यानी बच्चे एक जोखिम से निकल कर जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। वैसे बीईओ का साफ निर्देश भी है कि बच्चों के आने जाने की सुरक्षा का ख्याल रखा जाए

इधर आरटीआई कार्यकर्ता उपेन्द्र प्रसाद सिंह ने स्कूल की स्थिति के सुधार तथा नया भवन निर्माण को लेकर विभागीय अधिकारियों को पत्र भी लिखा। लेकिन जब उनकी नींद नहीं खुली तो उपेन्द्र प्रसाद सिंह ने हिलसा लोक शिकायत निवारण से लेकर प्रमंडलीय आयुक्त के पास भी गुहार लगाई।

यहाँ तक कि स्कूल की स्थिति की रिपोर्ट शिक्षा विभाग के सचिव के पास भी पहुँचा हुआ है। प्रधान सचिव ने सुनवाई करते हुए एक साल पहले ही स्कूल की मरम्मति का आदेश दिया था।लेकिन आदेश अभी तक हवा हवाई ही साबित हो रहा है।

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