न्यायालय में वादकारी का हित सर्वोपरि कहा गया है, लेकिन उसके साथ साथ यह भी देखना होगा कि न्याय का हित किस दृष्टिकोण से सर्वोत्तम है……………….”

नालंदा दर्पण (चुन्नु)। उक्त बातें पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही ने हिलसा व्यवहार न्यायालय में 12 कोर्ट के नव निर्मित भवन का उद्घाटन के दौरान कही।

उन्होंने आगे कहा कि इस विचारधारा में बदलाव की आवश्यकता है, जिसमें हर मुकदमे में की हार या जीत की निगाहें से लोग देखते हैं।

मुख्य न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही ने भवन उद्घाटन के बाद अधिवक्ताओं के बुलावे पर हिलसा अधिवक्ता संघ में पहुचे और अधिवक्ताओं की विभिन्न समस्याओं को सुनकर उन्होंने जल्द की निदान करने का आस्वाशन ही नहीं दिया, बल्कि हिलसा में रजिस्ट्री ऑफिस के पीछे दस कट्ठे जमीन में वकीलों को बैठने के लिये भवन निर्माण करवाने का निर्देश जिलाधिकारी डॉ योगेंद्र कुमार को कहा।

 हमारे अधिवक्ता या न्यायाधीश गण जिस कर्तव्य में लगे हैं उसमें अध्ययन और अभ्यास सबसे बड़ी आवश्यकता है। कनिष्ठ अधिवक्ता गण इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गण को समुचित आदर देना सीखे और उनके सीखे हुए ज्ञान को प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम प्रयास होगा।

उन्होंने कहा कि आज की तारीख में जितनी भी विसंगतियां हो चाहे जिस प्रकार विधि व्यवस्था में कमियां दिखाई जाती है, बावजूद हमारे देश का नागरिक न्यायिक व्यवस्था में सुदृढ़ विश्वास रखता है। उसी विश्वास व आस्था के बल पर आप की कर्तव्य परायणता की परीक्षा होती है। अधिवक्ताओं से मुकदमों में तारीख पर तारीख न लेने का सलाह दिया।

इस मौके पर पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सह निरीक्षी न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय, जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्याम किशोर झा ,जज दिलीप कुमार सिंह, जय किशोर दुवे ,संजय कुमार मिश्रा, देवेश कुमार, डीएम योगेंद्र कुमार आदि लोग शामिल थे।

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