यूनियन के अध्यक्ष-पुत्र कर रहा अवैध वसूली, आखिर गरीब मजदूरों के निबंधन में क्या है लोचा?

यहां करीब 50 हजार कार्ड बना हुआ है। उसमें बहुत कम लोगों का नवीकरण हुआ है। इसके तहत 16 हजार यूनियन से बना हुआ है। जिसमें महज 1500 मजदूरों का नवीनीकरण हो पाया है। जबकि इस योजना में प्रति वर्ष सरकार कर मजदूरों को तीन हजार रुपये देती है। 2009 से 2017 के बीच बने  जिले के 40 हजार मजदूर इस सुविधा से बंचित रह जायेंगे…….”

नालंदा दर्पण। बिहारशरीफ के पावा पंचायत के छातो गांव के दर्जनों मजदूरों ने श्रम कल्याण केंद्र मैदान में मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राजकिशोर और उसके पुत्र प्रभाकर पर मजदूरों के निबंधन के नाम पर 5-5 सौ रूपया लेकर निबंधन नहीं कराने का आरोप लगाया है।

मौके पर मौजूद मीना देवी, मनोज मांझी, दुखित मांझी, साबो देवी, रविन्द्र मांझी, बती देवी, सदन मांझी, इंदू देवी व लक्षमिनिया देवी ने बताया कि करीब चार माह पहले मनरेगा जॉब कार्ड और पांच-पांच सौ रुपया लिया। यह कहकर कि मजदूर का निबंधन करा देंगे त पैसा मिलेगा। चार महीने से अधिक बीत गया अभी तक न पैसा आया, न निबंधन हुआ और जॉब कार्ड भी रख लिया

वहीं छोटू मांझी, मंजु देवी, रमपतिया देवी, अरुण देवी, विक्कू मांझी, रालो देवी, भुनय राम, रेखा देवी, दशरथ मांझी व बबीता देवी ने कहा कि काम नहीं हुआ तो उन लोगों का जॉब कार्ड और पैसा लौटाने को कहा।

उधर, मजदूर यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि बिहार भवन एवं अन्य सन्निनिमार्ण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत निबंधन के लिए कागज विभाग में जमा है।

अध्यक्ष ने कहा कि जिले में करीब 50 हजार आवेदन जमा हुआ है। उसमें अभी तक महज 10 हजार मजदूरों का ऑनलाइन निबंधन हो पाया है।

अध्यक्ष ने पैसे की वसूली के सवाल पर कहा कि यूनियन चलाने के लिए एक दिन का मजदूरी के रुप में पांच-पांच सौ रुपया लेते हैं। असंगठित कामगारों व शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना में निबंधन व अनुदान देने का प्रावधान है।

अध्यक्ष की दलील है कि इसका निबंधन व नवीकरण में बहुत ही लोचा है। यह हर मजदूरों के लिए खुद आकर निबंधन कराना संभव नहीं है। अगर किसी तरह कोई मजदूर निबंधन करा भी लिया तो अभी तक उसका नवीनीकरण नहीं हो पाया है।

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