राजगीर नगर पंचायतः पूर्व पार्षद की शिकायत पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव से मांगी जांच रिपोर्ट

नालंदा दर्पण।  राजगीर नगर पँचायत कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पनपते आक्रोश के बीच पूर्व पार्षद श्याम किशोर भारती ने प्रधानमंत्री कार्यालय में PMOPG/E/2019/0690713 शिकायत दर्ज कराई है। जहां से उस शिकायत को बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी को जाँच के लिए भेज दिया गया है।

श्री भारती ने नगर कार्यालय में करोड़ो के घोटाले की जांच की मांग करते हुए लिखा है कि संवैधानिक व्यवस्था में नगर पँचायत नागरिक सुविधाओं के जगह भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है। जनहित की योजनाएं लंबित है और सामग्री खरीद, टेंडर, विभागीय कार्य में लूट मचा हुई है। नगर के विभिन्न वार्डो में प्राक्कलन घोटाला किया जा रहा है। वितीय लेनदेन की लूट में नगर विकास के साथ सोशल ऑडिट करने वाली संस्थाएं भी बंदरबाट में शामिल है। पिछले कई वर्षों के वितीय लेनदेन की जांच से करोड़ो के घोटाले सामने आ सकता है।

उन्होंने लिखा है कि राजगीर नगर पँचायत कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार का प्रमुख केंद्र बन गया है। जहाँ करोड़ो के घोटाले की बात नगर पँचायत के जनप्रतिनिधि से लेकर आम जनता उठा रही है।

वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर चालू वित्तीय 2019-20 की नगर पंचायत के कार्यों और वितीय लेनदेन की जांच की जाए तो करोड़ों का घोटाला का उजागर हो सकता है।

स्वतंत्र नगरपालिका बोर्ड के सामान्य और सशक्त स्थायी समिति के जनहित के प्रस्तावों के आलोक में नगर पँचायत द्वारा जनप्रतिनिधियों के सहयोग से करोड़ो का घोटाला किया गया है।

यहां नागरिक सुविधाओं के नाम पर विभिन्न सामग्री क्रय ,टेंडर और विभागीय कार्य की आड़ में नगर पालिका के कोष को जमकर लूटा गया है। सामग्री क्रय में बाजार मूल्य से दोगुनी कीमत पर खरीददारी की गई है।

एक ट्रैक्टर जो मार्किट में 6 से लाख में मिलता है उसे 9 लाख 70 हज़ार में खरीदी गई है। नगर पँचायत के हर छोटी से बड़ी खरीददारी में नगर पँचायत को जमकर लुटा गया है।

पानी टैंकर,डस्टबिन, वाहने, रिक्शा ऐसे सभी क्रय किये गए अन्य सामान बाजार मूल्य से दोगुनी कीमत पर लिये गये और कमीशन का बंदरबांट किया गया। कुछ सामग्री तो सिर्फ कागजों पर ही खरीद लिये गए है जो कहीं नगर के भंडार में है ही नहीं।

यहां टेंडर,ई टेंडर और विभागीय स्तर पर कार्य कराने में भी सरकारी राशि का खूब गबन किया गया है। विभिन्न योजनाओं का प्राक्कलन जाँच हो तो प्राक्कलन कुछ तो धरातल पर कार्य कुछ दिख रहा है।

वित्तीय चालू वर्ष में लूट इस कदर है कि कुछ कार्य तो बगैर कराए ही राशि की बंदरबांट कर ली गयी। एक ही सड़क को कागज पर दो बार ढलाई की गई है। कार्यो में  गुणवत्तापूर्ण अभाव के बाबजूद राशि निकाल ली गई है।

स्थानीय पार्षद आवाज़ उठाते रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार की चरम सीमा पर कोई फर्क नही पड़ा। नगर पालिका द्वारा फर्जी तरीके से दर्जनों लोगों की अवैध बहाली भी वितीय वर्ष  में की गई है, जबकि 2014 से ही इस पर सरकार ने रोक लगा रखी है और मानदेय के नाम पर अवैध निकासी हो रही है।

श्री भारती ने अफसोस प्रकट करते हुए लिखा है कि नगर पंचायत जैसी स्वतंत्र बोर्ड संस्थाए पर अंकुश लगाने में विफल नगर विकास विभाग से लेकर सोशल ऑडिट करने वाली संस्थाए विभाग / महालेखाकार कार्यालय / वितीय एजेंसी भी जाँच की आड़ में अपनी भागीदारी तय कर लेती है।

राजगीर नगर पँचायत कार्यालय की सोशल ऑडिट करने वाले लोग भी इस तरह के घोटाले में सम्मिलित होकर सरकार को आधा अधूरा फर्जी रिपोर्ट पेश करते आ रहे हैं।

जिस तरह नागरिक सुविधाओं के नाम पर जनता की सेवा की जगह लोग बोर्ड को लूटने में लगे हैं। संवैधानिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और सरकार के खिलाफ नकारात्मक माहौल पनप रहा है।

अतः जनहित में राजगीर नगर पँचायत कार्यालय के विगत कई वर्षों के वितीय लेनदेन, योजनाओं के क्रियान्वयन और सोशल ऑडिट के फर्जी रिपोर्ट की जांच आवश्यक जरुरी है।

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