इस वर्ष भी अव्वल रहा नालंदा JJB, औसतन निपटाए रोजाना 5 मामले

वेशक नालंदा जिले में जिले में बाल अपराधों की संख्या बढ़ी है। लेकिन यहां हाल के वर्षों में मामलों के निष्पादन की गति भी बढ़ी है…….”

नालंदा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) औसतन 5 केस रोजाना निष्पादित कर बिहार सूबे में लगातार दूसरी बार अव्वल रहा है। जबकि यहां जेजेबी हाफ टाइम ही कार्यरत है।

यदि आंकड़ों के लिहाज से फुल टाइम जेजेबी की तुलना करें और जेजेबी में जेएम कोर्ट के निष्पादित मामलों को भी जोड़ दिया जाये तो कुल निष्पादित वादों की संख्या 1,198 हो जाती है।

यूनिसेफ द्वारा जनवरी से नवम्बर तक के आंकड़ों के मुताबिक नालंदा में जेजेबी के 739 मामले निपटाये गये हैं।

जेएम के रूप में भी न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्र के कोर्ट में 459 मामलों का 11 माह में निष्पादन हुआ है।

पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी यूनिसेफ द्वारा नवंबर माह तक के आंकड़े जारी किए गए हैं।

इस वर्ष जनवरी से लेकर नवंबर माह तक जुवेनाइल से संबंधित कुल 752 मामले थानों में दर्ज होकर किशोर न्याय परिषद तक पहुंचा है।

पिछली बार 11 माह में यह आंकड़ा 559 था। हालांकि किशोर न्याय परिषद द्वारा काफी तेजी से मामले भी निपटाए गए।

परिषद द्वारा पेटी, सिरियस और हिनियस श्रेणी के कुल 734 मामले निष्पादित किए गए। यदि जेजेबी में मामलों के निष्पादन की गति धीमी होती तो स्थिति और भी गंभीर रहती।

आंकड़ों को देखा जाये तो अपराध की गति निष्पादन की गति पर भारी पड़ी। यदि ऐसा नहीं होता तो नवम्बर माह तक लंबित मामलों का आंकड़ा कुछ और होता।

जनवरी माह में 1158 मामले पेंडिंग थे। नवम्बर माह में 1176 मामले पेंडिंग हैं। यानी जनवरी माह से भी ज्यादा मामले नवम्बर माह में पेंडिंग है।

हालांकि यह आंकड़ा पेंडिंग मामलों की नहीं बल्कि दर्ज नये मामलों के कारण बड़ा दिख रहा है। जेजेबी ने कुल 734 मामले निष्पादित किये।

जनवरी माह के आंकड़ों से निष्पादित मामलों को घटा दिया जाये तो नवम्बर माह तक मात्र 424 मामले ही रह जाते हैं, लेकिन 752 नये मामले दर्ज हुए। जिसके कारण यह संख्या नवम्बर माह में 1176 दिख रहा है।

बिहारशरीफ में राज्य के पहले चाइल्ड थाने की फरवरी 2019 में शुरूआत हुई। टाउन थाना में यह कार्यरत है। थाने को बहुत ही आकर्षक लुक दिया गया है।

जेजेबी नालंदा में औसतन 5 से अधिक केस प्रतिदिन निष्पादित किए गए। यह स्थिति तब है जब नालंदा में हाफ टाइम जस्टिस जुवेनाइल बोर्ड ही कार्यरत है। जेजेबी के प्रधान न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्रा जेएम का भी कार्यभार देख रहे हैं।

बावजूद उन्होंने लगातार सुनवाई कर जेजेबी से संबंधित 739 और जेएम से संबंधित 459 मामलों का निष्पादन किया। उन्होंने महज 223 वर्किँग डे में 1198 मामलों का निष्पादन किया।

यहां बाल और किशोर अपराधियों के लिए बनाये गये पर्यवेक्षण गृह की भी कार्यप्रणाली में काफी बदलाव हुआ है। यहां रह रहे विधि विरूद्ध बालक और किशोरों के स्कील डेवलपमेंट पर पूरा जोर दिया जा रहा है।

मोमबत्ती निर्माण, मछली पालन, फर्नीचर निर्माण, टेलरिंग, बागवानी की ट्रेनिंग के साथ-साथ तनाव दूर करने के लिए विपस्यना भी कराया जा रहा है। पर्यवेक्षण गृह में रह रहे दो किशोरों ने प्रथम श्रेणी से इंटर और मैट्रिक भी पास किया है।

आम तौर पर दूसरी जगहों पर पर्यवेक्षण गृह नाकारात्मक बातों को लेकर चर्चा में रहा है लेकिन बिहारशरीफ पर्यवेक्षण गृह ने सुधारात्मक कार्यक्रमों को लेकर अपनी एक अलग पहचान बनायी है। जेजेबी के प्रधान न्यायाधीश और सदस्य यहां की गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग भी करते रहते हैं।

पिछले साल से 2 प्रतिशत अधिक निष्पादन:  पिछले साल चार माह में पेटी नेचर के 80 प्रतिशत मामले जेजेबी में निष्पादित किए गए थे। इस बार यह आंकड़ा 82 प्रतिशत है। 2018 में 1087 वादों का निस्तारण हुआ था।

किशोर न्याय परिषद के सदस्य धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि लगभग 10 साल या उससे ऊपर के 260 से अधिक पुराने वादों का इस वर्ष निष्पादन किया गया। जेजेबी नालंदा वाद निस्तारण में सूबे में लगातार दूसरी बार अव्वल रहा है।

इस वर्ष दिसम्बर माह से जेजेबी फुल टाइम हो जाएगा। शिवहर, किशनगंज सहित तीन जिले को छोड़कर सभी जगहों पर जेजेबी को फुल टाइम कर दिया गया है। इन तीन जगहों पर 250 से कम केस लंबित है।

आम तौर पर मामला न्यायालयस्तर पर देरी से लंबित नहीं है। जेजेबी ने हाफ टाइम होने के बावजूद काफी तेजी से मामले निपटाये हैं। पेंडेंसी का मुख्य कारण उम्र की जांच में देरी और उपस्थिति में टाल मटोल करना है।

पेशेवर व्यस्क अपराधी भी खुद को नाबालिग साबित कर जेजेबी एक्ट का लाभ उठाना चाहते हैं। जिसके कारण मामला मेडिकल जांच के लिए चला जाता है और निष्पादन में देरी होती है।

इसका उदाहरण राजगीर गैंगरेप, सिलाव और लहेरी रेप का मामला है। जिसमें बालिग अपराधी ने हिनियस क्राइम करने के बाद भी जेजेबी का लाभ उठाने की कोशिश की थी।

पुलिस के कारण भी लंबित हैं मामलेः पुलिस की सुस्ती के कारण भी मामले लंबित है। जेजेबी में 2019 तक दर्ज 1163 मामलों में से 597 में बोर्ड को चार्जशीट और डायरी का इंतजार था। यह एक उदाहरण है।

कई ऐसे मामले हैं जो अनुसंधान के कारण लंबित रह जाते हैं। यह स्थिति तब है जब जेजेबी द्वारा पुलिस पदाधिकारियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।

जेजेबी के 6 चर्चित फैसलेः पड़ोसी को मारपीट कर जख्मी करने के दो किशोरों को किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने 1 माह तक वोटरों को जागरूक करने की सजा सुनायी। सुनवाई के दौरान दोनों पर आरोप सही साबित हुआ था।

महिला के बैग को काटकर पैसा निकालने के दोषी नाबालिग को राष्ट्रगान सुनाने और राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री का नाम बताने पर दोषमुक्त कर दिया गया था। नाबालिग को बालिग बताने वाले अफसरों को 7 दिन की ट्रेनिंग का भी आदेश दिया गया था।

किशोर पर प्रेम प्रसंग में आठवीं की छात्रा का अपहरण का मामला था। उसे अपने पंचायत की महादलित बस्ती में बच्चों को पढ़ाने की सजा दी गई। तीन महीने तक मुखिया और अभिभावक की देखरेख में किशोर ने यह सजा पूरी की।

लड़की के अपहरण के दोषी किशोर को बीते अगस्त माह में मॉबलिचिंग के खिलाफ जागरूक करने की सजा दी गयी। 2013 से यह मामला चला आ रहा था। सुनवाई के दौरान आरोपी किशोर उम्र 17 वर्ष साबित हुई थी और वह इंटर का छात्र था। पढ़ाई प्रभावित न हो इसे ध्यान में रखकर यह सजा सुनायी गयी थी।

25 दिन में दहेज हत्या के किशोर को तीन वर्ष की सजा सुनाई गई। सिर्फ 25 दिन मुकदमे की कार्रवाई चली। बाइक नहीं देने पर किशोर ने घवालों के साथ मिलकर पत्नी की हत्या कर दी थी। किशोर को 3 वर्ष आवासित रखने का निर्देश दिया।

प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने छेड़खानी के दोषी नाबालिग को सार्वजनिक स्थान पर 250 पौधे लगाने की सजा सुनायी थी। सभी पौधे सिविल कोर्ट के नाजिर की देखरेख में उनके बताये स्थान पर लगाये गये थे। मामला चंडी से जुड़ा था।

ट्रैफिक नियम सिखाने की भी सजा दी गयी। मारपीट के मामले में दोषी पाये गये दो किशोरों को मिश्रा ने बिहारशरीफ शहर के चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस के साथ यातायात व्यवस्था में मदद करने का निर्देश दिया। दोनों किशोर दीपनगर के थे। 

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