मगही पान किसानों की टूटी कमर, उधर प्रशासन-सरकार है बेखबर

इसलामपुर (नालंदा दर्पण)। पूजा की थाली हो या मुंह में औषधीय लाल खुशबु। मगही पान का कोई सानी नहीं है। लेकिन इस साल की भारी ठंढ ने मगही पान उत्पादक किसानों को बदहाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

प्राकृतिक दंश झेल रहे किसानों ने बताया कि इस ठंड के प्रकोप से मगही पान का काफी  नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई करना बड़ी मुश्किल है। अब इस पुश्तैनी धंधा को छोड़  कर बाहर पलायन करने के सिवा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।

मगही पान किसान श्रवण कुमार, शशिकांत चौरसिया, दिनेश चौरसिया, अशोक चौरसिया, नवलेश चौरसिया, शुभाष चौरसिया, शशीकांत चौरसिया,  मुन्ना चौरसिया, रवि चौरसिया, अखिलेश चौरसिया, सरयुग चौरसिया, प्रमोद चौरसिया के अनुसार इस प्रखंड के डौरा, वौरीसराय, वैरा, इमादपुर, अर्जुन सेरथुआ समेत एक दर्जन से उपर गांवों में मगही पान का फसल उपजाया जाता है। लेकिन यहां प्राकृतिक ठंड से हर साल पान की फसल का  का काफी नुकसान होता है।

उन्हें फिर चिंता सता रहा है कि महाजन का कर्ज, लड़की का शादी, परिवार का भरण पोषण कैसे होगा।  ठंड से पान का पता दागदार होकर लाखों का फसल नुकसान हो रहा है। यदि सरकारी सहायता नहीं मिला तो उनके लिए मगही पान की फसल उपजाना संभव नहीं है।

किसानों का आरोप है कि यहां स्थापित मगही पान अनुसंधान केंद्र महज खानापुर्ति के लिए है। उससे पान की खेती में कोई मदद नहीं मिलती। इस बार पान की फसल पर दवा छिड़काव का असर भी नहीं हो रहा है।

ऐसे में प्रशासन-सरकार को चाहिए कि वे तत्काल पान किसानों की सुध ले। सहायता- मुआवजा मुहैया कराए। ताकि किसान अपने पुश्तैनी धंधा को बरकरार रख सके।

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