किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने स्वयं सभी परीक्षार्थी बच्चों की मॉनिटरिंग ही नहीं की, अपितु समय समय पर सबका मोटिवेशन क्लास भी लेते रहे। इनमें कुछ गंभीर मामलों के आरोपी भी शामिल हैं

नालंदा दर्पण डेस्क। पर्यवेक्षण गृह बिहारशरीफ में चलाये जा रहे सुधारात्मक कार्यक्रमों का असर दिख रहा है और यहां रह रहे बच्चों में काफी सुधार हो रहा है।

इंटर की परीक्षा में इस बार यहां रह रहे सात बाल बंदी शामिल हुए थे। इनमें से छह पास कर गये हैं। चार फर्स्ट डिविजन से और दो सेकेंड डिविजन से पास हुए हैं। एक असफल रहा।

इन बाल बंदियों को यह सफलता पर्यवेक्षण गृह में चलाये जा रहे सुधारात्मक कार्यक्रम के तहत दी जा रही पढ़ाई की सुविधा और सेल्फ स्टडी व बेहतर माहौल के कारण मिली है।

यहां गीत संगीत, पढ़ाई व हैंडिक्राफ्ट के साथ-साथ खेलकूद, बागवानी जैसी गतिविधियों से भी बाल बंदियों को जोड़ा गया है।

इन सातों परिक्षार्थियों को भरोसे पर परीक्षा देने की अनुमति दी गयी थी। ये बिना किसी मानसिक दबाव में परीक्षा दें। इसके लिए किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने इनपर विश्वास करते हुए बिना किसी सुरक्षा गार्ड के खुद जाकर परीक्षा देने की अनुमति दी थी। उन्होंने इनका बढ़ाने के लिए कुछ राहत देने की भी बात कही थी।

इन परीक्षार्थियों ने भी विश्वास कायम रखा और मौका मिलने पर भी नहीं भागे। बिना किसी निगरानी के सामान्य छात्रों की तरह परीक्षा में शामिल हुए और वापस पर्यवेक्षण गृह भी लौट आये और परीक्षा में बेहतर रिजल्ट लाकर भी खुद में हो रहे बदलाव पर मुहर लगा दी।

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