क्वारेंटाईन सेंटरों के नाम पर यातनागृह चलाना बंद करो- भाकपा माले

प्रवासी मजदूरों की लगातार मौत क्यों, राहत पैकेज के नाम पर धोखा क्यों तथा क्वारन्टाइन सेंटर के नाम पर यातना गृह क्यों? इन तीन सवालों को लेकर राष्ट्रव्यापी “प्रधानमंत्री जवाब दो” अभियान के तहत भाकपा (माले) ने आज बिहारशरीफ कार्यालय में प्रतिवाद दिवस मनाया…

बिहारशरीफ (नालन्दा दर्पण)। पार्टी कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 16 प्रवासी मजदूरों एवं उत्तर प्रदेश के औरैया में ट्रक हादसा में 24 प्रवासी मजदूरों की मौत पर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

इस मौके पर माले नेताओं ने कहा कि जिस देश के मजदूर हजारों किलोमीटर पैदल एवं साईकिल से चल रहे हैं, देश के पीएम ने आत्मनिर्भरता, आत्मसंकल्प पर भाषण दिया अगर यह देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के बारे में था, तो इस समय करोड़ों लोगों की जान बचानी पहले जरुरी थी।

लाखों-लाख की संख्या में सड़कों पर चल रहे मजदूरों के बारे में एक भी शब्द न बोलकर प्रधानमंत्री ने संकेत दे दिया है कि कामगार और गरीब वर्ग सरकार से कोई उम्मीद न करे। वह आत्मनिर्भर बने और दिल्ली-मुम्बई से यूपी-बिहार की यात्रा अपनी पैरों एवं साइकिल से ही करे!

माले नेताओं ने कहा कि पीएम मोदी का आर्थिक पैकेज का भाषण निहायत चुनावी भाषण था, जिसमें संकट में फंसे, भुखमरी और जान के संकट से जूझ रहे लोगों के लिए कुछ नहीं था। इधर पिछले मात्र 10 दिनों में 90 प्रवासी मजदूर मर गए, यानी कि हर दिन दो हादसा।

नेताओं ने आगे कहा कि सरकार 6 नए एयरपोर्ट के साथ आज कोयला खान, रेलवे, रक्षा क्षेत्र को बेच रही है तो स्कूल-अस्पताल का स्वायतत्ता के नाम पर  निजीकरण करने की बात की जा रही है। देश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों एवं संसाधनों को कॉरपोरेट के हवाले किया जा रहा है।

माले नेताओं ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत और 20 लाख करोड़ के नाम पर जनता को दोबारा मूर्ख बनाया जा रहा है, क्वारन्टीन सेंटर के नाम पर यातना गृह में तब्दील कर दिया गया है। क्वारंटाइन सेंटर में समय से नास्ता भोजन नहीं दिया जा रहा है और प्रवासी मजदूरों को पीटा जा रहा है।

माले पार्टी इसका प्रतिवाद कर माँग करती है कि लॉकडाउन में मारे गए प्रवासी मजदूरों के परिजनों को 20-20 लाख रुपया दिया जाय एवं तीन महीने का मुफ्त राशन दिया जाय। किसानों के सभी प्रकार के कर्जो को माफ किया जाए। लॉकडाउन के कारण बिहारशरीफ में बीड़ी मजदूरों का जीवन संकट में पड़ गया है, जिससे भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।

बीड़ी का काम घरेलू काम की श्रेणी में आता है इसलिए लॉकडाउन  4.0 में पुनः खोला जाए एवं बीड़ी मजदूरों को लॉक डाउन में पत्येक मजदूर को 10 हजार रुपये दिया जाए तथा बिहारशरीफ के फुटपाथियों को लॉक डाउन पैकेज के रूप में 10 हजार रुपये एवं तीन महीने का मुफ्त राशन, पहचान पत्र, वेंडिंग जोन का प्रबंध करो।

इस मौके पर माले नेता एवं ठेला फुटपाथ वेंडर्स यूनियन के जिला सचिव रामदेव चौधरी, जिला अध्यक्ष किशोर साव, आइसा के जिला संयोजक जयन्त आनन्द, माले के जिला कमिटी सदस्य मकसूदन शर्मा, माले नेता अनिल पटेल, इंसाफ मंच के सरफराज अहमद खान, मुन्ना कुमार, प्रदीप राउत, रामप्रीत केवट आदि नेताओं ने उक्त मांगों पर बल दिया।

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