इस क्वारंटाइन सेंटर में 6 दिन से नहीं मिला खाना, कुछ तो शर्म करो निकम्मों

नालंदा दर्पण (धर्मेंद्र / हिलसा)। बिहार के मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा में क्वारंटाइन सेंटर की बदहाली इस कदर है की अन्य राज्यों से दर दर की ठोकर खाए आए प्रवासी मजदूरों को अपने ही पंचायत में 6 दिन से भूखा रखा गया है।

प्रवासी मजदूरों का सब्र का बांध टूटने पर हंगामा किया। प्रवासियों ने आरोप लगाया कि वे लोग लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों से दर दर की ठोकर खा रहे थे, सरकार के पहल के बाद किसी तरह अपने गाँव पहुंचे।

लेकिन पंचायत में क्वारंटाइन सेंटर में जाने की सलाह दी गई। इसके बाद हम लोगों ने अपने अरपा पंचायत के क्वारंटाइन में रहने के लिये पहुंचे, परन्तु जगह नहीं मिलने के बाद वे लोग खुद गौर भट्टविगहा में जाकर क्वारंटाइन हो गए।

अभी महिलाएं पुरुष बच्चे मिलाकर कुल 56 प्रवासी रह रहे है। जहाँ उन लोगों को रहने के लिये न तो स्कूल का कमरा दिया गया और नहीं खाने पीने का व्यवस्था की गई। सारा व्यवस्था घर के परिवारों ने किया।

यहाँ उन प्रवासियों को 6 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक एक बार भी खाना मुहैया कराना तो दूर कोई देखने तक नही आया है।

वहीं वार्ड सदस्य के द्वारा दो दिन सिर्फ अपने तरफ से प्रवासियों को शरबत पिलाया गया है। वे लोग मजबूर बस अपने घर से खाना मंगाकर खाने पर मजबूर हैं। जिससे संक्रमण फैलने का डर मन में बना रहता है। लेकिन पापी पेट नहीं मानता है।

स्थानीय मुखिया या अधिकारी की उदासीन रवैया से उन लोगों की हालत खराब है। उनकी स्वास्थ्य जांच नहीं की जा रही है। अनेक की तबीयत भी खराब है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

प्रवासी कहते हैं कि वे लोग भी अन्य राज्यों में विकास पुरुष के गृह जिला का होने का गर्व करते थे, लेकिन नालंदा जिला क्वारंटाइन सेंटर की हालत बद से बदतर है। यह हम लोग कल्पना भी नहीं करते थे।

हालांकि हंगामा करने के बाद सेंटर पर एक शिक्षक एव रसोईया आया है। खाना बनाने की तैयारी में लगे हैं। पता नहीं अभी भी खाना मिलेगा या नहीं।

वही मुखिया पति अखलेश शर्मा ने कहा कि पंचायत का जो क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया था उसमें 40 लोगों की रहने की व्यवस्था थी। जगह नहीं रहने के कारण दूसरा क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। वहाँ 56 प्रवासी रह रहे है।

प्रवासियों के 6 दिन से खाना नहीं दिए जाने के आरोप को गलत ठहराते हुए 3 दिन से रहने और व्यवस्था के अभाव में प्रवासियों को खाना नहीं दिए जाने की बात खुद कह रहे है।

बहरहाल जो भी हो, क्वारंटाइन् सेंटर की अव्यवस्था से प्रवासी काफी नाराज है। लेकिन उनकी नाराजगी के आखिर क्या रह जाते हैं मायने, जब निकम्मे तंत्र को शर्म ही न हो।

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