बदइंतजामी की हदः इसलामपुर के क्वारंटाइन सेंटरों में परिजन यूं दे रहे खाना

इसलामपुर (नालंदा दर्पण)। प्रखंड के विभिन्न गांवों में बाहर से आए प्रवासी मजदूर जैसे-तैसे हालत में अपने गांव तो पहुच गये हैं, लेकिन घर वालों ने घर में रहने की इजाजत नहीं दे रहें है। इस वजह से ग्रामीण व पंचायत प्रतिनिधियों के बीच कोरोना को लेकर दहशत का महौल बना है।

ग्रामीणों ने बताया कि बाहर से गांव में आने वाले मजदूर स्थानीय स्कूल व पंचायत भवन में शरण तो ले लिए है। फिर भी ग्रामीणों के बीच कोरोना के चलते हलचल बढी हुई है। लोग काफी सावधानियां बरता रहे हैं।

इतना ही नहीं, जनप्रतिनिधि भी डरे सहमे हैं। उत्क्रमित माध्यमिक विधालय मदारगंज, त्क्रमित मध्य विधालय अर्जुन सेरथुआ सराय, पंचायत भवन कोचरा, प्राथमिक विधालय रसुली विगहा आदि जगहों पर ठहरने वाले मजदुरों ने बताया कि यहां बने क्वारंटाइन सेंटर में सिर्फ पानी, बिजली, शौचालय की व्यवस्था है।

इसके अलावे सरकारी तौर पर कोई सुविधा नहीं है। जनप्रतिनिधि-अफसर तक नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्हें खाना नाश्ता आदि घर से परिवार लाकर देते हैं।

मजदूर रविश कुमार, गुडिया कुमारी, रीतिका कुमारी, रुपेश कुमार, गोल्डन चौरसिया, राजीव चौधरी, विजय रविदास आदि ने बताया कि सुरत, दिल्ली, बंग्लोर, आंध्रप्रदेश,पूना, हरियाणा, गाजियाबाद, मुंबई, नोएडा, यूपी, अमृतसर,चेन्नई आदि शहरों से वे लोग बहुत मुश्किल से गांव पहुंचे हैं। लेकिन यहां सरकारी स्तर से किसी तरह की सुविधा मुहैया नहीं करवाया जा रहा है।

समाजिक कार्यक्रता आलोक कुमार ने बताया कि इन सेंटरों में रहने वाले मजदुरों में पुरुष, महिला, बच्चा भी शामिल है और सरकारी लाभ नहीं मिलने से उन्हें परिजन तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर घर से खाना लाकर देते है। तव जाकर सेंटर पर रहने वाले भोजन करते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here