जी हां, यह है नालंदा पुलिस, सुशासन के घर की पुलिस !

“यहां प्रायः थानों में पुलिस पीड़ित से ही उस वाहन का तेल खर्चा तक वसूलती है, जिससे वह जांचस्थल तक जाती है। आलावे थाना के पुलिस अधिकारी-कर्मी की संख्या और मामले की पड़ताल की दिशा बिना हिसाबन पैसे लिए तय नहीं होते। क्या थाना वाहनों के तेल या पुलिस कर्मियों को वेतनादि विभागीय तौर पर नहीं मिलती है? यह सवाल आम जमानस की नियति बन गई है…

नालंदा दर्पण डेस्क। सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के थानों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। आम तौर पर कहा जाता है कि यहां प्रायः थानेदारों के पदास्थापन में योग्यता कम और अवैध कमाई की कार्यकुशलता अधिक देखी जाती है।

पीड़ित विनोद का जख्मी पुत्र…

पिछले कुछ दिनों से नालंदा थाना के एक दारोगा द्वारा रिश्वत लिए जाने की वीडियो वायरल हो रहा है। जिस पुलिस एएसआई द्वारा बेशर्मी से घूस मांगे जा रहे हैं, उसका नाम वीर बहादुर सिंह बताया जाता है।

हालांकि वीडियो में कथित दारोगा सीधे 2 हजार की सीधे रिश्वत लेते हुए नहीं दिख रहा है, लेकिन उसकी आवाज स्पष्ट तौर पर सुनाई देती है कि भष्ट्राचार की गंगोत्री में वह कितना बेशर्म है।

यहां के थानेदार पर भी आए दिन उंगलियां उठती रहती है, लेकिन चूकि वह सत्ता दल के एक हाई प्रोफाईल नेता का चहेता वर्दीधारी है, इसीलिए उसके खिलाफ की गई शिकायत पर कहीं कोई सुनवाई नहीं होती।

नालंदा थाना में दर्ज प्राथमिकी…

नालंदा थाना के सकरौढ़ा गांव निवासी विनोद कुमार बताते हैं कि उनका भाई से संपति विवाद चल रहा है। जिसकी शिकायत लेकर थाना गए और थाना प्रभारी से शिकायत की। उस दिन पुलिस वाहन के तेल के नाम पर 500 रुपए लिए गए। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इधर, जब विनोद कुमार अपनी पत्नी के साथ थाना में भाई के खिलाफ परेशान किए जाने की लिखित शिकायत कर घर वापस लौटे तो उनके पाटीदार भाई ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर थाना में हुई शिकायत की चर्चा करते हुए झगड़ा करने लगे और मारपीट किया, जिसमें विनोद की पत्नी एवं पुत्र गंभीर रुप से जख्मी हो गए। जाहिर है कि थाना वालों ने शिकायत की हुबहू जानकारी तुरंत विरोधी पक्ष को दिए

इसके बाद जब वे शिकायत लेकर नालंदा थाना गए तो थानेदार शशि रंजन ने एएसआई वीर बहादुर सिंह से मिलने की बात कही। शिकायत तो दर्ज कर ली गई, लेकिन तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इसके बाद कार्रवाई की बात करने पर दारोगा वीर बहादुर सिंह पैसे की मांग करने लगा। लॉकडाउन में किसी तरह इंतजाम कर 2000 रुपए दिए गए। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई और पुनः पैसे की मांग किए जाने लगे।

विनोद बताते हैं कि वे बच्चों की पढ़ाई को लेकर सपरिवार किराए पर बिहार शरीफ में रह रहे थे। जहां वे नीजि वाहन चला सबका भरण पोषण कर रहे थे। लेकिन लॉकडाउन में उन्हें गांव लौटना पड़ा, जहां उनका भाई घर में रहने देना नहीं चाहता था।

विनोद ने यह भी बताया कि जब उसने नालंदा पुलिस द्वारा और पैसे की मांग से अजीज आ गए तो उन्होंने 2000 रुपए मांगने-लेने का वीडियो बनाया और वायरल कर दिया

वीडियो वायरल होने के बाद राजगीर डीएसपी सोमनाथ प्रसाद ने विनोद को फोन किया और कार्यालय में आकर मिलने की बात कही है। लेकिन वह एसपी के पास जाकर शिकायत करेगा।

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