फर्जी मुकदमा लादने से बाज नहीं आ रही पुलिस, थरथरी थानेदार ने तो हद कर दी !

नालंदा बिहार के सीएम नीतीश कुमार का गृह जिला माना जाता है। बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय भी नालंदा में चर्चित एसपी रह चुके हैं। लेकिन हाल के वर्षों में यहां की पुलिसिंग जितनी लच्चर दिखती है, उससे कहीं अधिक शातिर। यहां के कई कर्तव्यहीन थानेदार किसी पर भी फर्जी मुकदमा लादने से बाज नहीं आ रहे। आश्चर्य की बात है कि अनेक बार उनकी धूर्तई बिल्कुल नंगा हो जाता है, लेकिन उनकी ऐंठन में कोई कमी नही आ रही…

ताजा मामला नालंदा जिले के थरथरी थाना से जुड़ा सामने आया है। वहां के थानेदार रंजीत कुमार ने एक स्थानीय युवा समाजसेवी दीपक कुमार पर गंभीर धाराओं के तहत सिर्फ इसलिए फर्जी मुकदमा कर दिया कि उन्होंने एक गरीब शोषित दलित को मुश्किल से उबारने का अप्रत्यक्ष प्रयास किया।

थानेदार का जब एक रिश्वत का खेल उजागर हुआ तो उसने फर्जी  तरीके से उल्टे दीपक पर ही वसूली का मुकदमा दर्ज कर लिया। लेकिन उसके जो सच सामने आए हैं, वे पुलिस विभाग को काफी शर्मसार करने वाले हैं।

भादवि की धारा-420,323,504,507 के तहत थरथरी कांड संख्या- 71/2020 में दीपक कुमार पर आरोप लगाया गया है कि किसी जलंधर बिंद से उसने उसके पिता की इंज्यूरी रिपोर्ट बनाने के नाम पर 10 हजार की ठगी की और बाद में जान मारने की धमकी दी। इस प्राथमिकी में आवेदक का अंगुठा का निशान दर्शाया गया है।

इधर, दीपक कुमार ने जब शिकायतकर्ता से संपर्क साधा तो वे यह जानकर हैरान रह गए कि जलंधर बिंद ने ऐसी कोई लिखित शिकायत थाना में नहीं की है। बल्कि उसे जख्मी पिता की मृत्युपरांत पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के बहाने थानेदार ने बुलाया और एक सादे पेज पर अंगूठा का निशान ले लिया।

श्री जलंधर बिंद ने एक वीडियो रिकार्डिंग, कोर्ट एफिडेविट के जरिए अपना बयान वरीय पुलिस अफसरों को भी भेजी है। उन सबका आंकलन से साफ है कि सुशासन के ऐसे थानेदार कितने धूर्त हैं।

दरअसल, थरथरी थाना के एक कथित मुंशी से जुड़ा एक ऑडियो वायरल हुआ था। उस ऑडियो के अनुसार पुलिस ने एक दलित परिवार की 2 महिलाओं और 2 पुरुष को आपसी मामले में बिना शिकायत थाने ले जाकर हाजत में बंद कर दिया और 10 हजार रुपए की रिशवत पर छोड़ने को राजी हुई। उसमें पीड़ित पक्ष द्वारा 7 हजार रुपए तत्काल दिए गए और 3 हजार रुपए बाद में इंतजाम कर देना तय हुआ।

बाद में जब गच्छित 3 हजार रुपए नहीं मिले तो थानेदार ने पीड़ित दलित परिवार पर दबाव बनाना शुरु किया। इससे बिचलित एक ऑडियो वायरल हुआ। उससे पुलिस द्वारा 10 हजार रुपए की रिश्वत की कलई सार्वजनिक हो गई।

फिर क्या था। थरथरी थानेदार रंजीत कुमार अपने पुराने पुलिसिया तेवर में आ गए और खुली कलई की जड़ दीपक कुमार को मानते हुए एक अज्ञानी व्यक्ति को फर्जी तरीके से खड़ा कर एक मुकदमा दर्ज कर लिया।

आईए नीचे देखिए-सुनिए-समझिए वीडियो व उपलब्ध अन्य दस्तावेज, जो थानेदार का कच्चा चिठ्ठा यूं ही खोल जाती है….

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