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      राजगीर बबुनी गैंगरेप के सभी 7 आरोपी दोषी करार के निहितार्थ सबक ?

      नालंदा दर्पण डेस्क।  सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा स्थित अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में 25 सितंबर, 2019 को एक नाबालिग युवती संग दरींदगी और निर्लज्जता की हद पार कर जाने वाले आरोपियों को बिहार शरीफ कोर्ट ने दोषी करार दिया है। कोर्ट उनके खिलाफ 13 जनवरी को सजा मुकर्रर करेगी।

      rajgir babuni gang rape 2खबर है कि बिहार शरीफ कोर्ट में एडीजे सप्तम मो. मंजूर आलम ने राजगीर बबुनी गैंगरेप के सभी सात आरोपियों को दोषी करार दिया है। आरोपी मिथुन राजवंशी, आशीष राजवंशी, राम चौधरी, सोनू कुमार, राहुल राजवंशी, करन राजवंशी, रंजन राजवंशी द्वारा सितम्बर 2019 में इस घटना को अंजाम दिया गया था।

      इनके विरुद्ध साक्ष्य सही पाये जाने पर दोषी करार दिया गया है। सजा निर्धारण पर फैसला 13 जनवरी को होगा।

      आरोपियों के विरूद्ध 25 सितम्बर 2019 को राजगीर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। सभी आरोपियों को स्पेशल पॉस्को एक्ट के तहत हुई बहस और 19 साक्षियों के परीक्षण के बाद आईसीपी और पॉस्को एक्ट की धारा के तहत दोषी पाया गया है। प्राथमिकी पीड़िता के फर्द बयान के आधार पर दर्ज की गयी थी।

      बता दें कि पीड़िता 16 सितम्बर 2019 की सुबह सवा पांच बचे कोचिंग में पढ़ाई के अपने घर से राजगीर के लिए निकली थी। राजगीर सब्जी बाजार के समीप उसका दोस्त मिला। जिसने पहाड़ी पर घूमने के बाद कोचिंग जाने को कहा। पहाड़ पर घुमते हुए दोनों एक जगह पर बैठ गये।

      तभी आरोपियों ने घेर लिया और उसके दोस्त के साथ मारपीट करते हुए वहां से जाने को कहा। नहीं जाने पर अन्य लोगों ने उसे घेरकर बैठाये रखा और बारी-बारी से दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

      इस दौरान वीडियो बनाकर वायरल भी कर दिया गया। इसके बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई। इधर नालंदा पुलिस ने इस मामले को कहीं अन्यत्र स्थान का वीडियो होने की बात बता दबाने की हरसंभव कोशिश की। राजगीर थानेदार ने उल्टे पीड़िता-परिजन के सामने ठहाका तक लगाए। इस मामले को उजागर करने वाले मीडियाकर्मियों को भी निशाने पर लिया गया।

      लेकिन ऐसी जघन्य वारदात को लेकर पूरा राजगीर सड़क पर उतर आया। आगजनी, धरना, प्रदर्शन के बीच समग्र आक्रोश भड़क उठा। नतीजतन पुलिस बैकफुट पर आ गई और कार्रवाई करने को विवश हो गई।

      लेकिन बबुनी गैंगरेप को लेकर जिस पुलिस की कार्यशैली शुरुआती तौर पर संदिग्ध रही, उसे 24 घंटों के भीतर मामले के उद्भेदन और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अनुसंधानकर्ता महिला दारोगा, राजगीर थानेदार-डीएसपी और नालंदा एसपी को सोनपुर मेला में ‘Gang Rape Award’ से नवाजे गए!

      हालांकि, यह दीगर बात है कि पुलिस की वह कैसी कार्यकुशलता रही कि जब सड़क पर जनाक्रोश उमड़ा तो पुलिस ने अचानक सभी आरोपी की शिनाख्त कर एक साथ एक स्थान से दबोच ली। वेशक पुलिस की यह एक आश्चर्यजनक उपलब्धि मानी जा सकती है ?

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