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    चंडी में ट्रस्ट और सोसायटी के नाम पर कर चोरी कर रहे हैं निजी स्कूल

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के चंडी प्रखंड में निजी स्कूल पूरी तरह से बेलगाम हो चुका है। नियमों को दरकिनार कर आयकर अधिनियम के तहत विशेष छूट का लाभ उठा रहे हैं। सब नो प्रोफिट नो लॉस का हवाला दे रहे हैं। ट्रस्ट बनाकर शैक्षिक संस्थानों की इमारतों में बड़े पैमाने पर बजट खर्च किया जा रहा है।

    आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इसमें काला धन लगा हुआ है। प्राइवेट स्कूलों की जमीन खरीदारी व भवन निर्माण में काला धन होने की आशंका है।

    ज्यादातर स्कूल और सोसायटी तो आयकर रिटर्न भर ही नहीं रहें हैं। जो हर भी रहें हैं, उनमें ज्यादातर कच्चे बिलों का सहारा लेकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कर रहे हैं।

    अधिकांश ट्रस्ट और संस्था अपने बायलॉज में सार्वजनिक हित के लिए लोक कल्याण करने का संकल्प लेते हैं। संकल्प का एकमात्र विकल्प निजी विद्यालय के रूप में कुकुरमुत्तों ने जगह ले रखीं है।

    चंडी प्रखंड में ज्यादातर ट्रस्ट के नाम पर चलने वाले स्कूलों में ट्रस्टी सिर्फ परिवार के लोग ही होते हैं। स्कूल से जुड़े शिक्षकों का नाम ट्रस्ट में नामित नहीं है।

    यहां तक कि कुछ बाहरी स्कूल संचालक भी अपने ट्रस्ट में स्थानीय नाम पते दिए हुए हैं,जबकि अगर कोई कांड कर स्कूल से भाग निकले तो पुलिस प्रशासन ऐसे संचालकों को कहां खोजते फिरेगी।

    चंडी प्रखंड में निजी विद्यालय और नर्सिंग होम सोने का अंडा देने वाली मुर्गी जो है। इसके सेवा शुल्कों की सीमा क्षेत्र में निर्धारित ही नहीं है। मनमाना शुल्क वसूली की जाती है।

    चाहे वह निबंधन शुल्क हो या विधालय का वार्षिक शुल्क, यातायात हो या प्रयोगशाला, विकास शुल्क, बिलंब शुल्क, जेनरेटर तथा परीक्षा शुल्क सहित अन्य शुल्क। शुल्कों की एक लंबी फेहरिस्त है।

    इसके अलावा कापी-किताब,डायरी,जूते,टाई-बेल्ट आदि के नाम पर भी छात्रों और अभिभावकों का दोहन चल रहा है। अभिभावक मानसिक रूप से विचलित हो रहें हैं।

    बकाया फीस के नाम छात्रों को निकाल दिया जाता है। उन्हें क्लास में खड़ा कर दिया जाता है। बकाया राशि भुगतान करने का टार्चर छात्रों को किया जाता है।

    निजी स्कूल इन शुल्कों के माध्यम से लाखों की वसूली कर रहे हैं। यहां तक कि कई स्कूलों ने लाकडाउन के दौरान भी फीस वसूली की,और शिक्षकों के वेतन का 20 प्रतिशत कटौती भी की।

    प्रखंड के एक निजी स्कूल ने लाकडाउन के बाद अगस्त में ही छात्रों से वार्षिक शुल्क वसूल कर लिये। जबकि शिक्षकों को वेतन के नाम पर ढेंगा दिखा दिया।

    लाखों की वसूली के बाद भी कर की भरपाई करवंचक नहीं करके चार्टर्ड अकाउंटेंट की एनओसी ले लेते है। जबकि इन विभागों पर नियंत्रण, अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण पूरी तरह ठप है।

    जब कोई समाजिक कार्यकर्ता या सुधारक टांग अड़ाता है ,तब जांच प्रक्रिया चलती है। फिर कमजोर टांग के लड़खड़ाते ही कर वंचक विभिन्न हिकमतो से कर वंचना करने लगते हैं।

    चंडी प्रखंड में कितने निजी स्कूल निबंधित हैं, इसकी जानकारी खुद चंडी बीईओ को भी नहीं है। पिछले दिनों एक शिकायत के आलोक में निजी स्कूलों का निरीक्षण में काफी गड़बड़ियां पाई थी।

    प्रखंड के स्कूलों में बिना किसी एनओसी के नौंवे और दशमे वर्ग का संचालन किया जा रहा है। जबकि इन स्कूलों को सिर्फ एट क्लास तक वर्ग संचालन की अनुमति मिली है।

    इन स्कूलों में नौंवें दसवें वर्ग में पढ़ने वाले बच्चों का नामांकन सुदूर सरकारी स्कूलों में हैं। जहां वे सिर्फ परीक्षा देने जाते हैं। उपस्थिति मापदंड उनके लिए मायने नहीं रखती है। हजारों बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।

    इन स्कूलों का अगर ईमानदारी से जांच की जाएं तो साईकिल, पोशाक, छात्रवृत्ति योजना का एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश होगा।

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