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    Thursday, July 18, 2024
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      हाई कोर्ट के निर्देश पर आयोजित बाल संरक्षण से जुड़े सेमिनार में यूं बोले डीएम-एसपी-जज

      किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्र ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह सेमिनार आयोजित की गई है...

      “इस सेमिनार में शामिल सभी जिम्मेवार अफसरों को बाल कानून और संरक्षण के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया। ताकि कोई किशोर एक बार कोई अपराध कर ले तो वह उस ओर दोबारा न मुड़े और वे सामान्य जीवन की ओर अग्रसरित हो तथा एक सभ्य नागरिक बन सके, इस पर सबको विशेष ध्यान देने की जरूरत है..

      NALANDA JJB HC CHILD POSCO ACT 3नालंदा (एम. तालीब)। जिला मुख्यालय बिहार शरीफ नगर स्थित कर्पूरी भवन में पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर रविवार को किशोर न्याय अधिनियम एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के प्रति तथा इससे जुड़े सभी हित धारकों को जागरूक करने के उद्देश्य से एकदिवसीय संवेदीकरण सह जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया।

      इस सेमिनार का उद्घाटन जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र द्विवेदी, बाल किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र, जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह, आरक्षी अधीक्षक निलेश कुमार द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

      इस सेमिनार में सिविल कोर्ट के पदाधिकारी,  सिविल सर्जन, डीईओ, डीएसपी समेत सभी थाना के बाल कल्याण पदाधिकारी, थानाध्यक्ष, जेल अधीक्षक, बाल पर्यवेक्षण गृह के अधीक्षक, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष-सचिव, जिला अभियोजन पदाधिकारी शामिल हुए।

      बोले प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र- ‘बाल अपराध की सूचना साधारण दैनिकी में करें दर्ज’

      इस मौके पर किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्र ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह सेमिनार आयोजित की गई है।

      जज मिश्र ने कहा कि अगर बच्चों का अपराध साधारण प्रकृति का हो और केवल किशोर द्वारा कार्य किए गए हों तो बाल कल्याण पुलिस अधिकारी बालक द्वारा किए गए अपराध की सूचना साधारण दैनिकी में दर्ज करेंगे। उसके पश्चात ही सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट तैयार कर प्रथम सुनवाई के पहले किशोर न्याय परिषद को भेजा जाए।

      उन्होंने बताया कि बालक को हवालात में नहीं रखा जाए। गिरफ्तार किए गए बालक को दो घंटे के अंदर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

      बोले डीएम योगेन्द्र सिंह- ‘किशोरों और महिलाओं के प्रति संवेदनशील रहना हम सबकी नौतिक जिम्मेवारी’

      सेमिनार को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों के प्रति जो अपराध हो रहे हैं, अभिभावक कम उम्र में शादी कर मुक्त होना चाहते हैं। कम उम्र में शादी होने से उन्हें स्वास्थ्य समस्या से जूझना पड़ता है तथा परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है।

      उन्होंने कहा कि हम सबकी नैतिक जिम्मेवारी है कि किशोरों और महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना जरूरी है।

      बोले एसपी नीलेश कुमार- ‘बच्चों को स्पेशल ट्रीटमेंट की जरूरत राजगीर-हिलसा में भी बनेगा बाल-कल्याण थाना’

      एसपी निलेश कुमार ने पुलिसकर्मियों को बाल हित के प्रति जवाबदेह रहने का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि कहा कि जब 16 से 18 वर्ष के बच्चे संगीन अपराध करते हैं, उस स्थिति में उस पर प्राथमिकी दर्ज हो सकता है, लेकिन सामान्य अपराध में उन पर एफआईआर  नहीं किया जा सकता।

      उन्होंने कहा कि किशोरों को हथकड़ी बेड़ी नहीं लगाई जा सकती एवं लॉकअप में भी बंद नहीं किया जा सकता।

      उन्होंने पुलिस कर्मियों से कहा कि बच्चे में हमेशा सुधार की गुंजाइश रहती है।  सोशल बैकग्राउंड पिछड़ा होने के कारण वे अपराध में कदम रखते हैं। उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है।

      उन्होंने कहा कि बच्चों के सुधार के लिए बिहार शरीफ में बाल कल्याण थाना स्थापित है। जल्द ही राजगीर और हिलसा में भी बाल कल्याण थाना बनाया जाएगा, जिसमें बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जाएगा।

      अधिवक्ता संघ के सचिव दिनेश कुमार ने कहा कि बाल अधिनियम की जानकारी लोगों को रखना बहुत जरूरी है तथा इसके लिए इस तरह के कार्यशाला होना आवश्यक है।NALANDA JJB HC CHILD POSCO ACT 4 NALANDA JJB HC CHILD POSCO ACT 2

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