सरमेरा के गांव में यूं सड़क पर बह रहा नाली का पानी

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सरमेरा (संतोष कुमार)। नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड में थाना सरमेरा के प्यारेपुर गांव मे ग्रामीण भाषो महतो, सरदार राम, अरुण साव, गणेश राम घर के समीप पश्चिम टोला में नाली का पानी निकास नहीं होने के कारण ग्रामीणों को काफ़ी समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जाता है कि पास बह रहे नाली को अपने खर्चे से बना रहे कार्य थम सा गया है। नाली का पानी को रोकने के लिए एक तरफ बांध मिट्टी का और एक तरफ दिवाल जैसे खड़ा किया गया है।  बारिश के पानी और नाली के पानी दोनों एकत्रित होकर 3 से 4 फीट तक पानी इकट्ठा हो चुका है।SARMERA NEWS 1

पिछले 3 से 4 महीना से नाली का पानी साथी बारिश का मिलकर जमा हो जाने अभी तक 15 से 20 लोग बीमार हो चुके हैं। किन्ही को को बुखार किन्ही को खांसी जैसे बीमारी हो चुकी है। ऐसे में आशंका है कि उन लोगों को करोना हो चुका होगा। जिससे गांव पर संकट भी आ सकता है।

एक तरफ देश में जहाँ कोरोना एक वैश्विक महामारी फैला हुआ है। वही केन्द्र सरकार और राज्य सरकार जनता से अपील करती नजर आ रही है। लेकिन जहाँ मास्क और सेनेटाइजर लगाकर सुरक्षित रहने की सलाह तो लोगों को दी जा रही है, लेकिन गांव में बह रहे नाला या नाली से होने वाले भयंकर बीमारी से निजात दिलाने के बारे किसी को कोई चिंता ही नहीं है।

देखा जा रहा है कि जहाँ एक तरफ गांव के मुख्य मार्ग को बनाने का कार्य तो संचालित है, लेकिन ग्रामीण नाली का बदबूदार पानी पर चलने पर मजबूर हो रहे है। प्यारेपुर गांव में काफ़ी समय से सीवर पाइप लाइन की व्यवस्था न होने के कारण गांव में नाली का पानी कहीं रोड पर तो कहीं लोग घरो में गड्ढा खोदकर वहीं मिट्टी में सूखा देते है।

हालांकि जिले शेखपुरा, पटना नालंदा के ज्यादातर गावों में सीवर की व्यवस्था सरकार द्वारा करा दिया गया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि जहाँ सरमेरा प्रखंड का जाना माना गांव प्यारेपुर, जहाँ व्यवस्था के नाम पर सिर्फ खिलवाड़ हो रहा है।

यहां अगर बात की जाये तो रोड बनता तो जरूर है, लेकिन टूटने में समय बिलकुल भी नहीं लगता। इसका नतीजा यह होता है कि गांव की जनता मजबूरन उसी टूटी रोड पर चलने को मजबूर हो जाती है।

गांव में जनता द्वारा  चयनित मुखिया ,सरपंच ,वार्ड सदस्य इत्यादि लोग सिर्फ नाम के पदाधिकारी बनकर सिर्फ अपना पेट भरने के लिए बैठे है। अगर काम देखा जाये तो कुछ भी नहीं हुआ है। इसलिए क्योंकि ज़ब तक उनको उस काम में उनका कमीशन नहीं मिलेगा, कागज पर साइन या कार्य करने की अनुमति ही नहीं देंगे।