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    यहाँ वीपीएम की मनमानी की मार झेल रहे हैं सैकड़ों जीविका दीदीयां !

    एक्सपर्ट मीडीया न्यूज टीम ने इस संदर्भ मे जानकारी पाने के लिये नगरनौसा वीपीएम से दूरभाष पर व व्हाटस्एप्प के माध्यम से संपर्क करने की अथक प्रयास की, लोकिन उन्होंने कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। यही नहीं मैसेज पढ़कर अपना मोबाइल ही बार-बार स्वीच ऑफ करने लगे...

    नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। एक तरफ बिहार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी जीविका दीदियों की सराहना करते थकते नहीं, दूसरी ओर उनके ही गृह जिले में नगरनौसा वीपीएम द्वारा कभी शौचालय के नाम पर तो कभी राशनकार्ड बनबाने के नाम पर जीविका दीदियों को गुमराह करने की चर्चा अक्सर ही लोगों से सुनने को मिलती रहती है।

    नगरनौसा प्रखण्ड अंतर्गत मुस्कान कलस्टर,ज्योति ग्रामसंगठन के मां जगदम्बा समूह में बीते पिछले 5 वर्षों से सीएम पद पर कार्यरत प्रियंका कुमारी ने नगरनौसा वीपीएम द्वारा किये गये अभद्र व्यवहार व मनमानी की नालन्दा डीपीएम से लिखित शिकायत कर कारवाई करने की माँग की है।

    आवेदिका का कहना है कि नगरनौसा वीपीएम हमेशा जीविका दीदियों के जनहित मुद्दे को दबाने की हर संभव प्रयास करते रहते हैं। वे हमेशा अपने नीचे कार्यरत कर्मी पर अपना धौस जमाते रहते हैं, लेकिन वे भूल जाते है कि सब एक जैसे नही होते कि उनका हर कहा मान ले, जो जनहित में हो। क्योंकि जीविका का मुख्य उद्देश्य है जीविका दीदियों का उत्थान कर स्वावलंबी बनाना न कि उनके अधिकारों की सौदेबाजी करना।

    आवेदिका का कहना कि सैकङों जीविका दीदियों के आग्रह पर बिहार विधानसभा का चुनाव हरनौत से लङी, जो वीपीएम महोदय को नहीं भाया, क्योकि उनका दिशा निर्देश था कि एक उनके चहेते एक पार्टी विशेष के उम्मीदवार के समर्थन में जीविका प्रचार प्रसार करें, जिसका आज भी चर्चा प्रखण्ड वासियों मे अक्सर ही जगह-जगह होती रहती है।

    आवेदिका ने डीपीएम को जानकारी दी है कि उनके विधानसभा चुनाव लङने से खफा होकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुये उनके साथ वीपीएम ने अभद्र व्यवहार करते हुये बद्तमीजी करने की हर संभव कोशिश की।

    वीपीएम जब अपने मकसद में कामयाब नहीं हुए तो मनमानी करते हुये जिलास्तरीय जीविका पदाधिकारियों का हवाला देते हुये मौखिक रूप से पद से इस्तीफा देने की दबाव अनवरत बनाने की कोशिश किये हुए हैं।

    जबकि दूसरी ओर आवेदिका अपने वरीय पदाधिकारियों से लिखित आदेश लेकर ही अपने पद से इस्तीफा देने की बात पर अङी है।

    संवैधानिक तौर पर जब आवेदिका लिखित आदेश लेकर लिखित इस्तीफा देने की बात कर रही है तो जीविका के नगरनौसा वीपीएम लिखित आदेश क्यों नहीं जारी कर देते।

    कहीं ऐसा तो नही कि वे उच्च न्यायालय व चुनाव आयोग के सबाल का जबाव नहीं दे पायेंगे। क्योकि चुनाव आयोग की माने तो किसी सरकारी संस्था मे कार्यरत कर्मी यदि चुनाव लङता है तो चुनाव लङने के पूर्व उसे अपने पद से इस्तीफा देना होता है।

    ऐसे में सबाल उठना लाजिमी है कि क्या जीविका एक सरकारी संस्था है या गैर सरकारी। यदि कोई गैर सरकारी संस्था है तो चुनाव लङने के पूर्व अपने पद से कोई इस्तीफा क्यों दे?

    दूसरी ओर यदि सरकारी संस्था है तो इसमे कार्यरत जीविका दीदियों को मात्र 700 से 2000, 3000 पर ही क्यों रखा गया है, जो कि मनरेगा मजदूरों की मासिक दहाङी से भी कई गुणा कम है।

    आवेदिका का कहना है कि कि समूह में कार्यरत सैकङो जीविका दीदियों का कई आवश्यक कार्यों मे यू रूकाबट पङी है, जिससे जीविका दीदियों मे काफी अक्रोश है और यह दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है। इस समूह से जुडे़ सैकड़ों जीविका दीदियां कभी भी नगरनौसा जीविका वीपीएम का कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन कर सकती है।