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      अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेषः चंडी की इन तीन संघर्ष शक्ति को सलाम ?

      'कभी हुकूमत से ,कभी हिम्मत से, कभी कला से, तो कभी रूप से, न जाने कैसे-कैसे इस देश की नारी, दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है......'

      नालंदा दर्पण डेस्क। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। इसमें कोई शक नहीं कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे है। वर्तमान स्थिति में नारी ने जो साहस का परिचय दिया है, वह आश्चर्यजनक है। आज नारी की भागीदारी के बिना कोई भी काम पूर्ण नहीं माना जा रहा है। समाज के हर क्षेत्र में उसका परोक्ष- अपरोक्ष रूप से प्रवेश हो चुका है।

      यहां तक का सफर तय करने के लिए महिलाओं को काफी मुश्किलों एवं संघर्षों का सामना करना पड़ा है और महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अभी आगे मीलों लम्बा सफर तय करना है, जो दुर्गम एवं मुश्किल तो है लेकिन महिलाओं ने ही ये साबित किया है कि वो हर कार्य को करने में सक्षम हैं।

      ऐसी ही कुछ महिलाएं हैं जिन्होंने अपने हौसले से एक अलग मुकाम हासिल की है। हाउस वाइफ से लेकर राजनीतिक गलियों तक का उनका सफर किसी स्वप्न जैसा है।

      International Womens Day Special Chandi salutes these three struggling powers 3मजबूत इरादों वाली एक सशक्त महिला अंजलि देवीः  जो पिछले 15 साल से मुखिया पद पर काबिज है। जिन्होंने मुखिया का चुनाव जीतने के बाद अपने पति को खो दी। राह में कई रोड़े आया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।

      सच पूछिए तो, “ख्बाव टूटे हैं मगर हौंसले अभी जिंदा है, मैं वह नारी हूं जिससे मुश्किलें भी शर्मिंदा हैं।” अंजलि देवी पर सटीक बैठती यह पंक्तियां उनके मजबूत इरादों की कहानी है। अति पिछड़ी समाज से ताल्लुक रखने वाली अंजलि देवी राजनीति के जातीय समीकरण में फिट नहीं बैठती थी।

      बाबजूद वह अपनी काबिलियत के बल पर मुखिया बनती रही।2006 पंचायत चुनाव में पहली बार चंडी के रूखाई पंचायत से मुखिया निर्वाचित हुई। लेकिन दो वर्ष बाद ही उनके पति रमेश ठाकुर की मौत एक सड़क हादसे में हो गई। लेकिन वह हिम्मत नहीं हारी। चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ते चली गई।

      वर्ष 2011 में पंचायत चुनाव के दौरान लोगों को लगा अंजलि देवी अब बिना पति के एक कदम नहीं चल सकती। विरोधी मन ही मन खुश हो रहें थें उनकी राह आसान हो गई। लेकिन अंजलि देवी फिर से मैदान में आई और बड़े अंतर से दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रही।वर्ष 2016 में वह लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर प्रखंड में एक रिकॉर्ड कायम की।

      वर्ष 2016 में पंचायत चुनाव में अंजलि देवी चंडी प्रखंड के सभी 15 पंचायतों में एक मात्र मुखिया थी जिसने अपनी सीट बरकरार रखी। अंजलि देवी की लोकप्रियता का ही कमाल था कि जिले के अधिकारी का ध्यान रूखाई पंचायत की तरफ गया।

      कभी नालंदा के डीडीसी रहे कुंदन कुमार को जब मनरेगा में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया तो उस सम्मान में रुखाई पंचायत के मुखिया अंजलि देवी के योगदान को इंकार नहीं किया जा सकता है।

      नालंदा डीएम ने पंचायत के यशवंत पुर गांव को गोद लेने का काम किया था। अंजलि देवी के पंचायत रुखाई में सबसे पहले पंचायत सरकार भवन बनकर तैयार हुआ। उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायत में विकास के अनेकों काम कर चुकी है।जिसकी चर्चा जनता के जुबान पर भी है।

      अंजलि देवी ने 2011 में दुबारा मुखिया बनने के बाद उस मिथक को थोड़ा जिसमें विधवा  पुर्नविवाह नहीं कर सकती थी। उन्होंने अपने फूफेरे देवर के साथ शादी कर समाज के लिए एक मिसाल बनी। यही कारण रहा कि दिल्ली में आयोजित बाल विवाह रोकथाम कार्यशाला के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया।

      अंजलि देवी एक बार फिर हौसले के साथ चौथी बार चुनाव मैदान में आने का मन बना रही है।वह कहती हैं कि जनता की सेवा में मन रम गया है। पंचायत को वह सर्वश्रेष्ठ पंचायत बनाना चाहती हैं।

      International Womens Day Special Chandi salutes these three struggling powers 2हाउस वाइफ से राज्य की राजनीति में सक्रिय डॉ. वसुंधरा कुमारीः चंडी प्रखंड की एक और कर्मठ और सामाजिक बदलाव की सजग प्रहरी के रूप में डॉ. वसुंधरा कुमारी का नाम अग्रणी है।

      जिंदगी में कुछ कर गुजरने की जज्बा लेकर जब कोई महिला राजनीति में अपना वर्चस्व कायम करती है तो उसकी एक अलग छवि निखर कर आती है।  जोश और जुनून से लबरेज  डाॅ वसुंधरा कुमारी ने राजनीति में अपने बल पर एक खास उपस्थिति दर्ज कराई है।

      डॉ वसुंधरा कुमारी ने अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई स्नातक तक चंडी से करने के बाद नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से एम और मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की।

      बिना किसी राजनीतिक परिवार से आई उन्होंने वर्ष 2001 में चंडी के महकार पंचायत से पंचायत समिति का चुनाव लड़ा और जीती ही नहीं बल्कि की प्रखंड प्रमुख की कुर्सी भी हासिल की।इनके पति दिनेश कुमार भी 2011 में इस पंचायत से मुखिया भी रह चुके हैं।

      डॉ वसुंधरा कुमारी पंचायत की राजनीति के बाद मुख्य धारा की राजनीति में आ गई। जहां से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।वह नालंदा जिला महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष भी रही। 2010 विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर हरनौत से चुनाव भी लड़ा।

      2014 लोकसभा चुनाव के दौरान वह जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गई। जहां वह  विभिन्न पदों पर कार्यरत रही।जिला से राज्य स्तर तक की राजनीति में सक्रिय डॉ वसुंधरा कुमारी महिला जदयू की प्रदेश महासचिव पद पर भी रही साथ ही वह महिला जदयू की प्रदेश उपाध्यक्ष पद को भी सुशोभित की। वर्तमान में वह नालंदा लोकसभा क्षेत्र की प्रभारी है।

      डॉ वसुंधरा कुमारी आसन्न पंचायत चुनाव में चंडी पश्चिमी से चुनाव मैदान में आ रही है।उनका मानना है कि उन्होंने विस क्षेत्र में सीएम  नीतीश कुमार के कार्यों का प्रचार किया है। जनसंपर्क चलाया है। जिसका लाभ उन्हें मिलना चाहिए।

      अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कहा कि महिलाओं को और मजबूत होना चाहिए, उन्हें हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए।जो महिलाएं आत्मनिर्भर होती है,वह घरेलू हिंसा का शिकार भी नहीं होती है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि जितना हो सके लड़कियों को शिक्षा के समुद्र में ढकेले।

      International Womens Day Special Chandi salutes these three struggling powers 4अनिता सिन्हा, मुखिया से जिला परिषद सदस्य तक का सफरः चंडी प्रखंड के तुलसीगढ़ पंचायत के जलालपुर निवासी और वर्तमान में चंडी से जिला परिषद सदस्या अनिता सिन्हा के घर -परिवार के लिए राजनीति उस लक्ष्मी की तरह है जो घर में वास करती है।

      पति-पत्नी दोनों ने  15 साल तक पंचायत में अपना वर्चस्व बनाए रखा। जब पति कुमार चंद्र भूषण 2016 में अपने परंपरागत प्रतिद्वंद्वी से चुनाव हार गए। उसके  बाद भी राजनीति ने इनके घर के चौखट को पार नहीं किया।

      किस्मत ने ऐसा साथ दिया कि पूर्व मुखिया की पत्नी पूर्व मुखिया अनिता सिन्हा जिला परिषद सदस्य पद पर काबिज हो गई।

      चंडी प्रखंड में एक लोकप्रिय नाम है जो किसी परिचय का मुहताज नहीं है। उनकी राजनीतिक कद किसी से कम नहीं है। नाम कुमार चंद्र भूषण उर्फ भूषण मुखिया। एक ऐसा समाज सेवक जो हर समय हर  किसी के दुःख-सुख में साथ खड़ा होता है।

      2001के पंचायत चुनाव में तुलसीगढ़ पंचायत से चुनाव जीते। जब सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया तो उन्होंने अपनी पत्नी अनिता सिन्हा को पंचायत में उतार दिया।

      एक गृहणी से वह पंचायत की मुखिया बन गई।जलवा ऐसा कि 2011 में भी वह दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रही। 2016 में जब पंचायत पुरुष आरक्षित हुआ तो इनके पति पूर्व मुखिया कुमार चंद्र भूषण मैदान में उतरे, लेकिन दुर्भाग्य रहा कि उन्हें इस बार शिकस्त का सामना करना पड़ा।

      15 साल तक पंचायत की राजनीति में एकछत्र राज करने वाले परिवार के लिए लगा राजनीति उनसे रुठ गई हो। लेकिन कुछ ऐसा संयोग हुआ कि बिल्ली के भाग्य से सींका टूटी वाली कहावत चरितार्थ हो गई।

      चंडी पश्चिमी से 2016 में जिला परिषद सदस्य निर्वाचित हुई रिटायर्ड शिक्षिका चंद्रकांति देवी का आकस्मिक निधन हो गया। उपचुनाव के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी अनिता सिन्हा को मैदान में उतार दिया।

      उनके सामने दिवंगत सदस्या की बहू मैदान में आ गई। लगा सहानूभूति वोट उनकी बहू को मिल जाएगा लेकिन जनता ने भूषण मुखिया की छवि और लोकप्रियता को प्राथमिकता देते हुए अनिता सिन्हा को एक बड़े अंतर से चुनाव जीता दिया।

      फिलहाल अनिता सिन्हा एक बार फिर से जिला परिषद चुनाव के लिए मैदान में आ रही है। उनका कहना है कि महिलाएं अब स्वाबलंबी हो चुकी है। वह सिर्फ घर का काम ही नहीं बल्कि राजनीति का ककहरा भी सीख चुकी है। बड़ी संख्या में महिलाओं को राजनीति में आना चाहिए।

      अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क की ओर से ऐसी उन सभी महिलाओं को सलाम, जो अपने जज्बे और मेहनत से नित्य नई लकीरें खींच रही है…. ✍️???

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