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      लॉकडाउनः बदल गया पेशा, मिठाई-फर्नीचर वाले बेच रहें हैं सब्जी-फल

      दुकानदार लॉकडाउन में अच्छे-खासे दीवाने हो गये, जो कभी मिठाई और फर्नीचर की दुकान थे।  वक्त -ए-नजाकत देखकर सब्जी -फल की दुकान हो गईयह पंक्ति चंडी के दुकानदारों के लिए यथार्थ बन गई है। जिसने लॉकडाउन में अपने व्यवसाय बदलने को मजबूर हो गए हैं।

      नालंदा दर्पण डेस्क। आप यकीन नहीं करियेगा मिठाई की दुकान में फल और सब्जी मिल रही है। चाय वाले सब्जी बेच रहें हैं। फर्नीचर दुकानदार सब्जी बेच रहें हैं।  कपड़ा दुकानदार सब्जी-फल की दुकान लगाए हुए हैं। कल तक अंडे-चॉमिन-एगलरॉल के ठेले लगाने वालों के ठेले पर अंडे की जगह आलू-प्याज बिक रहा है तो चाट-पकौडे वाले पीछे क्यों रहें वो भी इस व्यवसाय में कूद गये हैं।

      वहीं कल तक अपने दुकान में आलमीरा, गोदरेज और पलंग बेचने वाले लहसून-प्याज की दुकान खोल बैठे हैं। मानो पूरा का पूरा फलों-सब्जियों का समाजवाद चंडी की जमीं पर उतर आया हो।

      CHANDI LOCKDOWN 1न कोई अमीर, न कोई गरीब सबका एक ही व्यवसाय सब्जी-फल की दुकान। शायद ऐसे समाजवाद की कल्पना न लोहिया ने की होगी, न समाजवादी पार्टी के मुलायम और अखिलेश ने।

      कोरोना महामारी में पिछले 40दिनों से लॉकडाउन झेल रहे चंडी के दुकानदारों के सामने शायद आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। लॉकडाउन की वजह से इनके काम-धंधे ठप्प पड़ा हुआ है। लॉकडाउन में सिर्फ सब्जी और किराने की दुकानें खोलने का निर्देश है।

      ऐसे में चंडी में इन दुकानों को छोड़कर सभी बंद है। इस लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मुसीबत की मार फुटपाथी दुकानदारों पर पड़ी है। ऐसे में उनके सामने भी आजीविका के लाले पड़े हुए है। उनके सामने सब्जी की दुकान लगाने के सिवा कोई चारा नहीं है।

      लेकिन जब बड़े दुकानदार, जिनकी लॉकडाउन से पहले हजारों का मुनाफा था। ऐसे दुकानदार भी जब सब्जी-फल, आलू-प्याज की दुकान लगा लें तो प्रतीलक्षित होता है कि लॉकडाउन ने उनकी आर्थिक कमर तोड़ दी है।

      लेकिन सूत्र कहते हैं कि साहेब यह सब बड़े दुकानदारों की चोंचलेबाजी और दिखावा है। सब्जी-फल बेचने की आड़ में अपने दुकान का  सामान  बेचना है।

      चंडी बाजार में वैसे भी लॉकडाउन में इतनी छूट है कि अहले सुबह से नौ बजे तक विभिन्न प्रकार की दुकानें खुली ही रहती हैं, जिससे ग्राहकों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है।

      चंडी बस स्टैंड में लिट्टी बेचने वाले एक दुकानदार का कहना है कि अगर ऐसे में लिट्टी बेचेगे तो पुलिस पकड़ भी सकती है। इसलिए जीविका चलाने के लिए सब्जी न बेचे तो क्या भूखे मरे।

      पीएम मोदी की वजह से कभी अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिल चुकी चाय दुकानदारों की भी हालत खस्ता है। प्रखंड के अधिकांश चाय दुकानदारों के चूल्हे बुझा हुआ है। केतली कहीं उपेक्षित पड़ा हुआ है। वहाँ अब आलू-प्याज,लौकी, नेनुआ करेले और भिंडी सजी हुई है।

      स्थानीय बाजार के एक चाय दुकानदार ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि लॉकडाउन ने हालत काफी बुरा कर रखा है। लॉकडाउन जब शुरू हुआ था तो सब्जी की दुकान लगाना शुरू कर दिया था। देखा-देखी दूसरे व्यवसाय वाले भी सब्जी लाकर बेचने लगे।

      अब सारी दुकानें चंडी फील्ड में चली गई है। ऐसे में यह धंधा भी चौपट हो गया है। आप वहाँ दुकान क्यों नहीं लें गये, पूछने पर दुकानदार ने बताया कि यह हमारा पुश्तैनी पेशा तो है नहीं, अब थोड़ी सी सब्जी लेकर फील्ड में क्यों बैठे। जबकि लॉकडाउन में   सब्जी बेचने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

      इनके अलावा कई अन्य भी है, जो फुटपाथ पर ही अपना बसेरा लगाकर जीवन यापन कर रहें थे। लॉकडाउन ने उन्हें बेसहारा कर रखा है।शायद असली समाजवादी चंडी वाले ही है, न अमीरी में फर्क न गरीबी में। सब बेचों सब्जी। सब्जियों का समाजवाद जो उतर आया है।

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