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    वारिस या धूर्त? 40 साल बाद कोर्ट में स्पीडी ट्रायल शुरु, जल्द उठेगा पर्दा

    नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के सिलाव थाना क्षेत्र के मुरगावां गांव निवासी स्व.कामेश्वर सिंह के यहां करीब 40 वर्षों से उनका पुत्र कन्हैया बनकर एक युवक रह रहा है। उसका दावा है कि वही उनका पुत्र है जो मैट्रिक परीक्षा में फेल होने के डर से घर से भागा था।

    हालांकि संदेह होने पर मां ने घटना की प्राथमिकी चालीस साल पहले दर्ज कराई थी। दंपती की मौत के बाद बेटी विद्या कुमारी षड्यंत्र कर भाई बनने का केस लड़ रही है।

    40 साल से चल रहा मुकदमाः  लेकिन 40 साल बाद भी सही वारिस का फैसला नहीं हो सका है। मामला 1981 से ही बिहारशरीफ़ कोर्ट में लंबित है। दोनों ही पक्ष कोर्ट का चक्कर लगाकर थक चुके हैं।

    वर्तमान में जिला न्यायालय के एसीजेएम मानवेन्द्र मिश्र के न्यायालय में इस केस की डे टू डे सुनवाई चल रही है। त्वरित और चर्चित फैसलों के लिए जाने जाने वाले न्यायाधीश स्पीडी ट्रायल चलाकर केस की सुनवाई कर रहें हैं।

    कई माह जेल में रहा आरोपीः  बता दें कि अभियुक्त जेल भी जा चुका है। करीब माह भर जेल में रहा। इस मामले में सीआईडी ने भी जांच की थी। पुलिस द्वारा न्यायालय में समर्पित चार्जशीट से आरोपों को बल मिल रहा है।

    जांच रिपोर्ट में आरोपी को मुंगेर निवासी दयानंद गोस्वामी बताया गया है। प्राथमिकी कामेश्वर सिंह की पत्नी रामसखी देवी ने सिलाव थाने में दर्ज कराई थी। 24 नवम्बर, 88 को केस के आईओ अनिरूद्ध प्रसाद सिंह मुंगेर पहुंचे और स्थानीय पुलिस के साथ लखैय गांव गए।

    दयानंद गोसाई है आरोपी? गांव के सुरेश गोस्वामी ने कन्हैया होने का दावा कर रहे युवक को स्व. प्रभु गोसाई का पुत्र दयानंद गोसाई बताया। फोटो दिखाने पर उसने पहचान भी की।

    तत्कालीन चौकीदार दशरथ पासवान को दो फोटो दिखाया गया। बड़ा फोटो देखकर उसने दयानंद की पहचान की। मुरगावां गांव के हाई स्कूल के शिक्षकों ने भी उसे पहचाने से इंकार किया।

    मैट्रिक में हुआ फेल तो घर से भागा? अभियुक्त कन्हैया ने अपने बयान में बताया है कि मैट्रिक में फेल हुआ। चंडी बाजार में चाय पीने के दौरान पता चला कि गांव में उसको मारने की योजना है तो भरथरी बनकर निकल गया।

    स्पीडी ट्रायल से उठेगा पर्दाः स्पीडी ट्रायल चलने से जल्द ही प्रकरण के रहस्य से पर्दा उठ सकता है। पूरे मामले में गहरी साजिश की बू भी आ रही है। 40 साल पहले लापता हुए किशोर का क्या हुआ।

    वह जिंदा है या नहीं। इसकी पुलिस जांच नहीं कर सकी है। जबकि, लापता होने के बाद पिता ने चंडी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सूचक ने किस आधार पर पुत्र को मृत मान लिया था।

    क्या है मामला: दरअसल सिलाव के मुरगावां निवासी स्व. कामेश्वर सिंह की छह संतान थी। कन्हैया एकलौता पुत्र था। वह मैट्रिक परीक्षा देने चंडी गया था। दो पेपर की परीक्षा देने के बाद वह लापता हो गया। परिवार ने इसकी सूचना थाने को दी।

    1981 में घर वालों को सूचना मिली कि हिलसा के केशोपुर में एक भरथरी यानि जोगी आया है। जो खुद कन्हैया बता रहा है। इसके कामेश्वर सिंह लोगों के समझाने पर अपने पुत्र के रूप में उसे साथ ले आए।

    रिटायर्ड जज भी दे चुके हैं बयानः  अवकाश प्राप्त जज विपिन कुमार प्रसाद ने भी 24 मार्च 2006 को कोर्ट में बयान दिया। उन्होंने सभी गवाहों द्वारा दर्ज कराये गये बयान को सही बताया।

    4 साल बाद योगी बनकर लौटा युवक? सूचक की मौत के बाद बेटी 40 साल से लड़ रही केस, लापता पुत्र आखिर कहां गया। जोगी बनकर आये युवक ने खुद को बताया कन्हैया, मां ने नहीं पहचाना था, केस भी कराया था

    क्या है पारिवारिक स्थितिः विद्या कुमारी 6 बहन और 1 भाई है। दो बहनों की मौत हो गई है। भाई लापता है। मां ने ही मान लिया था कि भाई की मौत हो गई। अन्य बहने विदेश में रहती हैं।

    विद्या कुमारी पटना में रहती हैं। गांव के करोड़ों की पैतृक संपत्ति पर फिलहाल कथित कन्हैया काबिज है।

    चिट्ठी ने किया संदेह को पुख्ता: लोग कथित कन्हैया पर नजर रखे थे। इसी बीच मुंगेर के लखैय गांव निवासी दयानंद प्रसाद के नाम से लिखा एक पत्र परिवार को मिला। (इनपुटः भास्कर)