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    जेजेबी जज ने एटीएम फ्रॉड के आरोपी किशोरी को रिहा किया, क्योंकि….

    बिहार शरीफ (नालंदा दर्पण)। जिला किशोर न्याय परिषद (जेजेबी) के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने एक एटीएम फ्रॉड की आरोपी किशोरी को आरोप मुक्त करते हुए उसके विरुद्ध जारी जांच प्रक्रिया को बंद करने का आदेश दिया है।

    जेजेबी जज ने यह फैसला आरोपी की गुहार, बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी द्वारा दिये गये सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट, विधि परिवीक्षा पदाधिकारी द्वारा दिये गये सामाजिक अन्वेषन रिपोर्ट आदि के आधार पर दिया है।

    खबरों के मुताबिक किशोरी करीब डेढ़ साल से कोर्ट का चक्कर लगा रही थी। उसने नाबालिग रहते हुए ही वह अपने परिवार के कुछ लोगों के बहकावे पर आकर इस अपराध में शामिल हुई थी।

    इसी दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ गयी। उसे जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। फिलहाल वह बालिग हो चुकी है और शादीशुदा है। जेजेबी में चल रहे मामले के कारण उसे परेशानी हो रही थी और पति व ससुराल वालों से झूठ बोलकर हाजिरी लगाने आना पड़ रहा था। उसके पति और ससुराल वालों को उसके इस अपराध के बारे में पता नहीं है।

    खबरों के अनुसार किशोरी ने जेजेबी के समक्ष अपना अपराध करते हुए बताया कि वह अपनी मौसेरी बहन और फुफेरी बहन के देवर के बहकावे में आकर इस अपराध में शामिल हुई थी। जिसने पहले मौसेरी बहन को लालच देकर शामिल किया और फिर मौसेरी बहन ने उसे भी एटीएम फ्रॉड के धंधे से जोड़ लिया।

    किशोरी ने बताया कि वह मौसी से मिलने बिहारशरीफ आने का बहाना कर केस की तारीख पर आती है। यदि पति या ससुराल वाले को पता चल गया तो वैवाहिक जीवन बर्बाद हो जायेगा। हमेशा यह डर बना रहता है कि कही पति छोड़ न दे।

    कहा जाता है कि आरोपी किशोरी को 21 मार्च 2020 को उस वक्त पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया, जब वह शहर के नई सराय एसबीआई शाखा के बाहर स्थित एटीएम के समीप मौसेरी बहन के साथ खड़ी थी। पुलिस को देखकर छिपने की कोशिश की।

    उसके बाद महिला पुलिस ने तलाशी की तो उसके पास से एक मोबाइल, 30 हजार रुपये और तीन एटीएम कार्ड बरामद हुआ था। फुफेरी बहन का देवर ही इसे एटीएम और पिन उपलब्ध कराता था और प्रत्येक निकासी पर कमीशन मिलता था।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि एक लड़की प्रतिदिन आकर एटीएम से पैसे निकाल कर चली जाती है। हालांकि इस मामले के अनुसंधान में पुलिस सुस्त रही। डेढ़ साल बाद भी अनुसंधान पूरा कर जेजेबी में चार्जशीट नहीं सौंप सकी।

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