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    नालंदा दर्पण की खबर पर JJB का संज्ञान, बिहार थानेदार से पूछा- क्यों दर्ज न हो FIR?

    नालंदा दर्पण डेस्क। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क की चाईल्ड साइट नालंदा दर्पण.कॉम में “यहाँ चलता है थानेदार का राज, लेकिन इस मासूम बच्ची को लेकर क्या कहेंगे दीपक कुमार” शीर्षक से प्रकाशित हुई है।

    इस खबर पर नालंदा जिला किशोर न्याय परिषद, बिहार शरीफ के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने बिहार थाना के प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक कुमार को 48 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए पूछा है कि आपके एवं संबंधित पुलिस पदाधिकारी के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के अधीन प्राथमिकी दर्ज करने एवं बाल अधिकारों के उलंघन हेतु विभाग के वरीय पदाधिकारी क्यों न लिखा जाए?

    उन्होंने लिखा है कि 15 जनवरी को नालंदा दर्पण में “यहाँ चलता है थानेदार का राज,, लेकिन इस मासूम बच्ची को लेकर क्या कहेंगे दीपक कुमार” शीर्षक से एक समाचार प्रासरित किया जा रहा रहा है, जो किशोर न्याय परिषद के संज्ञान में आया है। जिसके फुटेज में बिहार थाना परिसर में पुलिस पदाधिकारी के बीच एक नाबालिग लड़की खड़ी दिख रही है तथा वह जप्त वाहनों की गाड़ी के चाभी स्पर्ष करते हुए दिख रही है। कुछ देर बाद वह थाना के अंदर जाती दिख रही है, किन्तु यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि क्या वह बच्ची पीड़िता है तो फिर उसे बाल मित्र कक्ष में क्यों नहीं रखा गया है। अथवा पुलिस पदाधिकारी द्वारा उसे किसी कार्य में नियोजित किया गया है तो पुलिस का यह कृत्य किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 के अंतर्गत दण्डनीय है। अथवा किस उदेश्य से थाना परिसर में नाबालिग लड़की को रखा गया है।

    प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने थाना प्रभारी को आगे लिखा है कि नालंदा दर्पण के प्रधान संपादक से वीडियो फुटेज की माँग प्रमाण पत्र के साथ की गई है। खबर में दिख रहे पुलिस पदाधिकारी कौन है तथा उन्होंने अपने दैनिक कार्य निष्पादन के दौरान नाबालिग लड़की को किस उदेश्य से वहाँ पर रखा था। वह नाबालिग लड़की कौन है। उसके माता-पिता अथवा संरक्षक कौन हैं। क्या वह नाबालिग लड़की परित्यक्त है। अगर हाँ तो क्या थाने के द्वारा इसकी सूचना बाल कल्याण समिति, बिहार शरीफ को उस बच्ची के संरक्षण एवं देख रेख हेतु सूचना दी गई है?

    प्रधान दंडाधिकारी ने आगे लिखा है कि बिहार थाना के थानाध्यक्ष होने के नाते आपका यह विधिक कर्तव्य है कि उस थाना क्षेत्र में किसी भी किशोर अथवा किशोरी का शोषण अगर किसी भी प्रकार से हो रहा हो तो विधि के प्रावधानों के अनुकूल कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए किशोर न्याय परिषद, बाल कल्याण समिति को इसकी सूचना अबिलंब दें। साथ ही बच्चों के संरक्षण एवं शिक्षा, सुरक्षा हेतु उपयुक्त वातावरण तैयार करने में बाल कल्याण पुलिस ईकाई को अपना पूर्ण सहयोग दें। किन्तु थाना परिसर से ही इस तरह के मामले प्रथम दृष्टया सामने आ रहे हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि नाबालिग लड़की को दृश्यमान रुप से नियोजन के प्रयोजन के लिए नियोजित कर रखा है।

    किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने बिहार थानाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि 48 घंटे के अंदर अपना पक्ष प्रस्तुत करें कि आपके एवं संबंधित पुलिस पदाधिकारी के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम के सुसंगत प्रवधानों के अधीन प्राथमिकी दर्ज करने एवं बाल अधिकारों के उल्लंघन हेतु विभाग के वरीय पदाधिकारी को क्यों न लिखा जाए? समय सीमा के भीतर कोई उत्तर नहीं दिए जाने पर किशोर न्याय परिषद यह मानेगी कि बचाव में कुछ नहीं कहना है और किशोर न्याय परिषद एकतरफा कार्यवाही करने को स्वतंत्र होगी।

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