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    चंडी के इस गांव का प्राचीन ‘मीठकी कुंआ’ का इतिहास, जिसमें दफन है राहगीरों की प्यास!

    किसी ने सच कहा है:-'मैं एक कुंआ हूं, जितना मुझमें डूबोगे तृप्त हो बाहर आओगे !'