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    रिमांड लॉयरों से बोले विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव- ‘अपने दायित्वों के प्रति  रहें गंभीर’

    बिहार शरीफ (नालंदा दर्पण)। जिला व्यवहार व सत्र न्यायालय परिसर अवस्थित विधिक सेवा सदन में विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम प्रभाकर झा ने रिमांड लॉयर के साथ बैठक कर उन्हें रिमांड से संबंधित कार्य का दायित्व एवं महत्व की जानकारी दी।

    उन्होंने बताया कि रिमांड से पूर्व आरोपी से पूरी तरह जानकारी ले लेना चाहिए। अगर बीमार है तो इलाज के लिए भेजना है। किशोर हो तो किशोर न्यायालय में भेजने के लिए न्यायाधीश से अनुरोध करना है।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ दिन पूर्व ही सासाराम कोर्ट में रिमांड की अनदेखी से हुई गलती के परिणामस्वरूप एक 12 वर्षीय किशोर का जेल में कैदी के तौर पर रखने का मामला सामने आया है। ऐसे में सभी को अपने दायित्वों के प्रति गंभीर रहना है, ताकि ऐसी गलती न हो।

    इस बैठक में रिमांड लायर रवि प्रकाश, शंभू कुमार, संजीव कुमार, गौरव कुणाल, सुनील कुमार वर्मा, वीरमणी कुमार और कंचन कुमार शामिल थे। जिन्हें विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से नियुक्त किया गया है।

    इन लॉयरों के मुख्य कार्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर न्यायालय में लाए गए आरोपियों से रिमांड के समय उपस्थित रहकर उनके हित को देखना है। जिसमें गिरफ्तारी के समय पुलिस द्वारा किसी प्रकार की मारपीट तो नहीं की गई है या किसी प्रकार की चोट तो नहीं लगी है। आरोपी बीमार तो नहीं है।  किशोर या कम उम्र का तो नहीं है। घर वालों को सूचित किया गया है या नहीं।

    उन्होंने कहा कि उनमें यदि कोई आशंका या संशय है तो आरोपी के पक्ष में इन मुद्दों पर कोर्ट को मौखिक या लिखित तुरंत रिपोर्ट करना है। जिससे न्यायालय सही बिंदु को निर्धारित कर सके।

    उन्होंने कहा कि यदि इसमें दायित्व एवं जिम्मेदारी पूर्वक कार्य का निर्वाह्न रिमांड लायर नहीं करते हैं तो न्यायहित प्रभावित होता है। इसकी अनदेखी से कानून तो प्रभावित होता है और आरोपियों को अनावश्यक परेशानी भी सहना पड़ता है।

    सचिव ने कहा कि किसी कारणवश रिमांड वकील अनुपस्थित होते हैं तो अपने अनुपस्थिति की पूर्व सूचना प्राधिकार को अवश्य दें। ताकि किसी को प्रभार दिया जाए और रिमांड कार्य प्रभावित न हो।

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