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    अवैध शराब कारोबारियों का सुरक्षित स्थल बना बेन थाना क्षेत्र में ये पुलिस सरंक्षित गांव

    इस गांव में इतनी मात्रा में शराब बनता है कि अगल बगल दर्जनों गांव जैसे झंडू बिगहा, हरिओम पुर, रेन्नु बिगहा, महाविगहा, अमिया बिगहा, हरप्रसाद बिगहा आदि गांव के लोग नित्य दिन यहां शराब पीने आ ही जाते हैं...

    बिहारशरीफ (संजय कुमार)। नालंदा जिले के बेन प्रखंड के खैरा पंचायत का मखदुमपुर मुसहरी एवं गुरुशरणपुर मुसहरी इन दिनों अवैध शराब निर्माताओं के लिए सुरक्षित स्थल बन गया है।

    यहां दिन रात बेरोक-टोक चुलाऊ शराब का निर्माण एवं बिक्री किया जा रहा है। परंतु आज तक पुलिस अवैध कारोबारियों के खिलाफ कोई करवाई नहीं करती हैं, जो यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं गांव चौकीदार से लेकर थाना पुलिस में सांठ-गांठ है।

    मखदुमपुर गांव के मुसहरी टोला में तो शराब बनाने का धंधा सालों भर चलता है। परंतु ,इन दिनों होली पर्व को लेकर शराब निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है।

    बताया जाता है कि शराब में प्रयुक्त होने वाले मिठा जो टीन में आता है, शराब बनाने वाले लोग उसे वोरा एवं झोला में लाते हैं, ताकि पकड़ में नहीं आ सके। शराब जल्दी तैयार हो ,इसके लिए शराब बनाने वाले लोग यूरिया खाद का भी प्रयोग करते हैं।

    बताया जाता है कि यही कारण  से कभी कभी शराब जहरीला हो जाता है तथा शराब पीने वाले का जीवन सदा के लिए खत्म हो जाता है।

    बताया जाता है कि चुलाऊ शराब का निर्माण टोले के दर्जनों लोगों द्वारा किया जाता है। वैसे तो दिन भर शराब बेची जाती है। परंतु,पीने वाले की महफिल दोपहर 3 बजे के बाद से सजने लगती हैं।

    बताया जाता है कि गांव की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चौकीदार की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है। इस गांव में भी धर्मेंद्र पासवान नामक चौकीदार तैनात हैं।

    शराब निर्माण करने वाले लोग चौकीदार सहित इनके साथ जाने वाले पांच लोगों को भी मुफ्त में दारू पीलवा कर,  मुंह बंद कर दिया जाता है।

    शराब की बिक्री होने से गांव का शांत रहने वाला वातावरण आज शांत होने लगा रहने लगा है। लोग दारू पीने के बाद नशे में गाली गलौज तथा आपस में मारपीट करने से बाज नहीं आते हैं।

    सबसे बुरा हाल महिलाओं का होता है। घर के पुरुष सदस्य नित्य प्रतिदिन दारू पीकर परिवार के सदस्यों को अनाप-शनाप बोलते हैं। महिलाओं पर हाथ उठाने से भी गुरेज नहीं किया जाता है। महिलाएं सुशासन बाबू को एवं उनके पुलिस महकमा के क्रियाकलापों पर तीखा प्रहार कर अपना गुस्सा उतारती है।

    बहुत जल्द ही पंचायत चुनाव की घोषणा होने वाली हैं। चुनाव में किस्मत आजमाने वाले लोग मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए अभी से ही दारू पिलाने पर, पानी की तरह पैसा खर्च कर रहे हैं।

    यही कारण है कि इन दिनों शराब की खपत बढ़ गई है। लोग मुफ्त में दारु पीने के लालच में यह भूल जाते हैं कि चुलाऊ शराब कहीं उनकी जीवन को ही समाप्त न कर दे। जो हो  मुफ्त शराब के कारण लोग पीने का मोह  नहीं छोड़ पाते हैं,  चाहे अकाल मृत्यु ही ना क्यों हो जाये।

    यही हाल इसी पंचायत के गुरुशरण पुर मुसहरी टोले का हैं। वैसे तो गुरुशरण पुर में प्राथमिक विद्यालय से लेकर टेन प्लस टू विद्यालय तक है। इस विद्यालय में प्रतिदिन दूरदराज गांवों के लड़के एवं लड़कियां पढ़ने आते हैं। शराब पीने वाले लोगों के कारण इन छात्राओं में भय देखा जा सकता है।

    बताया जाता है कि गांव में किसी प्रकार की गलत धंधों की खबर थानों तक पहुंच जाता हैं। परंतु आज तक इन शराब निर्माताओं की जानकारी थाने तक नहीं पहुंची है, यह भी अपने आप में खुद,  सवाल उत्पन्न करता है कि कैसे पुलिस को जानकारी नहीं हो पाई हैं। अगर जानकारी है  तो क्यों नहीं छापेमारी की जाती हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि बेन थाने की पुलिस थाना गेट के आगे सड़क पर वाहन चेकिंग कर भोले भाले ग्रामीणों से कुछ खामियां रहने पर पैसा ऐठने से बाज भी नहीं आती हैं।

    ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संबंधित थाने की पुलिस को इन शराब निर्माताओं द्वारा बंधी बंधाई  रकम हर माह पहुंचा दिया  जाता हैं।

    यही कारण है कि पुलिस अनजान बनकर चुपचाप तमाशा देख रही है। शायद जब जहरीली शराब  से लोगों की मौत होगी, तब थाने की पुलिस  जागेगी !