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    विकास को लेकर मुखिया के खिलाफ ग्रामीणों का प्रखंड कार्यलय पर फूटा गुस्सा

    आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया वोट के समय लंबे चौड़े वादे करते हैं, लेकिन आज तक न मनरेगा का कोई काम हुआ है और न ही सात निश्चय योजना का। एक माह के अंदर हमारी सुनवाई नहीं हुई तो इससे भी बड़ा कदम उठायेंगे

    चंडी (नालंदा दर्पण)। चंडी प्रखंड के तुलसीगढ़ पंचायत के वार्ड संख्या 7 ग्राम रसलपुर के  लोगों ने  पांच साल के बाद जब मुखिया से विकास की मांग पुरी नहीं हुई तो प्रखंड  मुख्यालय पहुंच कर बिडियो से विकास की गुहार लगाई है।

    मुखिया के द्वारा विकास के लाख दावे किये जाएं, लेकिन हकीकत सामने आ ही जाती है। कहने को ग्राम पंचायत तीसरी सता होती है। लेकिन कार्यों में वह सरकार से कम थोड़े ही है।

    चंडी प्रखंड के तुलसीगढ़ पंचायत का एक गांव हैं रसलपुर, जहां विकास पहले से ही कोसों दूर थी। पांच साल पंचायत के कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी हाल वही है।

    यहां के वार्ड संख्या 7 के नागरिक शायद इतने सीधे कह लीजिए या गूंगे, जिन्होंने पांच साल शांतिप्रिय ढंग से विकास के नाम पर वेबकूफ बनते रहे।

    जब पांच साल बाद नींद टूटी तो वार्ड में विकास नहीं होने की शिकायत लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे। जहां प्रखंड विकास पदाधिकारी से गुहार लगाई- हुजूर, पांच साल से न ईंट सोलिंग हुई हैं और न सात निश्चय योजना का कोई काम हुआ है।

    वार्ड संख्या के सात के ग्रामीणों का कहना है कि करीब चार साल पहले गांव की ईंट सोलिंग को हटा दिया गया लेकिन बिछाया नहीं गया। जिससे रास्ता कीचड़ बना हुआ है। बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जाने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है।

    गांव वालों ने जिला परिषद सदस्या अनिता सिन्हा से ईंट सोलिंग की गुहार लगाई थी। इसके बाबत योजना भी दी गई, लेकिन कहा जाता है कि तुलसीगढ़ पंचायत द्वारा एनओसी नहीं दिया गया। जिस कारण निर्माण नहीं हो सका।

    ग्रामीणों ने तीन साल पहले भी 2018 को प्रखंड विकास पदाधिकारी से मिलकर लिखित शिकायत भी दी थी, लेकिन शिकायत शायद फाइलों में धूल चाटती रह गई।

    ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा तो दर्जन भर महिलाओं और पुरुषों का गुस्सा प्रखंड कार्यालय पर फूटा। अब उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी से मिलकर वार्ड में विकास के काम कराये जाने की मांग की।

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