बिहार शरीफ के वार्ड-43 में यूं हो रहा लाखों का राशन घोटाला, शिकायत के बाबजूद कोई कार्रवाई नहीं !

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बिहार शरीफ ( नालन्दा दर्पण)। एक तो लॉकडाउन शुरु होने के साथ ही गरीबों के रोजगार बन्द है और वे दो जून की रोटी के लिए तरस रहे हैं, वहीं डीलरों द्वारा गरीब लाभुकों के राशन कार्ड अपने पास रख कर उनके राशन का खुद ही उठाव किया जा रहा है। हद तो यह है कि संपर्क करने पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ऐसे गंभीर समस्या पर संज्ञान के बजाय बकवास करने हैं।

बताया जाता है कि बिहार शरीफ नगर के वार्ड नम्वर 43 के अनेक राशन कार्डधारी ने डीलर के खिलाफ अनुमंडल पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर जाँच करने का निवेदन किया। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 वार्ड नम्वर 43 के कटरा नदी पर निवासी सबाना खातुन राशन कार्ड नम्वर-10277088043046500099,  शमसा बानो राशन कार्ड नम्वर-10277088043045900081, अंगुरी प्रवीन राशन कार्ड नम्वर-1027708804305900086, गुलाम मुस्तफा राशन कार्ड नम्वर-1027708804306200060, सारो देवी राशन कार्ड नम्वर- 102770880043045409981, शीला देवी  राशन कार्ड नम्वर-102770880043045400046,  महेश कुमार राशन कार्ड नम्वर-10277088004304509981, बेबी देवी राशन कार्ड नम्वर- 10277088043045409990 आदि ने बताया कि उन्होंने बिहार शरीफ एसडीओ से लिखित शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

BIHARSARIF RASHAN GHOTALA 2बिहारशरीफ एसडीओ को दिए लिखित आवेदन में बताया गया है कि वर्ष 2014 से उन लोगों का राशन कार्ड बना हुआ है। पर राशन कार्ड आज तक उन्हें नहीं मिला है। जबकि वार्ड पार्षद शहदा खातुन पति जहाँगीर के द्बारा बार-बार यही कहा गया कि उन लोगों का राशन कार्ड नही बना है, लेकिन जब से लॉकडाउन में हम गरीबों को खाने का लाले पड गए, तब भी उन्हें राशन नहीं दिए गए और कहा गया कि उनका राशन कार्ड नहीं बना है, इसलिए उन्हें अनाज नहीं मिलेगें।

इसी बीच समाज सेवी पप्पु मल्लिक द्वारा बताया गया कि उन सभी लोगों का वर्ष 2014 से ही गृहास्थी राशन कार्ड बना हुआ है। जिस पर तब से ही उठाव भी हो रहा है।

पीड़ित लाभुकों ने लिखा है कि वे सब पप्पु मल्लिक की सूचना पर इंटरनेट से नाम- राशन कार्ड नम्वर प्रिंट कर उसकी छाया प्रति भी एसडीओ को संलग्न की गई है।

वार्ड नम्वर 43 में सुनील कुमार, विजय कुमार, सितरा जवी, असलम अंसारी नामक  चार डीलर हैं। अब वर्ष 2014 से यह घपला  किसके द्वारा किया जा रहा है, यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा।

कार्ड धारी महेश कुमार के अनुसार उन्हें ये जानकारी नहीं है कि उनके राशन कार्ड किस डीलर के पास है। अनुमंडल पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर जाँच की मांग की है।

समाजसेवी पप्पु मलीक बताते हैं कि जब लॉकडाउन लगा तो गरीब लोग भूखमरी के कगार पर आ गये। सरकार ने गरीब को मुफ्त राशन देने का घोषणा की, पर डीलर द्वारा राशन नहीं दिया गया। जो थोडा बहुत पढ़े-लिखे थे या दबंग थे, उन लोगों को कुछ राशन देकार चुप करा दिया गया। पर जिसका कोई कहीं सुनने वाला नहीं था, उन्हें लॉकडाउन में भी राशन नहीं दिया गया।

वे आगे कहते हैं कि इन गरीब कमजोर परिवारों का राशन धपला किया जा रहा है। वर्ष 2014 से ही एक परिवार का राशन 50 हजार रुपए से उपर का उठाव हुआ है। इस मामले में अब तक लाखों के घोटाले किए गए हैं। यहां इसे देखने वाला कोई नहीं है।

कार्डधारी शबाना खातुन बताती है कि विगत 7 जुलाई को अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन देकर जाँच करने का निवेदन किया था। लोकिन आज तक न तो जाँच ही हुआ और न ही हम गरीब को राशन ही उपलब्ध हुआ।

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