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    ऐतिहासिक इसलामपुर-वेशवकः जहाँ कश्मीर के अंतिम शासक की कब्र पर आज चर रही गाय-बकरियां

    नालंदा दर्पण डेस्क। ‘अजीम ओ शान शहंशाह, हमेशा हमेशा सलामत रहे, हिंदुस्तान तेरी जान, तू जान-ए-हिंदुस्तान’। हिंदुस्तान के शहंशाहों की शान ओ शौकत के क्या कहने,एक दौर हुआ करता था, जब उनके जलबे हुआ करते थे। रंगीन महफिलें जमा करती थीं। इतिहास से जुड़े लोगों, शासकों के जन्म और मृत्यु की तिथियों की जगमगाहट और देश भर में फैले स्मारकों के बीच में भी कुछ ऐसे बादशाह भी रहें हैं, जिनकी खामोश दास्तां है।

    ऐसी ही एक खामोश दास्तां है कश्मीर के अंतिम शासक रहे सुल्तान युसूफ चक की। कश्मीर से हजारों किलोमीटर दूर नालंदा के इस्लामपुर के बेशवक गांव में वें बेनूर कब्र में खामोशी से दफन पड़ें हुए हैं। उनकी कब्र पर गुब्बार ही गुब्बार है। उनका अंजूमन विरान है।

    कोई विश्वास ही नहीं कर सकता है कि 1578 ईस्वी से 1586 ईस्वी तक कश्मीर पर हुकूमत करने वाले युसूफ़ शाह की यह क़ब्र है। इस क़ब्र को देखने से प्रतीत होता है कि एक बादशाह राजमहल की चकाचौंध से दूर सुकून फरमा रहा है। अपनी जिंदगी की बदहाली के किस्से बयां कर रहा है।

    कहां वह कश्मीर की जन्नत और कहां यह वीराना। जहां उस अंजूमन में कोई सुल्तान को सलाम बजाने नहीं आता। बदरंग हो चुकी चाहर दीवारी से घिरी इस क़ब्र के आसपास  उग आई हरी घास, चरती गाय और बकरियां इसकी बदहाली बयान कर रही हैं। जिसे लोग चरागाह समझ अपने मवेशी चराते हैं।

    नालंदा जिला का इस्लामपुर जिसे मुगल काल में बसाया गया,मुगल स्थापत्य कला का अनेक उत्कृष्ट नमूने,भवन, इमारतें दिख जाती है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इसका प्राचीन नाम ईशरामपुर था।

    बाद में अंग्रेजी हुकूमत में इसका नाम इस्लामपुर पड़ गया। इस्लामपुर को ‘छोटी अयोध्या’ भी कहा जाता है। अयोध्या में लक्ष्मण किला के संस्थापक युगलायन शरणजी महाराज का जन्म इस्लामपुर में ही हुआ था।

    मुगल काल में इस्लामपुर में कश्मीर चक, हैदर चक जैसे मुगलकालीन गांव ‌भी है। कश्मीर के अंतिम चक शासक युसूफ शाह चक और उनके पुत्र हैदरचक का इतिहास दफन हैं।

    नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार का पैतृक गांव हैदर चक है। यह वहीं हैदर चक है, जिसके पिता युसूफ शाह चक की कब्र बेशवक में है।

    इस्लामपुर का धार्मिक, ऐतिहासिक और मुगलकालीन इतिहास रहा है। इस्लामपुर में हथिया बोर तालाब है। जो काफी प्रसिद्ध है। 150 वर्ष पूर्व् स्व सृजन चौधरी जमींदर के द्घारा हाथियो को नहाने के लिए व्यवस्था किया गया था।

    पक्की तालाब के अंदर से सुरंग की व्यवस्था किया गया था। जिससे पानी होते हुए हाथिया वोर तालाब का पानी मुहाने नदी निकलता था। बरसात के समय इसी माध्यम से पानी को व्यवस्थित किया जाता था। जल को व्यवस्थित करने का यह एक नयाब नमूना था।

    इसी इस्लामपुर में दिल्ली दरबार  है। इस नगर के जमींदार चौधरी जहुर शाह ने लगभग 150 वर्ष पूर्व दिल्ली दरबार की नकल पर वौलीबाग में दिल्ली दरबार तथा लखनउ की तर्ज पर दो मंजिला इमारत बनवाया था।

    जिसमें 52 कोठरी, 53 दरबाजा, धूप घडी़, भूलबुलैया, नाचघर, तालाब आदि निर्मित था। महल के उपर एक गुम्बद सुरक्षा प्रहरी के लिए बनवाया था। जो अदभुत तरीके से बना था।

    इनके अलावे इस नगर के वूढानगर सूर्य मंदिर व सरोवर एंव माँ जगदम्बा मंदिर, आयोध्या ठाकुरबाड़ी, पुरानी ठाकुरबाड़ी, पक्की तालाब, भारत माता, माँ काली, वग्गा धर्मशाला, हिंदुओं का शान समेटे बैठा है। वहीं थाना परिसर स्थित हजरत दाता लोदी शाह दिबान रहमतुलैह अलैह की मजार आस्था का केंद्र बना है।

    इसी इस्लामपुर में थोड़ी दूर पर एक प्राचीन गांव है ‘बेशवक’!  इसी बेशवक में कभी कश्मीर पर हुकूमत करने वाले ‘चक’ वंश‌ के आखिरी बादशाह युसूफ शाह की कब्र है। युसूफ शाह 1578 से