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    Thursday, July 18, 2024
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      आँचलिक पत्रकारिता के नाम पर कलंक, देखिए कैसी छप रही है चुनावी खबर !

      नालंदा दर्पण डेस्क।  वेशक आज आंचलिक पत्रकारिता दम तोड़ रही है। जिस तरह से नए लड़के मीडिया की आड़ में सिर्फ धंधा करने की मंशा से पनप रहे हैं, वह गंभीर चिंता का विषय है।

      उनकी लिफाफामय पत्रकारिता न केवल सूचनाओं की शक्ल बदल रहे हैं, बल्कि चुनावी माहौल में जनमत को भी प्रभावित कर रहे हैं। इसे आदर्श आचार संहिता के अनुकुल भी नहीं माना जा सकता।

      यह बात किसी से छुपी नहीं हैं कि आज राजनीति में येन-केन-प्रक्रेरेण धन-बल का खेल बढ़ गया है। लेकिन मीडिया की रीढ़ ही जब टूट जाए तो फिर समाज-व्यवस्था का बेड़ा गर्क तय है।

      नगरनौसा प्रखंड क्षेत्र से हिन्दी दैनिक आज के संवाददाता इन्द्र भूषण प्रसाद ने अपने फेसबुक वाल पर एक पोस्ट की है। वेशक उनकी यह पोस्ट आज की आँचलिक पत्रकारिता की हकीकत बयां करती है। आखिर पूरे सूबे में लागू आदर्श आचार संहिता के बीच ऐसी खबर को क्या माना जाए। पत्रकारिता, चाटूकारिता या फिर पेड न्यूज?

      श्री प्रसाद ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा है कि….

      “नगरनौसा प्रखंड में पत्रकारिता का स्तर कितना नीचे चला गया है। इस पोस्ट में मैंने राष्ट्रीय सहारा, प्रभात खबर, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, नव बिहार दूत अखबार के नगरनौसा से प्रकाशित खबर, जो लोजपा प्रत्याशी ममता देवी के चुनावी कार्यालय से संबंधित है।

      इसमें दैनिक जागरण, प्रभात खबर, नव बिहारदूत में प्रकाशित खबर का हेडलाइन एक है। इसमें कोई बदलाब नही है। जनता के बीच जमीन पर बैठकर करुँगी सेवा।

      इस खबर से यही प्रतीत होता है कि लोजपा प्रत्याशी ममता देवी ने खबर बना कर किसी एक पत्रकार को दिया या किसी एक ही पत्रकार का लिखा हुआ तीन अखबारों में हुबहू शीर्षक के साथ छप गया।

      अखबारों के संपादक महोदय भी ऐसी खबरों पर ध्यान नही देते है। आगे तीनो अखबारों का खबर भी पढिये। काफी मिलता जुलता खबर है।

      सोचने बाली बात ये है कि इस छेत्र के विधायक की जितनी खबरें साल भर में नहीं छपी। उतना ममता देवी की खबरें चली”।

      बहरहाल, एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क की नालंदा दर्पण डेस्क इस बात को कोई महत्व नहीं देती कि कौन किसकी कितनी खबर छाप रही है या विज्ञापन। क्योंकि चुनावी दौर में यह सब देखना निर्वाचन आयोग के करींदों का दायित्व है। लेकिन इस बात की पीड़ा उन मीडियाकर्मियों को होनी स्वभाविक है, जिन्हें ‘लाल-हरा लिफाफा खबर’ के कटाक्ष-दंश झेलने पड़ते हैं।

      आईए नीचे देखिए इन्दुभूषण की वह पोस्ट और उसपर हुई प्रतिक्रिया….. ?

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