राजगीर थानेदार से त्रस्त गरीब परिवार ने लगाई कोर्ट में गुहार !

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दबंगई के आगे गरीबों का बेबस होना शायद उनकी नियति है। रसूखदारों का साथ तो पुलिस-प्रशासन भी देता है। गरीब की जमीन हथियाना इनका शगल है। इसका नजारा राजगीर थाना क्षेत्र में खुलेआम देखा जा सकता है। जब गरीबों की थाने में सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित परिवार ने नालंदा जिला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के यहां अपनी शिकायत दर्ज करा कर इंसाफ की गुहार लगायी है

नालंदा दर्पण डेस्क (इन्द्रदेव लाल)। मिली जानकारी के अनुसार राजगीर थाना क्षेत्र के कुण्डरोड, रामकृष्ण मठ के सामने स्थित रहनेवाले भोला मिस्त्री, परशुराम मिस्त्री और सुनीता देवी ने 25 अगस्त को दबंग विकास महतो सहित 5 अज्ञात लोगों के नाम से मामला दर्ज कराया है।

दर्ज मामले में कहा गया है कि आवेदकगण बढ़ई मिस्त्री का कामकाज कर किसी तरह से अपना जीवन गुजर-बसर करते हैं। 90 सालों से किसी तरह से अपनी की जमीन की घेराबंदी कर खपड़ापोश मकान बनाकर रहते हैं। यह जमीन करोड़ों की है। इसी जमीन पर विकास महतो की गिद्धदृष्टि है।

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पीड़ित परिवारों को सताने के मायने? : बताया जाता है कि करीब दस लाख खर्च कर पैरवी के बल पर जमीन की घेराबंदी करके पिछले तीन माह से यहां तीन मंजिला मकान का निर्माण करवा रहा है। इसके कारण पड़ोसियों को भी परेशानी हो रही है।

बढ़ई परिवार के मकान की घेराबंदी में बड़ा सा छेद करके गंदा पानी गिराया जा रहा है। बाउंड्री भी तोड़ दी गई है। विकास महतो गलत नीयत से बहू-बेटियों की वीडियोग्राफी करवाते हैं। जब मन करता है घर में प्रवेश कर जाते हैं। विकास महतो की दबंगई से बढ़ई परिवार दहशत में है।

विकास महतो के खिलाफ नहीं होती पुलिसिया कार्रवाईः बताया गया कि विकास महतो आपराधिक किस्म के लोगों को अपने दो मंजिला भवन में बुलाकर शराब का सेवन करवाते हैं।

बढ़ई परिवार आजिज आने के बाद हिम्मत कर राजगीर थाने में इस संबंध में सूचना दी। लेकिन विकास महतो के खिलाफ अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। थाने में बढ़ई परिवार परिवार को भगा दिया जाता है।

थाने में कहा गया कि तुमलोग अपनी जमीन और मकान का कागज दिखलाओ और जब आवेदकों ने थाने में दस्तावेज दिखाए तो थान इंचार्ज ने कहा कि ये सब फर्जी कागजात है, उल्टे तुम्हीं लोगों पर 420 का मुकदमा दर्ज होगा।

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पीड़ित परिवार ने बताया कि विकास महतो पुलिस की मिलीभगत से डरा-धमका कर जमीन को हड़पने की मंशा पाले हुए है। विकास महतो चाहता है कि पीड़ित परिवार उन्हें मकान-जमीन औने-पौने में बेच दे।

उल्लेखनीय है कि पीड़ित परिवार के निर्मित मकान के खाता-खेसरा में  वर्ष 2012 में नालंदा में राजगीर में भूमि सुधार उपसमाहर्ता के यहां मुकदमा दर्ज हुआ था। पीड़ित परिवार ने अपने जमीन-मकान से संबंधित सभी कागजात दाखिल किया था।

बिहार डीजीपी से लगाई गुहार:  आवेदकगण के अलावा उक्त भूमि पर सभी निवासियों ने अपना-अपना लिखित बयान और दस्तावेज दाखिल किया था। उस वक्त भी इस केस के विपक्षी विकास कुमार कहीं अता-पता नहीं था।

पीड़ित परिवारों ने इस मामले में नालंदा के एसपी और राजगीर के थाना इंचार्ज से जांच की गुहार लगाई है। इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए बिहार मानवाधिकार आयोग, पुलिस महानिदेशक और पुलिस उपमहानिरीक्षक को भी पत्र भेजा गया है।

हाईकोर्ट के आदेश को भी ठेंगे पर रखता है राजगीर थाना इंचार्जः उल्लेखनीय है कि राजगीर के थानेदार संतोष कुमार पिछले तीन सालों से अधिक समय से राजगीर थाने में डटे हुए हैं। यह थानेदार हाईकोर्ट के आदेश को भी ठेंगे पर रखता है।crupt rajgir police sho 3

जमीन अतिक्रमण को मुक्त कर जमीन मालिक को दखल दिलाने के मामले को राजगीर थाना दस साल से उलझाये हुए है। पटना हाईकोर्ट ने 2011 में ही जमीन खाली करने का आदेश दिया था। मामला राजगीर थाने से मालखाना खाली कराना है।

मालखाना खाली होने से ही अतिक्रमित जमीन मुक्त हो पायेगी। कोर्ट ने इसे अतिक्रमित भूमि बता कर जमीन मालिक के पक्ष में दस साल पूर्व फैसला सुनाया था। राजगीर थाना प्रभारी कोर्ट के आदेश को अबतक ठेंगा ही दिखा रहा है। 

सीडब्ल्यूजेसी नं. 5682/2008, हरिकांत झा बनाम राज्य सरकार, 3738, 23 दिसंबर 2011 पारित आदेश का पालन राजगीर (नालंदा) के थाना प्रभारी को करना है।

पटना हाइकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए राजगीर के एसडीओ, एसडीपीओ, सीओ और थाना प्रभारी के बीच एक-दूसरे पर फेकाफेंकी की कार्यवाही जारी है। यानी सिर्फ पत्राचार का खेल चल रहा है।