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    पर्यटन के क्षेत्र में बिहार को बड़ी सौगात, नालंदा के राजगीर में जू-सफारी का उद्घाटन

    “विगत पांच साल पहले 17 जनवरी, 2017 को सीएम नीतीश कुमार ने राजगीर के स्वर्णगिरी पर्वत की तराई में वाइल्ड लाइफ जू सफारी का शिलान्यास किया था। 191 हेक्टेयर में फैले जू सफारी की निर्माण लागत 177 करोड़ आई है। यह राजगीर का दूसरा बड़ा आकर्षण है। यह प्रोजेक्ट 2020 में ही पूरा हो जाना था, परंतु कोरोना संक्रमण व लाकडाउन के कारण देर हुई….

    राजगीर (नालंदा दर्पण)। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल राजगीर पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार विशेष कृपा रही है। बीते दिन उन्होंने फिर पर्यटन के क्षेत्र में एक यहाँ बड़ी सौगात दी है।

    सीएम ने राजगीर की वादियों में 177 करोड़ की लागत से नवनिर्मित जू-सफारी का उद्घाटन किया। मौके पर कई मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। इस जू-सफारी में घूमने के लिए शीघ्र ऑनलाइन टिकट की भी व्यवस्था की जाएगी।

    यह बिहार का पहला ज़ू सफारी है। यहां खुले में शेर और बाघ घूमते हैं। पर्यटक यहां बंद गाड़ियों में जू सफारी का आनंद लेंगे। दर्शक जू-सफारी में विभिन्न वन्य प्राणियों को खुले में घूमते हुए देख सकेंगे।

    इस जू सफारी में बंगाल और गुजरात से शेर और बाघ मंगाए गए हैं। जू-सफारी पार्क को स्वर्ण गिरी पर्वत एवं वैभव गिरी पर्वत के बीच घाटी में विकसित किया गया है।

    साथ ही साथ ज़ू-सफारी में विचरण कर रहे जानवरों को दूर से देखा जाएगा। इन्हें देखने के लिए वैभव गिरी पर्वत पर माइक्रो टेलीस्कोप भी लगाए जाएंगे।

    यह जू सफारी कई सुविधाओं से लैस है। यहां प्रवेश द्वार पर टिकट काउंटर और ऑडिटोरियम है। इन के अलावा बस पड़ाव व प्रतीक्षालय और रेस्टोरेंट की भी सुविधा है।

    राजगीर आने वाले सैलानी अब रोपवे, स्काई वॉक, ग्लास ब्रिज, नेचर सफारी के बाद जू सफारी का भी लुत्फ उठा सकेंगे।

    इसके उद्धाटन के लिए सैलानी काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे। जू सफारी के उद्घाटन के साथ ही बिहार में इको टूरिज्म के नए युग की शुरुआत हो गयी।

    सीएम पहले भी जू सफारी का निरीक्षण कर चुके हैं। 191 हेक्टेयर में जू सफारी तैयार किया गया है। वैसे तो पिछले साल ही जू सफारी का उद्घाटन होना था लेकिन कई कारणों से विलंब हुआ है।

    इस जू सफारी पार्क के निर्माण में करीब 177 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका निर्माण सामान्य चिड़ियाघर की तरह नहीं है। इसमें वन्य जन्तुओं को खुले वनों का घेरान कर रखा गया है। काफी बड़े-बड़े बाड़ों में रख कर उन्हें स्वच्छंद विचरण की सुविधा दी गई। इन्हें पर्यटक प्रत्यक्ष देख सकेंगे।

    पर्यटक बंद मजबूत संरक्षित वाहन के माध्यम से भ्रमण करेंगे। बाड़ों के अंदर जाकर वन्यजन्तुओं को प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रणाली में निहित गतिविधियों को ज्यादा करीब से आनंद उठा सकेंगे। यहां विश्व की विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों व तितलियों को उनके अपने प्राकृतिक अधिवास में रखा गया है।

    सफारी में राजगीर की पांच पहाड़ियों के बीच वनों, वनस्पतियों व वन्यजन्तुओं की विविधता का संगम है। यहां रहने वाले जानवरों के इलाज की भी सुविधा है। सड़क का भी निर्माण कार्य बिल्कुल प्राकृतिक रूप से किया गया है।

    191.12 हेक्टेयर में फैला राजगीर जू सफारी पर्यटकों के लिए रोमांच से भरा है। इस ज़ू सफारी को राजगीर वन्य प्राणी की घाटी मे विकसित किया गया है। इसमें 72 हेक्टेयर क्षेत्रफल का पुराना मृग विहार भी समाहित है।

    इसमें निम्न वन्य जन्तुओं के लिए घेरे वाले पांच जोन में होंगे। इनमें बाघ, शेर, तेन्दुआ, भालू, हिरण को रखा गया है। इस सफारी पार्क का डिजाइन छत्तीसगढ़ के कंपनी एलएनसी द्वारा किया गया है।

    सफारी के मेन एंट्रेंस, रिसेप्शन कैंपस एरिया, टिकट काउंटर से लेकर जीव-जंतुओं के बाड़ों तक के आवागमन के पाथ-वे सहित जू सफारी को सजाया-संवारा गया है।

    मांसाहारी जंगली जानवरों में शेर, रायल बंगाल टाइगर, भालू, तेंदुआ के अलावा शाकाहारी हिरण, सांभर, ब्लैक बक, चीतल, हाग डियर आदि राजगीर के पर्यावरण में अपने-अपने बाड़ों में रखे गए हैं।

     

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