राजगीर (नालंदा दर्पण)। पर्यटन नगरी राजगीर के अशोक नगर में स्थित अरुणोदय विद्यालय के छात्रावास में 8 वर्षीय छात्र दिलखुश कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। घटना के पांचवें दिन पुलिस ने विद्यालय के संचालक अजय कुमार सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस मामले ने न केवल परिजनों के गंभीर आरोपों को उजागर किया है, बल्कि स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। आखिर क्या हुआ था उस रात, जब एक मासूम की जिंदगी अचानक खत्म हो गई?
बता दें कि विगत 13 और 14 सितंबर की मध्यरात्रि को हुई इस घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। मृतक छात्र दिलखुश कुमार के दादा अनिल प्रसाद यादव ने विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है।
उनका दावा है कि दिलखुश की बेरहमी से पिटाई की गई, जिसके कारण उसकी मौत हुई। उन्होंने इसे गैर-इरादतन हत्या करार दिया है। दूसरी ओर विद्यालय संचालक अजय कुमार सिंह ने इस घटना को आत्महत्या बताया है। उनके अनुसार दिलखुश ने स्कूल की पांचवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।
लेकिन पुलिस इस दावे को पूरी तरह खारिज करती है। डीएसपी सुनील कुमार सिंह के अनुसार यदि कोई बच्चा पांच मंजिला इमारत से कूदता तो उसके शरीर पर गंभीर चोटें और हड्डियों के टूटने के निशान मिलते। घटनास्थल पर ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, और मृतक के हाथ-पांव भी पूरी तरह सही सलामत पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में पिटाई की आशंका को अधिक बल मिल रहा है।
पुलिस इस मामले को हत्या मानकर हर पहलू से गहन जांच कर रही है। डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि हम किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रहे। यदि जांच में किसी शिक्षक या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई गई, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस की नजर पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी है, जो दिलखुश की मौत के सटीक कारण को उजागर कर सकती है। घटनास्थल से मिले तथ्यों ने इस केस को और जटिल बना दिया है। परिजनों के आरोप, स्कूल प्रबंधन की संदिग्ध भूमिका और आत्महत्या के दावे के अभाव में ठोस सबूतों ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है।
हालांकि यह घटना राजगीर के लिए पहली बार नहीं है, जब किसी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। अरुणोदय विद्यालय छात्रावास स्थानीय बच्चों के लिए शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता था, जोकि अब इस विवाद के केंद्र में है। स्थानीय निवासियों ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर गहरी चिंता जताई है।
संचालक अजय कुमार सिंह को न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है, लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं होता। पुलिस की जांच अब भी जारी है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। दिलखुश की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है? क्या यह एक मासूम की हत्या थी या कुछ और? इन सवालों का जवाब फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही मिल पाएगा।
