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हिलसा में ‘सिटारा 2023’ योजना पर जागरूकता शिविर ने ट्रांसजेंडर समुदाय के बीच जगाई उम्मीद

Awareness camp on 'Sitara 2023' scheme in Hilsa raises hopes among transgender community

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। समाज के हाशिए पर धकेल दिए गए ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक नई सुबह का आगाज़ हो सकता है। हिलसा अनुमंडल नगर के बिहारी रोड स्थित देवी स्थान मंदिर दक्षिणी कोयरी टोला में आयोजित एक विधिक जागरूकता शिविर ने न केवल कानूनी अधिकारों की रोशनी दिखाई, बल्कि मुख्यधारा में एकीकरण की राह भी प्रशस्त की।

बीएसएलएसए योजना ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का एकीकरण, पुनर्वास एवं न्याय तक पहुँच (सिटारा 2023)’ विषय पर केंद्रित इस शिविर में किन्नर समुदाय के सदस्यों ने पहली बार अपनी आवाज़ बुलंद की और सरकारी योजनाओं के फायदों से रूबरू हुए। यह आयोजन नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जो समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शिविर का शुभारंभ पैनल अधिवक्ता विजय कुमार और हिलसा अनुमंडल कार्यालय के लीगल सर्विसेज क्लीनिक में प्रतिनियुक्त पैरा लीगल वॉलंटियर (पीएलवी) आलोक कुमार के कुशल नेतृत्व में हुआ। नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज गुरविंदर सिंह मलहोत्रा, प्राधिकार सचिव राजेश कुमार गौरव, तालुका विधिक सेवा समिति हिलसा के अध्यक्ष एवं एडीजे आलोक कुमार पाण्डेय तथा सचिव शोभना स्वेतांकी के संयुक्त आदेश पर आयोजित इस कार्यक्रम में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

पीएलवी आलोक कुमार ने परिचय सत्र में प्राधिकरण की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन वर्ष 1987 में किया गया था, जो 1994 के संशोधन अधिनियम के बाद 9 नवंबर 1995 से पूरे देश में प्रभावी हो गया। इसका मुख्य उद्देश्य निर्धन, आर्थिक रूप से पिछड़े, वंचित, असहाय, महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति-जनजाति तथा विकलांग व्यक्तियों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना है। साथ ही समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन कर विवादों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना भी इसका हिस्सा है।

कार्यक्रम का केंद्रबिंदु रही ‘सिटारा 2023’ योजना, जिसकी विस्तृत चर्चा पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने की। उन्होंने उपस्थित ट्रांसजेंडर सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, “भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हैं, चाहे वह किसी भी लिंग, जाति या वर्ग का हो। लेकिन लंबे समय से ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज से अलग-थलग रखा गया, जिससे वे शिक्षा, रोजगार और न्याय से वंचित रहे।

इसी असमानता को दूर करने के लिए बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (बीएसएलएसए) ने ‘सिटारा 2023’ योजना की शुरुआत 14 नवंबर 2023 को की। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में शामिल करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना तथा न्याय, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा तक समान पहुँच प्रदान करना है।”

विजय कुमार ने आंकड़ों के सहारे स्थिति की गंभीरता उजागर की। सर्वोच्च न्यायालय के 2014 के ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडर लोगों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी गई। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में ट्रांसजेंडरों की कुल संख्या 4,87,803 थी, जबकि बिहार में यह 40,827 बताई गई। नालंदा जिले में यह संख्या अनुमानित रूप से कम है, लेकिन स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 मुख्य कानून है, जो उनके अधिकारों की ढाल है। बिहार सरकार ने 2019 में समाज कल्याण विभाग के तहत ‘बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड’ की स्थापना की, जिसका लक्ष्य ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ना, रोजगार, स्वास्थ्य और संपत्ति जैसे क्षेत्रों में भेदभाव रोकना है। बोर्ड किन्नरों की समस्याओं को समझकर नीतियाँ और योजनाएँ तैयार करता है।

शिविर में सबसे अधिक चर्चा हुई ‘स्माइल योजना’ (सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एण्ड एंटरप्राइज) की, जिसकी शुरुआत 2022 में भारत सरकार ने की। विजय कुमार ने विस्तार से बताया कि यह योजना किन्नरों और भीख मांगने वालों को मुख्यधारा में लाने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसका मुख्य फोकस सम्मानजनक जीवन, शिक्षा, रोजगार और आवास प्रदान करना है। योजना के दो प्रमुख घटक हैं।

पहले घटक ट्रांसजेंडर वेलफेयर कंपोनेंट में किन्नरों की पहचान, सुरक्षा और पुनर्वास पर जोर। इसमें कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा और आजीविका के अवसर शामिल हैं।

वहीं दूसरे घटक कॉम्प्रिहेंसिव रिहैबिलिटेशन ऑफ पर्सन्स एंगेज्ड इन बेगिंग में भीख मांगने वालों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास।

योजना के तहत पात्र किन्नरों को मिलने वाले लाभों में किन्नर सम्मान पेंशन योजना के तहत मासिक पेंशन, किन्नर आवास योजना के तहत आवास या आश्रय गृह की सुविधा, शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत नवमी कक्षा से पीजी तक पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप और आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण के तहत सिलाई, ब्यूटी पार्लर, हस्तशिल्प आदि में ट्रेनिंग, रोजगार और आत्मनिर्भरता के तहत स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सुविधाएँ के तहत निःशुल्क जाँच, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और उपचार एवं भेदभाव उन्मूलन के तहत समाज में समान अधिकार, सम्मान और अवसर सुनिश्चित करना शामिल हैं।

विजय कुमार ने जोर देकर कहा कि इन लाभों का फायदा उठाने के लिए बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड और स्माइल योजना की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन के बिना लाभ नहीं मिलेगा, इसलिए जल्दी आवेदन करें।

शिविर में किन्नर समुदाय के सदस्यों ने अपनी मूलभूत समस्याओं से भी रूबरू कराया। सपना किन्नर ने कहा कि हमलोगों को हमेशा अलग-थलग महसूस होता था। योजना के बारे में पहले पता ही नहीं था, इसलिए लाभ से वंचित रहे।

पुनम किन्नर ने जोड़ा कि यह पहला मौका है जब हमें इतनी विस्तृत जानकारी मिली। ऐसे शिविर बार-बार होने चाहिए। लालो किन्नर, आरती किन्नर, मोहनी किन्नर, पूजा किन्नर, मनिषा किन्नर, मुस्कान किन्नर, निशा किन्नर, खुशी किन्नर, माही किन्नर और निशु किन्नर समेत अन्य सदस्यों ने उत्साह से भाग लिया और जागरूकता शिविर की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें नई उम्मीद मिली है और वे अब सक्रिय रूप से योजनाओं का लाभ लेंगे।

कार्यक्रम के अंत में दोनों वक्ताओं ने धन्यवाद ज्ञापित किया और सभी को योजना से जुड़ने का आह्वान किया। यह शिविर न केवल ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि समाज में समावेशिता की दिशा में एक सकारात्मक संदेश भी दे गया। नालंदा दर्पण ऐसी पहलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिक जानकारी के लिए बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड या स्माइल योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क करें।

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