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सीएम विकास यात्रा: भ्रष्टाचार की पिच पर यूं फिसल रही प्रशासन की टीम!

बेन (नालंदा दर्पण)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकास यात्रा का कारवां बेन प्रखंड मुख्यालय के खेल मैदान में जैसे ही तय हुआ, वैसे ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। प्रगति यात्रा और महिला संवाद कार्यक्रम के बहाने यह दौरा न केवल चुनावी माहौल को गर्माने का माध्यम है, बल्कि अधिकारियों के लिए अपनी कुर्सी बचाने की जंग भी। लेकिन बारिश की बौछारों ने मैदान को कीचड़ और पानी से लबालब कर दिया है, जो विकास की हकीकत पर करारा तमाचा मार रही है।CM Vikas Yatra This is how the administration team is slipping on the pitch of corruption 4

नालंदा दर्पण की टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा तो पाया कि तस्वीरें खुद ब खुद भ्रष्टाचार और लापरवाही की दास्तां सुना रही हैं। दलदली मैदान, जमा पानी के तालाब और अस्थायी शौचालयों का जल्दबाजी में किया गया निर्माण। क्या यह दौरा वास्तविक प्रगति लाएगा, या फिर चुनावी दिखावा साबित होगा? आइए, गहराई से जानते हैं।

मुख्यमंत्री के आगमन की तैयारी में प्रशासन दिन-रात एक कर रहा है। प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारी मैदान के उभरे गड्ढों को मिट्टी से भरकर समतल करने में जुटे हैं, सड़क किनारे की झाड़ियां काटी जा रही हैं और मिट्टी-बालू-रेत के ढेर हटाए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार सीएम का हेलीकॉप्टर सौरे पोखर पर उतरेगा, जहां लाखों रुपये की लागत से हेलीपैड बनाया जा रहा है। वहां से कार से वे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे और संभावना है कि प्रखंड कार्यालय व अस्पताल का औचक निरीक्षण भी करेंगे। बारिश ने इन तैयारियों पर पानी फेर दिया है, जिससे अधिकारियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। जिलाधिकारी, एसपी, एडीएम नालंदा और एसडीएम, एसडीपीओ राजगीर ने खुद मैदान का जायजा लिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह सब ‘ऊपरी दिखावा’ है।

मौके पर ली गई तस्वीरें इस कहानी को और जीवंत बनाती हैं। खेल मैदान, जो कभी स्थानीय युवाओं के लिए खेल-कूद का केंद्र था, आज कीचड़ से सना हुआ है। एक तस्वीर में फैले पानी के पोखरों के बीच हरी घास के टुकड़े तैरते नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी में कुछ लोग और एक गाय मैदान को पार करते दिख रहे हैं। मानो यह खेल का मैदान नहीं, बल्कि पशुचारण का इलाका हो।

 

तीसरी तस्वीर में दूर तक फैला दलदल और बिखरा कचरा विकास की पोल खोल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि एक दशक पहले इस मैदान पर 27 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन घटिया सामग्री और ठेकेदारों की मिलीभगत से आज यह बंजर हो चुका है। एक एक बुजुर्ग ने व्यंग्यात्मक लहजे में से कहा कि जितनी तेजी से पैसा लगा, उतनी ही तेजी से सब बह गया। अब सीएम आएंगे तो क्या? फिर वही पुरानी कहानी।

कार्यक्रम के लिए बनाए जा रहे अस्थायी शौचालय और स्नानागार भी ध्यान खींचते हैं। एक तस्वीर में बांस की छड़ों पर लाल-नीली तिरपालें लटकी हुई हैं और कंक्रीट के प्लेटफॉर्म पर शौचालय के पैन लगाए गए हैं। यह निर्माण इतनी जल्दबाजी में किया गया लगता है कि बारिश की अगली बौछार में ही ढह सकता है।

ग्रामीण महिलाओं ने शिकायत की कि महिला संवाद कार्यक्रम के नाम पर ये शौचालय बनाए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी सुविधाएं कहां हैं? हर बार चुनाव आते हैं तो ऐसे दिखावे होते हैं और बाद में सब भूल जाते हैं।

एक अन्य ग्रामीण सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि मैदान के चारों ओर लगाए गए पेड़-पौधों की राशि अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब में चली गई। हरियाली के नाम पर एक पत्ता नहीं बचा। अब हेलीपैड और सड़क मरम्मत के नाम पर फिर लूट हो रही है।

यह दौरा बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नीतीश कुमार की लगातार जिलों में की जा रही यात्राओं का हिस्सा है। पार्टी की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम न केवल महिला सशक्तिकरण पर फोकस करेगा, बल्कि प्रगति के दावों को भी मजबूत करने का प्रयास है। लेकिन स्थानीय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतें इसे चुनौती दे रही हैं।

ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय और अस्पताल में रिश्वतखोरी की बातें कीं, जहां काम कराने के लिए स्पीड मनी’ की मांग आम है। एक युवा किसान ने निराशा से कहा कि सीएम आएंगे, भाषण देंगे और चले जाएंगे। लेकिन हमारी समस्याएं वैसी की वैसी रहेंगी।

प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला। जब बीडीओ श्री हर्ष से संपर्क किया तो उनका नंबर ब्लैकलिस्ट में पाया गया। अंचलाधिकारी सौरभ कुमार ने भी फोन नहीं उठाया। यह चुप्पी खुद ब खुद कई सवाल खड़े करती है।

क्या मुख्यमंत्री का दौरा बेन में वास्तविक बदलाव लाएगा या यह भी चुनावी जुमलों का हिस्सा साबित होगा? ग्रामीणों की उम्मीदें अब नीतीश कुमार के कदमों पर टिकी हैं, लेकिन मैदान की कीचड़ भरी पिच पर ‘खेला’ कैसा होगा, यह देखना बाकी है।

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