बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग के सख्त निर्देशों की अवहेलना करना नालंदा जिले के पांच सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (HM) के लिए भारी पड़ गया। इन विद्यालयों ने दैनिक प्रार्थना सभा की तस्वीरें निर्धारित समय पर विभागीय कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को उपलब्ध नहीं कराईं, जिसके चलते जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन प्रधानाध्यापकों को शोकॉज नोटिस जारी किया और एक दिन की वेतन कटौती का आदेश दिया।
बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में प्रतिदिन प्रातःकालीन प्रार्थना सभा को अनिवार्य किया है। इस सभा का उद्देश्य विद्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और शैक्षिक वातावरण को मजबूत करना है।
विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक विद्यालय को प्रार्थना सभा की तस्वीरें, अक्षांश और देशांतर (जियो-टैग) के साथ, कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को भेजना अनिवार्य है। तस्वीरें समय पर न भेजने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।
हालांकि नालंदा जिले के पांच विद्यालयों ने इस नियम का पालन नहीं किया। इन विद्यालयों में प्रार्थना सभा की तस्वीरें या तो समय पर नहीं भेजी गईं या बिल्कुल भी नहीं भेजी गईं। इस लापरवाही के चलते डीईओ आनंद विजय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों पर शोकॉज नोटिस और वेतन कटौती का आदेश जारी किया।
मंगलवार को तीज के अवकाश के बावजूद डीईओ द्वारा जारी एक आदेश में इन पांच विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से प्रार्थना सभा की तस्वीरें न भेजने के लिए जवाब-तलब किया गया और एक दिन की वेतन कटौती का निर्देश दिया गया। यह आदेश सोशल मीडिया और शिक्षा विभाग के हलकों में वायरल होने के बाद विवाद का विषय बन गया, क्योंकि तीज के दिन स्कूल बंद थे।
इस गलती को सुधारने के लिए बुधवार को डीईओ आनंद विजय ने एक शुद्धि पत्र जारी किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि वेतन कटौती का आदेश तीज के दिन की तस्वीरों के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग तिथियों पर प्रार्थना सभा की तस्वीरें न भेजने के लिए लागू किया गया है।
शुद्धि पत्र में प्राथमिक विद्यालय कछियावां थरथरी – 21 अगस्त, प्राथमिक विद्यालय तकिया कला बिहारशरीफ – 21 अगस्त, उच्च माध्यमिक विद्यालय अरपा हिलसा -12 अगस्त, प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय अस्थावां – 12 अगस्त, उच्च माध्यमिक विद्यालय शेखोपुर बिहारशरीफ- 12 अगस्त का उल्लेख किया गया है।
इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) मो. शाहनवाज ने बताया कि कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से बार-बार संदेश भेजे जाने के बावजूद इन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने तस्वीरें उपलब्ध नहीं कराईं। उ
न्होंने कहा कि विभागीय निर्देशों का पालन न करना गंभीर लापरवाही है। इन प्रधानाध्यापकों को दो दिनों के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं, प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि प्रार्थना सभा की तस्वीरें न भेजने वाले प्रधानाध्यापकों या प्रभारी शिक्षकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। निदेशक ने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही दोबारा पाए जाने पर दोषी शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों पर और सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, सभी कार्रवाइयों का प्रतिवेदन विभाग को भेजने का आदेश दिया गया है।
इस कार्रवाई ने नालंदा जिले के शिक्षकों और अभिभावकों के बीच चर्चा का माहौल बना दिया है। कई शिक्षकों का मानना है कि प्रार्थना सभा की तस्वीरें भेजने का नियम अनावश्यक रूप से सख्त है और इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं, कुछ अभिभावकों का कहना है कि इस तरह के नियम स्कूलों में अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देते हैं।
