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हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, बताए गए मुफ्त कानूनी अधिकार

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर प्रखंड के खुदागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत वैरा स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति हिलसा के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

शिविर की अध्यक्षता नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जिला जज गुरुविंदर सिंह मल्होत्रा ने की, जबकि सचिव राजेश कुमार गौरव, अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति हिलसा के अध्यक्ष सह एडीजे आलोक कुमार पांडेय, सचिव सह एसडीजेएम शोभना श्वेतांकी, पैनल अधिवक्ता विजय कुमार तथा हिलसा अनुमंडल कार्यालय स्थित लीगल सर्विसेज क्लीनिक में प्रतिनियुक्त पीएलवी आलोक कुमार विशेष रूप से मौजूद रहे।

मानसिक रूप से बीमार व दिव्यांगों के अधिकारों पर फोकसः इस विधिक जागरूकता शिविर का मुख्य विषय “नालसा मानसिक रूप से बीमार एवं मानसिक रूप से दिव्यांग अक्षम व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवा योजना–2015” रहा। शिविर की शुरुआत परिचय सत्र से हुई, जिसमें पीएलवी आलोक कुमार ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के गठन, उद्देश्य और कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में गठित यह प्राधिकरण 9 नवंबर 1995 से पूरे देश में विधिवत रूप से कार्यरत है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज के गरीब, वंचित, असहाय, आर्थिक रूप से कमजोर, दिव्यांग, महिलाएं, पुरुष, बच्चे, अनुसूचित जाति-जनजाति सहित जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना है।

मुफ्त इलाज से लेकर कानूनी सहायता तकः पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने मानसिक रूप से बीमार एवं मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 39(क) के तहत ऐसे व्यक्तियों को समानता, जीवन और निःशुल्क विधिक सहायता का अधिकार प्राप्त है।

उन्होंने यह भी बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में इन लोगों को सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और न्यायालयों व विधिक प्राधिकरणों में पूर्णतः निःशुल्क कानूनी सहायता दी जाती है। नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग, परामर्श, काउंसलिंग और प्राथमिक इलाज की सुविधा उपलब्ध है।

साथ ही सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत ओपीडी, आईपीडी सेवा, दवाइयां, योग और पुनर्वास सहायता भी दी जाती है। मानसिक बीमारी व मानसिक दिव्यांगता को विकलांगता प्रमाण पत्र में शामिल किया जाता है, जिसके आधार पर संबंधित व्यक्ति सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

14 मार्च 2026 को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालतः शिविर के अंत में पीएलवी आलोक कुमार ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी देते हुए बताया कि 14 मार्च 2026 को बिहारशरीफ एवं हिलसा कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसमें सभी प्रकार के सुलहनीय मामलों का निष्पादन किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश पर “नालसा – मेडिएशन फॉर द नेशन” अभियान 1 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक चलाया जा रहा है, जिसके तहत अधिक से अधिक मामलों का आपसी सुलह-समझौते से निपटारा किया जा रहा है।

बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी और ग्रामीण रहे मौजूदः इस अवसर पर डॉ. कल्पना सिन्हा (आयुष), राकेश सिंह सीएचओ, संतोष कुमार सीएचओ, चंदन राजा सीएचओ, हिमांशु कुमार सीएचओ, विमला कुमारी एएनएम, संगम सरिता एएनएम, पूनम कुमारी, संजु कुमारी, सुषमा प्रभा, गीता कुमारी सहित कई आशा कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और ग्रामीण मौजूद थे।

समाचार स्रोत: नालंदा दर्पण डेस्क / रामकुमार वर्मा

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