बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड में दो स्कूलों के शिक्षकों की लापरवाही पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) राज कुमार ने सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। मध्य विद्यालय धरहरा और किसान प्लस टू उच्च विद्यालय धरहरा के निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की उदासीनता और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की स्थिति सामने आई। दोनों स्कूलों के सभी शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है। अन्यथा उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई शुरू की जाएगी।
कहा जाता है कि बीते बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजे DEO राज कुमार ने मध्य विद्यालय धरहरा का औचक निरीक्षण किया। पढ़ाई का समय होने के बावजूद बच्चे कक्षाओं में नहीं, बल्कि बाहर घूमते पाए गए। विद्यालय का प्रवेशोत्सव अभियान में प्रदर्शन भी बेहद खराब रहा। निरीक्षण के समय प्रधानाध्यापक सुधीर प्रसाद विद्यालय में मौजूद नहीं थे और बाद में वहां पहुंचे। मध्याह्न भोजन भी निर्धारित समय पर नहीं कराया गया था। विद्यालय में तैनात सभी 12 शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद तो थीं। लेकिन कोई भी शिक्षण कार्य नहीं कर रहा था।
DEO ने इसे शिक्षकों की गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा कि शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं और मनमानी कर बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण जमा करने का निर्देश दिया। स्पष्टीकरण न मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इसी दिन पूर्वाह्न 11:15 बजे DEO ने सिलाव प्रखंड के किसान प्लस टू उच्च विद्यालय धरहरा का भी निरीक्षण किया। यहां स्थिति और भी चिंताजनक थी। कोई भी वर्गकक्ष संचालित नहीं हो रहा था। सभी शिक्षक एक साथ बैठे हुए पाए गए। केवल पुस्तकालय में दो छात्र और प्लस टू भवन की एक कक्षा में मात्र चार छात्र उपस्थित थे। विद्यालय में तैनात 16 शिक्षक-शिक्षिकाओं में से 14 मौजूद थे। जबकि दो शिक्षक आकस्मिक अवकाश पर थे।
DEO ने कहा कि शिक्षकों का एक साथ बैठे रहना और बच्चों की नगण्य उपस्थिति यह दर्शाती है कि शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने मौजूद 14 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है और सख्त कार्रवाई की बात कही है।
इन दोनों स्कूलों की स्थिति ने जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। DEO ने स्पष्ट किया कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोनों स्कूलों के शिक्षकों को अब अपने बचाव में स्पष्टीकरण देना होगा। वरना विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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