Home थरथरी  थरथरी में ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का टंगा पोस्टर

 थरथरी में ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का टंगा पोस्टर

थरथरी (नालंदा दर्पण)। थरथरी प्रखंड अंतर्गत भतहर गांव में ग्रामीणों ने आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। ग्रामीणों ने अपनी मांग को बुलंद करने के लिए गांव में रोड नहीं तो वोट नहीं का बैनर टांगकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन न केवल उनकी वर्षों पुरानी मांग को दर्शाता है, बल्कि नेताओं के खोखले वादों के प्रति उनके गुस्से और हताशा को भी उजागर करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि भतहर काली स्थान से आंगनबाड़ी केंद्र होते हुए दलित टोला तक पक्की सड़क निर्माण की मांग पिछले 10 वर्षों से की जा रही है। इस मांग को उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायक और सांसद तक बार-बार पहुंचाया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। हर चुनाव में नेताओं द्वारा सड़क निर्माण का वादा किया जाता है और वोट लेने के बाद ये वादे हवा में गायब हो जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण बारिश में कीचड़ और गड्ढों से आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित होती हैं।

आक्रोशित ग्रामीणों ने अब ठान लिया है कि जब तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं होगा, वे मतदान का बहिष्कार करेंगे। गांव में लगाए गए बैनर और नारेबाजी के जरिए उन्होंने अपने इस संकल्प को स्पष्ट कर दिया है।

ग्रामीण मंटुन कुमार ने बताया कि चुनाव के समय सांसद और विधायक हमारे दरवाजे पर वोट मांगने आते हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई हमारी सुध लेने नहीं आता। हमारा धैर्य अब जवाब दे चुका है। उन्होंने आगे कहा कि सड़क निर्माण के बिना गांव का विकास संभव नहीं है, और अब वे खोखले वादों पर भरोसा नहीं करेंगे।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए नेताओं की जवाबदेही पर सवाल उठाए। मनोज कुमार, वृजनंदन प्रसाद, विश्वजीत कुमार, उपेंद्र कुमार, विनोद कुमार, विजय कुमार सहित कई ग्रामीण इस मौके पर मौजूद थे।

सबने एक सुर में कहा कि सड़क निर्माण न केवल उनकी मूलभूत जरूरत है, बल्कि यह गांव के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भी आवश्यक है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे इस अभियान को और तेज करेंगे और आने वाले चुनावों में इसका असर दिखाई देगा।

हैरानी की बात यह है कि इस प्रदर्शन के बावजूद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग को अनदेखा करना नेताओं की जनता के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह प्रदर्शन और रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा नेताओं को उनकी जिम्मेदारी का अहसास करा पाएगा या यह मांग एक बार फिर अनसुनी रह जाएगी?

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version