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CM की X पोस्ट से गदगद हुए रसोइया, नाइट गार्ड और PT टीचर

The cook, night guard and PT teacher were thrilled with CM's X post
The cook, night guard and PT teacher were thrilled with CM's X post

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। आज सुबह की पहली किरण के साथ बिहारशरीफ प्रखंड के एक छोटे से स्कूल की रसोइया रमंती देवी के चेहरे पर आज एक अलग ही चमक थी। कारण? बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक X पोस्ट, जिसने मध्याह्न भोजन में कार्यरत 2.38 लाख रसोइयों, 9360 रात्रि प्रहरियों (नाइट गार्ड) और 8386 शारीरिक शिक्षा व स्वास्थ्य अनुदेशकों (पीटी टीचर) के जीवन में खुशी की लहर दौड़ा दी।

मुख्यमंत्री ने अपने X हैंडल पर घोषणा की कि मध्याह्न भोजन में कार्यरत रसोइयों का मानदेय 1650 रुपये से बढ़ाकर 3300 रुपये कर दिया गया है। वहीं माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में तैनात रात्रि प्रहरियों का मानदेय 5000 रुपये से दोगुना कर 10,000 रुपये और शारीरिक शिक्षा व स्वास्थ्य अनुदेशकों का मानदेय 8000 रुपये से बढ़ाकर 16,000 रुपये किया गया है। इसके साथ ही इन कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि को भी 200 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये करने का निर्णय लिया गया है।

इस घोषणा ने नालंदा जिले के स्कूलों में कार्यरत इन कर्मचारियों के बीच उत्साह की लहर पैदा कर दी है। रमंती देवी पिछले दस वर्षों से मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं। वह कहती हैं कि यह वृद्धि हमारे लिए बहुत मायने रखती है। अब हम अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हुए सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2005 में जब उनकी सरकार बनी थी, तब शिक्षा का कुल बजट मात्र 4366 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 77,690 करोड़ रुपये हो गया है। इस दौरान न केवल शिक्षकों की भारी संख्या में नियुक्ति हुई, बल्कि नए स्कूल भवनों का निर्माण और आधारभूत संरचनाओं का विकास भी हुआ।

लेकिन क्या यह सिर्फ आंकड़ों की बात है? नालंदा के एक सरकारी स्कूल के रात्रि प्रहरी रामप्रवेश कहते हैं कि हम रात-दिन स्कूल की सुरक्षा करते हैं। यह पैसा हमारे काम को सम्मान देता है। अब हम और मन लगाकर काम करेंगे। उनके शब्दों में यह साफ झलकता है कि यह निर्णय केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी इन कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा।

मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में रसोइयों, रात्रि प्रहरियों और शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा है कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में इनका योगदान अतुलनीय है। इनके सम्मान में हमने उनके मानदेय को दोगुना करने का निर्णय लिया है।” यह कदम न केवल इन कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार शिक्षा के हर पहलू को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

नालंदा के एक पीटी टीचर संजय कुमार ने बताया कि 16,000 रुपये का मानदेय हमें अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों के लिए और बेहतर तरीके से मदद करेगा। हम बच्चों को और उत्साह से खेल और स्वास्थ्य के गुर सिखाएंगे।

बहरहाल, मुख्यमंत्री की यह घोषणा नालंदा जैसे शिक्षा के ऐतिहासिक केंद्र में कार्यरत प्रभावित कर्मचारियों के लिए एक नई शुरुआत है। क्या यह वृद्धि शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगी? क्या यह अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बनेगा? इन सवालों का जवाब भविष्य में मिलेगा, लेकिन अभी के लिए नालंदा के स्कूलों में कार्यरत ये कर्मचारी इस सम्मान से गदगद हैं और अपने काम के प्रति और अधिक समर्पित होने का संकल्प ले रहे हैं।

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