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कतरीसराय पीएचसी में दवाओं का भंडार, लेकिन डॉक्टर-नर्सों की कमी से मरीज हलकान

The Katarisara PHC is stocked with medicines, but the lack of doctors and nurses has left patients worried.

कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। एक ओर जहां राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कतरीसराय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। पीएचसी में 280 प्रकार की दवाइयाँ  स्टोर में मौजूद हैं, मगर उन्हें मरीजों तक पहुँचाने वाले चिकित्सक, नर्स और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है।

सरकारी मानकों के अनुसार इस प्रखंड स्तरीय अस्पताल में 7 चिकित्सकों की जरूरत है, जबकि यहाँ मात्र 3 डॉक्टर उपलब्ध हैं। इनमें से एक डॉक्टर प्रतिनियुक्ति पर है और एक दंत चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। छह बेड वाले इस अस्पताल में 10 नर्सों की आवश्यकता है, परंतु केवल 6 नर्सें कार्यरत हैं। कम्पाउंडर का एक भी पद भरा नहीं गया है।

एक एएनएम महापति देवी के बारे में स्थानीय लोगों का आरोप है कि पदस्थापन के बाद से ही उन्होंने पीएचसी में नियमित उपस्थिति नहीं दी। कार्रवाई की बात होने पर ऊपर से फोन आने की शिकायत अक्सर सुनने को मिलती है।

अस्पताल में एएनएम के 4 पद रिक्त, पैथोलॉजिस्ट का 1 पद रिक्त, फार्मासिस्ट का 1 पद रिक्त, नॉन मेडिकल स्टाफ का 1 पद रिक्त, चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के 2 पद रिक्त, सर्जरी, एनेस्थीसिया, पीडिया और जनरल फिजिशियन के कई महत्वपूर्ण पद वर्षों से खाली हैं।

फिलहाल अनुबंध पर एक लेखापाल, बीसीएमआई, बीएचएम और फैमिली प्लानिंग काउंसलर यहाँ कार्यरत हैं, लेकिन अस्पताल की मूल उपचार व्यवस्था स्टाफ की कमी से बुरी तरह प्रभावित है।

स्थानीय महिला मीना देवी बताती हैं कि महिला चिकित्सक नहीं होने से वे कई समस्याएँ पुरुष डॉक्टरों को बताने में संकोच महसूस करती हैं। वहीं टींकु कुमार का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के कारण कई बार साधारण बीमारी में भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।

डॉ. प्रभात रंजन का कहना है कि स्टाफ की कमी के बावजूद वे लोग अतिरिक्त समय देकर मरीजों को बेहतर सेवा देने की कोशिश करते हैं। वहीं चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पिंकी वर्णवाल ने बताया कि उपलब्ध सभी कर्मचारी अपनी पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, ताकि जरूरतमंद मरीजों को परेशान न होना पड़े।

स्थानीय लोग और स्वास्थ्य सेवाओं पर नजर रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि जवाबदेही की कमी का भी है। एक प्रखंड स्तरीय अस्पताल का यह हाल प्रशासनिक ढांचे पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों को कठोर कदम उठाने और लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की सख्त आवश्यकता है।

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